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जो देखता हूँ, वही लिखता हूँ

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jlsingh


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किसी भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया पोस्ट नहीं हो रही

Posted On: 16 Sep, 2016  
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Junction Forum में

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हिंदी गौरव (हिंदी दिवश पर विशेष)

Posted On: 14 Sep, 2016  
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Hindi Sahitya Junction Forum Special Days में

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कुछ ‘मुक्तक’ आँखों पर

Posted On: 28 Aug, 2016  
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कविता में

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रियो ओलम्पिक में हमारी बेटियां

Posted On: 20 Aug, 2016  
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lifestyle social issues न्यूज़ बर्थ में

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स्नेह सूत्र (रक्षा बंधन)

Posted On: 18 Aug, 2016  
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social issues कविता न्यूज़ बर्थ में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

श्री जवाहर जी लेख दो बार पढा पूरा लेख आपके अपने मन का संघर्ष है सच के बहुत करीब है दो विचारों का संघर्ष आज पैसे का सबसे अधिक महत्व हैं पैसे से ही इन्सान सब कुछ हासिल कर सकता है लेकिन हमारी संस्कृति में पैसे को कुछ भी न समझा कर आदर्शों की बात होती है बहुत अच्छी लगती है | एक ही समय में दो वैज्ञानिक हुए हमारे मिसाइल में सादा जिंदगी जीवन के अंत तक काम करते रहे दूसरी और पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक छुपा कर एटम की टेक्नॉलोजी बेचीं शायद एक द्वीप भी खरीदा जम कर पैसा बनाया सच्चाई यह है कुछ ईमानदार हैं उनका स्वभाव ऐसा है कुछ को अवसर ही नहीं मिला वह भी ईमानदार हैं कुछ मौका मिलने पर चूकते नहीं हैं आपकी मीमांसा करने का अभी समय नहीं है आप ज्यादा ही गम्भीरता से सोच रहे हैं आप के विचारों तक शायद में पहुंच नहीं पायी हूँ |परन्तु आप बुद्धिजीवी हैं आपके लिए वर्चु ज्यादा महव पूर्ण है हाँ तर्क अपनी जगह हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी इतनी सुन्दर भारत के लोगो की असलियत का चित्र आपने लिखा.हमारे धर्म में हमेश कहा की मनुष्य को मेहनत के साथ ईमानदारी  और नैतिकता से धन उपार्जन कर खुश रहना चाइये .देश को पहले अंग्रेजो ने लूटा फिर गांधीजी ने कांग्रेस को भंग करने के लिए कहा था क्योंकि उन्हें मालूम हो गया था की आज़ादी के बाद देश के नेता अंग्रेजो से ज्यादा लूटेंगे और नैतिकता को भूल जायेंगे पहले राजनीत सेवा मानी जाती थी आज पैसा,प्रतिस्था और कुर्सी पाने का साधन बन गया आज कल लोग अपनेदुःख से कम दुखी है लेकिन दुसरो के सुख से ज्यादा दुखी है ऍहम लोगो को पच्छिम से कम से कम राजनैतिक स्वस्थता सीखनी चाइये.सुन्दर लेख के लिए आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

देवाधिदेव महादेव के तीसरा नेत्र खोलने का समय तो आ ही गया है आदरणीय जवाहर जी । इससे अधिक उचित समय और कौनसा अपेक्षित है ? जहाँ तक 'सत्यमेव जयते' का प्रश्न है, वह तो अपने आप में ही केवल एक सदिच्छा है, इससे अधिक कुछ नहीं । इसका पूर्ण स्वरूप है - 'सत्यमेव जयते नानृतम' जिसका अर्थ है - 'सदा सत्य की ही जय हो, असत्य की नहीं' । स्पष्टतः यह सदाचारियों एवं सत्य के अनुगामियों की सदिच्छा मात्र ही है जो केवल कल्पनाओं एवं कथाओं में ही पूर्ण होती है । मैंने तो अपने जीवन में सौ में से निन्यानवे अवसरों पर सत्य को असत्य से पराजित होते ही देखा है क्योंकि जय-पराजय का निर्णय उचित-अनुचित के भेद से नहीं वरन शक्ति-संतुलन से होता है जो अधिकतम अवसरों पर असत्य के ही पक्ष में रहता है । इसके अतिरिक्त सत्य, न्याय एवं सद्गुणों में विश्वास रखने वाले भी जब अपने हितों के संरक्षण अथवा विस्तार हेतु व्यवस्था के नियंत्रकों के पक्ष में चले जाते हैं अथवा सत्य-असत्य के युद्ध में तटस्थ रहने का अभिनय करते हैं तो सत्य की पराजय सुनिश्चित हो जाती है क्योंकि तटस्थता परोक्ष रूप से शक्तिशाली आततायी का ही साथ देती है, अशक्त पीड़ित का नहीं ।  

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सार्थक लेख है जवाहर जी आपका । यह अच्छी बात है कि सदा अलगाववादियों का समर्थन करने वाली महबूबा मुफ़्ती की भी आँखें खुल गई हैं । लेकिन कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में भी हिंसक आंदोलनों के जटिल होने के पीछे सेना की ज़्यादतियाँ भी उत्तरदायी रही हैं । सेना की प्रशंसा अपनी जगह है लेकिन उसमें सभी दूध के धुले नहीं हैं । यदि सेना की ओर से निर्दोषों पर ज़्यादतियाँ नहीं होतीं तो न तो ईरोम शर्मिला को सोलह साल तक अनशन करना पड़ता और न ही बुरहान वानी को आम कश्मीरियों की दृष्टि में वीरगति पाने वाले नायक की श्रेणी प्राप्त होती । आपने अपने लेख में जिन पक्षों को स्थान दिया है, उनके साथ-साथ समस्या का यह पक्ष भी समान रूप से महत्वपूर्ण है जो साधनहीन पीड़ितों को न मिलने वाले न्याय से जुड़ा है । ऐसे पीड़ितों की भावनाओं का लाभ उठाकर ही अलगाववादी उन्हें अपने साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं । इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । यह दायित्व सरकार का भी है तथा सैन्य उच्चाधिकारियों का भी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

अच्छा लेख है जवाहर जी । हम बेटियों की सफलता पर प्रसन्नता तो मानना चाहते हैं लेकिन उन्हें उनका अधिकार नहीं देना चाहते । यदि इस लेख में आपने मैराथन धाविका ओ.पी. जाइशा को 42 किलोमीटर की दौड़ के बीच में कभी पानी तक नहीं दिए जाने एवं उसके निर्जलीकरण की शिकार होकर फ़िनिशिंग लाइन पर गिर जाने की त्रासदी पर भी कुछ कहा होता तो आपकी अभिव्यक्ति अधिक संतुलित होती । साक्षी की सफलता पर उसे बधाइयां देने वाले खेल अधिकारी तथा संस्थान यह भी न भूलें कि उसके तो ओलंपिक में भाग लेने के मार्ग में ही अड़ंगे लगाए जा रहे थे । यह उसका (और भारत का) सौभाग्य ही था कि वह रियो जा सकी और देश का मान बढ़ाने का अवसर पा सकी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

साक्षी और सिंधु को बधाई देते समय मैराथन धाविका ओ.पी. जाइशा को भी न भूलिएगा सरिता जी जिसे ४२ किलोमीटर की मैराथन दौड़ के दौरान भारतीय खेल अधिकारियों ने पानी तक नहीं दिया तथा दौड़ के अंत में वह निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) से पीड़ित होकर वहीं गिर पड़ी । क्या हमारे देश की किसी अनुत्तरदायी व्यवस्था में कोई सुधार हो सकेगा ? इक्का-दुक्का खिलाड़ी तो व्यक्तिगत प्रयासों तथा प्रतिभा के बल पर सफलता आगे भी पाते ही रहेंगे लेकिन देश को अनेक खेलों में उल्लेखनीय सफलता तो तभी मिलेगी जब हमारी परजीवी और निकम्मी व्यवस्था के दोषों को दूर किया जाएगा । दो खिलाड़ियों की अपनी प्रतिभा और लगन से उद्भूत सीमित सफलता के नशे में कहीं हम इस आवश्यकता को न बिसरा दें जैसा कि हम सदा ही करते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी आपने बहुत ही सटीक और सही विश्लेषण दलित राजनीती पर किया नेताओं ने आज़ादी के बाद दलितों और मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया लेकिन दिल से उनके लिए उनकी दशा को सुधरने के लिए लग्न से कार्य नहीं किया.दलितों के नाम पर लालू मायावती मुलायम राज्य कर रहे क्या मायावती दलित लगती महारानी की तरह रहती देखिओ हिन्दुओ की हालत भी बहुत अच्छी नहीं कश्मीर से पंडित निकाल दिए गए कर्नाटक,केरल में हिन्दू मारे जाते केरल के कन्नूर जिले में हिन्दुओ के साथ मुसलमान बहुत ज्यादती करते गुना और रोहित के मामले में राजनीती मोदीजी और बीजेपी के विरोध की वजह से मीडिया ने की क्यों राजनेता केवल दादरी ,हैदराबाद और गुना गए अन्य जगह क्यों नहीं क्यों इन घटनाओं को महीनो दिखया गया बीजेपी तो फ़ौरन कार्यवाही करती दुसरे नहीं करते लेकिन मीडिया चुप इन सबके पीछे अन्तराष्ट्रीय साजिस है लोकतंत्र में कानून सरोपरी होना चाइये.सुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी टीवी में देख कर बहुत दुःख हो रहा की किस तरह देश प्रकर्ति की कोप से ग्रस्त है चारो तरफ तवाही तवाही ये सब प्रक्रति के साथ छेद छाड़ से हो रहा जनसँख्या अधाधुंध बढ़ रही इस पर रोक थम के लिए कुछ नहीं हो रहा आरामदेही की वजह से ये सब हो रहा शहरो में पानी निकालने की कोइ उपाय नहीं लेकिन ऐसा चीन,अमेरिका ,जापान और दुसरे देशो में देखने को मिला है जब तक युद्ध स्तर पर सोच कर कार्य नहीं होगा ये ऐसा ही चलेगा गोमुख भी खिसक रहा आसाम की हालत देख कर तरह हा रहा बंगलोरे में सड़क पर लोग मछली पकड़ रहे रहे.जबतक इंसान प्रकृति का सम्मान नहीं करेंगे ऐसा ही चलता रहेगा.बहुत ही अच्छा लेख और विस्तार से चर्चा,अधिकारी भी लापरवाह डिक्की में सड़क में गद्दों के वजह से एक मोटर सवार ट्रक से थककर लग मर गया सदक्पर तडपता रहा किसी ने फिकर नहीं कितने लोग खुले मैन्होल में गिर कर मर जाते कुछ अधिकारिओ की लापरवाही कुछ नागरिको की जो चुरा लेजाते.इस पर भी राजनीती विरोधी बीजेपी पर हल्ला बोलते लेकिन इसमें सरकार की कोइ गलती नै ये ७० साल का पाप है जिससे धोने में समय लगेगा.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! पूर्ण विनम्रता के साथ मैं अपना पक्ष रख रहा हूँ. रामचरित मानस में तुलसी दस ने शुरुआत में ही कहा है- पूजिये विप्र शील गन हीना, शूद्र न गुण गण ज्ञान प्रवीणा. वर्ष ऋतू के वर्णन में अति बृष्टि चली फ़ूट कियारी, जिमि सुतंत्र भये बिगरही नारी. ...और भी नारी सुभाउ सत्य सब कहहीं, अवगुन आठ सदा उर रहहीं.. हाँ कथाकार लोग इन पंक्तियों की अलग अलग व्याख्या करते हैं. यह भी सही है की उस समय के अनुसार हो सकता है यह बातें सही हों.. आज भी गलियां जो पुरुषों द्वरा प्रयुक्त होती हैं उसमे गली तो स्त्री जाती को ही दे जाती है... मेरा तर्क वही था.. हाँ यह अलग बात है आज गलियों अपशब्दों, प्रताड़नाओं का अलग अलग ढंग से राजनीतिक लाभ लिए जाने का प्रचलन चल पड़ा है. आपकी उच्च कोटि की प्रतिक्रिया का हम हमेशा स्वागत करते हैं.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी जब भी अखंड रामायण के पाठ में हमने हम चार बहनें हैं मेरी तीन बहने सस्वर रामायण का पाठ अति सुंदर करती हैं मैं उनके पीछे केवल ताली बजाती हूँ हाँ आगे यह चौपाई आई है हम कुछ देर तक चुप हो कर विरोध करते हैं\कुछ ने हमारे विरोध प्रदर्शन पर लेख भी लिखे हमारा विरोध जारी रहा आप समझ जायेंगे तुलसी दस जी ने राम चरित्र मानस की जब रचना की मुगल काल था इस्लामिक कानून देश पर लागू था इस्लामिक कानून में महिला के लिए प्रताड़ित करना पुरुष का अधिकार माना जाता है पकिस्तान में तो बकायदा कानूनी मान्यता दी है रहा शुद्र उनका भगवान राम ने शबरी जन जाती की थी के जूठे बेर खाए शूद्र वेद पाठी था उनका प्रसंग शायद उत्तर काण्ड में आता है उसका विरोध हुआ था यह भी उचित नहीं था \. लेकिन तुलसी दास भगवती सीता और मन्दोदरी का जिक्र आदर से करते हैं बहुत अच्छा प्रश्न उठाता लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी बहुत दिनों के बाद आपका लेख लिखा आपने कई लेखो को एक में मिला दिया.दलित समाज का एक अंग थे और वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर थी जबतक गुरुकुल शिक्षा देश में प्रचारित थी कोइ भेद भाव नहीं था सब एक जगह पढ़ते थे दलितो के साथ नफरत विदेशी आक्रमण के बाद हुआ और अंग्रेजो ने फूट डालो राजनीती अपना कर इसको और हवा दी.दलितों के साथ घटना स्वतंत्रता के बाद भी हो रही और उनकी और किसानो की दश के लिए मोदीजी को दोष देना गलत हट वे ७० साल की गंदगी साफ़ कर रहे लेकिन मीडिया में केवल बजो शासन की दलित उत्पीडन की खबरे देते और वोटो के भूके नेता इन जगहों को तीर्थ बना लेते मीडियादुसरे प्रदेशो की घटनाओं पर कोइ आंसू बहाने नहीं जाता.बीजेपी अपने नेताओ के खिलाफ कार्यवाही करती जबकि अन्य दल नहीं और मीडिया इस पर भी चुप.ऍआपके लेख में प्रितिक्रियाये देने में एक लेख हो जाएगा आपको इस सुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री जवाहर जी अच्छा तर्क संगत लेख जाकिर नायक ने आज का आधुनिक बाना फन लिया है अंग्रेजी से पढ़े लिखे तबके को आकृष्ट करता है एक बार हमारा परिचित मुस्लिम युवक पढ़ा लिखा मुझसे पूछा आपके शास्त्रों में शायद ऋग्वेद में लिखा है एक अवतार होगा मैने कहा हाँ कलंगी अवतार कहते हैं आगे सभी धर्म कहते हैं पैगम्बर आयेंगे और आखिरी पैगम्बर आ गये मुहम्मद साहब जब आ गये तो सबको उनकी राह पर चलना होगा में हैरान हो गयी मेने कहा क्या भगवान का इदारा ( दफ्तर )बंद हो गया मेरे पास जबाब है तुम सहन नहीं सकोगे यह सहन शीलता हममे हैं तभी हर थपेड़ों के बाद भी हम हैं आज के दैनिक जागरण में श्री शंकर का लिखा लेख है वक्त मिलेगा पढियेगा सटीक लिखा है

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी  आजकल डॉ जाकिर नैक की बहुत चर्चा टीवी में हो रही जहाँ ज्यादातर लोग उसकी निंदा कर रहे कुछ समर्थक भी बेशर्मी से टीवी में अपनी बात करते.इसके बारे में मुम्बई पुलिस कमिश्नर ने २००८ में ही केंद्र और प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेज दी लेकिन वोट बैंक की वजह से कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया.हॉल में बांग्लादेश आतंकवादी हमले के बाद इसकी चर्चा शुरू हुई और अब पीस टीवी भारत और बांग्लादेश में बन हो गया और इसके खिलाफ भी लेकिन हमारा सेकुलर मीडिया भी कमल का ज्यादातर मामलो में हिन्दू धर्म गुरुओ को अपमानित करता .मुस्लिम वोटो के लिए जब हिन्दुओ को जबरदस्ती फंसा दिया गया और आतंकवादियो का समर्थन भी होता जहां दिग्विजय सिंह ऐसे नेता इसको शांति दूत कह उस देश का भगवान् ही भला करे.वैसे इस्लाम देर से आया था इसलिए मिहम्मद ने तलवार के बल पर फ़ैलाने के लिए कहता और इसी का परिणाम विश्व भुगत रहा.इतने सुन्दर लेख के लिए हार्दिक बधाई.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम. जैसा कि आप अवगत हैं, मैं भी किसान का बेटा हूँ. मेरे पिता जी जब स्वयं खेती के कामों में लगे रहते थे, उस समय उपज भी अच्छी होती थी और घर का सब शुद्ध सामान मिल जाता था खाने पीने को. तेजी हवा भी खेतों में टहलने से ही मिल जाती थी. पर अब खेती में लगत के अनुसार दाम नहीं मिलते. हमलोग अपनी जीविका के लिए शर में आगये और शर के ही होकर रह गए. गांव तक सड़कें पहुँच गयी हैं. इतन फायदा गांव वालों को हुआ है कि वे ऑटो से शहर जाकर कुछ कमाकर (डेली मजदूरी कर के ही ) कुछ अपनी स्थिति सुधारने में लगे हैं. बेहतर पढाई के लिए भी सहारों में ही जाना पड़ता है. इसलिए अभी गांव की स्थिति में बहुत सुधार होने बाकी हैं. शहर तो तरक्की कर रहे हैं. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जवाहर बेटे, आयुष्मान ! कभी कभी चाचा की खबर भी ले लिया करो ! शहरों में गरीबी पचाने की क्षमता होती है, सचमुच सब तरह के लोग गाँव छोड़कर शहर की तरफ भागते हैं की कम से कम ढंग से रोटी खाने का जुगाड़ तो होजाएगा ! शहरों में ही झुग्गी झोपड़ियों में लोग गुजर बसर करते हैं यहां गाँव की तरह ताजी हवा, कुंवे का शुद्ध पानी, खेतों की ताजी सब्जियां भले ही नहीं मिलती फिर भी, ऊंची ऊंची गगन चूमती इमारतें, माल, पार्क, बच्चों के खेलने के लिए, झूले और बहुत सारे उपकरण, जवान बुजुर्गों को पार्कों में जिम के साधन ! इन सब साधनों को देखकर लोग शहरों से जुड़ते हैं ! विस्तृत और नयी नयी जानकारियों से सजा संवारा लेख के लिए आशीर्वाद ! चाचा

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम आदरणीय जवाहर भाई आपके लेख पढने से बहुत सी जानकारी मिली वैसे हमने भी ये प्रोग्राम टीवी में देखा था.गावो की दुर्दशा के लिए आजादी के बाद से सरकार का रवईया ख़राब रहा यदि कुछ उद्योग स्थानीय स्थित के अनुसार गावो में लगाये जाए तो शहर और गावो मिलकर देश को बदल सकते क्योंकि शहर इतनी ज्यादा गावो की आबादी लेने में समर्थ होंगे इसके अलावा हमारे नागरिक बहुत गैरजिम्मेदार है सिविक सेंस है नहीं इसको सुधारना पड़ेगा,मोदीजी जिसतरह  कार्य कर रहे देश की दिशा बदल जायेगी,देश भाग्यशाली है की उनका ऐसा दूरदर्शी और मेहनती प्रधान मंत्री मिला ६९ साल की गन्दगी को दूर करने में कुछ समय लगेगा.इतने सुन्दर लेख के लिए सादर आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सम्पूर्ण राष्ट्र कों कंपित कर देने वाली इस लोमहर्षक घटना पर आपका तथ्याधारित विस्तृत लेख अत्यंत सटीक, विचारोत्तेजक एवं उपयोगी है जवाहर जी । भारतीय पुलिस अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए बड़की हाँकने एवं असत्यापित तथ्यों को घोषित कर देने में दक्ष हैं ताकि उन्हें जनता एवं पत्रकारों के प्रश्नों से तात्कालिक राहत मिल सके । अतः मुझे विश्वास नहीं कि रामवृक्ष सचमुच मारा गया है । इस तथ्य की पुष्टि ठोस आधार पर होनी चाहिए, किसी पुलिस अधिकारी के वक्तव्य से नहीं । यदि वह जीवित है तो जो हुआ है; वह भविष्य में कहीं और, किसी और रूप में पुनः हो सकता है । इतना कुछ गंवा देने के उपरांत तो हमारे शासकीय एवं प्रशासनिक तंत्र को प्रैस के समक्ष गाल बजाने के स्थान पर सजग एवं सक्रिय होकर सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए । जनता के प्रश्नों से बचा नहीं जा सकता । कुर्सियों पर बैठने वालों को उत्तर तो देने ही होंगे ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री जवाहर जी विस्तार से लिखा गया अच्छे निष्कर्ष "गौर से देखने से पता चला कि प्रधानमंत्री के भाषण में ये वे मौके थे जो संकेत देते थे कि भारत अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को राजी है। अमेरिकी जनप्रतिनिधि विश्व में इस भयावह मंदी के दौर में यह सुनकर गदगद क्यों नहीं होंगे कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला और 130 करोड़ आबादी वाला भारत आज मुश्किल समय में अमेरिका के साथ है, "जब रशिया मजबूत था नेहरु जी ने तटस्थता की निति अपनाई थी इंदिरा जी मजबूत नेता थे अमेरिका की विदेश नीति उनको कम पसंद करती थी उन्होंने बंगलादेश बनाया था वः अमेरिकी जहाजी बेड़े से भी नहीं डरी थी सौ बात की एक बात "आतंकवादी पकिस्तान की, तो यह समय ही बताएगा कि पाकिस्तान के प्रति अमेरिका का क्या रुख रहता है और पाकिस्तान अपनी आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाता है या नहीं? " बाकी तो मीठी बातें हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

बहुत आश्चर्य होता है इन घटनाओं को देख-सुनकर ! हमारे देश में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है /होता रहा है / ...जिस पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होती. जब पानी सर से ऊपर चला जाता है/कोर्ट का डंडा पड़ता है तब कार्रवाई होती है, वह भी आधे अधूरे तैयारी के साथ. इस घटना में हमारे दो पुलिस अधिकारी की मौत हुई जो दुखद है. हम सब उनके लिए श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं. अच्छा हुआ रामवृक्ष भी मारा गया. नहीं मरा होता तो उसे भी जेल में डालकर कई साल तक मुकदमे चलते रहते. कुछ बच्चों के भी बयान आये हैं, जिससे पता चलता है की रामवृक्ष का कैसा खौफ था वहां? कुछ शिक्षा की भी कमी है या जागरूकता की... काफी सारे लोग दिग्भ्रमित होकर ऐसे दुष्ट लोगों के अनुयायी बन इसके कब्जे में आ जाते हैं. अभी भी बहुत जरूरत है जन जागरण की.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर लाल जी आप पुरे रिसर्च के साथ लेख लिखते मेघालय के जिस गावो में मोदीजी गए थे और सबसे स्वाच गाँव है उसका पूरा इतिहास आपने लिख दिया मोदीजी के ज्यादातर मंत्री अच्छे कार्य कर रहे क्योंकि सबका लेख जोखा मोदीजी खुद रखते है देश का सौभाग्य है की देश को इतने मेहनती ,सूझ भूझ वाला और जनता से जुड़ा नेता मिला.और उम्मीद है देश ५ सालो में बदल जाएगा अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी विशिष्ट स्थान मिल रहा है.जिस तरह विरोधी खास कर मुस्लिम नेता हमला करते कुछ नेताओ द्वारा जवाब देना जरूरी है.देखिये ७० साल की गंदगी दूर करने में समय लगेगा.बीजेपी शासित राज्य भी बहुत अच्छा कर रहे.हम लोगो को प्रधान मंत्री का समर्थन करना चाहिए

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आजकल समयाभाव के कारण फिल्मों में बहुत ज्यादा रूचि नहीं दिखा पाता हूँ, आपने अपनी ख़ुशी का इजहार मेरे ब्लॉग पर आकर किया था, पर आज ही आपका यह ब्लॉग पढ़ सका. मुझे बहुत दुःख है कि मैंने आपकी खुशी में अपनी खुशी शामिल करने में बहुत देर कर दी. आजकल फेसबुक पर बहुत ज्यादा समय देने लगा हूँ. आप मेरी फेसबुक फ्रेंड होती तो इस खुशी को जल्द साझा कर पाटा और अपने अन्य मित्रों को भी बता पाता. हमारा सौभाग्य है कि आप जैसी विदुषी हमलोगों के बीच हैं. आपका पूरा परिवार संस्कारित और शिक्षित है …हम सबको आपसे प्रेरणा लेने की जरूरत है. बहुित बहुत बधाई आपको साथ ही सरवजीत फिल्म जो मैं अब तक नहीं देख सका हूँ देखने का हर सम्भव प्रयास करूंगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

बेटे जवाहर लाल तुमने मां का नाम लेकर एक छिपी हुई स्मृति को उजागर कर दिया ! कमाल है माँ के ऊपर डाक्टर शोभा जी के अलावा किसी की टिप्पणी नहीं आई ! मेरी मां का परिवार हमारे परिवार से विशेषप्रस्थितियों में आगे था ! मेरी मां अपनी बचपन की कहानी सुनाया करती थी ! वे जब केवल पांच साल की थी मेरी नानी स्वर्गवासी हो गयी थी, ११ साल में माँ के पापा भी चले गए थे ! हमारे गाँव में खेती बहुत होती थी और पास पड़ोस के रिश्तेदार काम करने आजाया करते थे ! मां को इतने सारे लोगों के लिए खाना बनाना सुबह सुबह उठकर पिसाई करना, कुटाई करना, दूर चस्मे से पानी लाना, मवेशियों को सम्भालना ! उन दिनों पनचक्की हुआ करती थी दूर नदी में ! वहां भी नंबर आने में दो दिन लग जाते थे ! विडम्बना देखो केवल ३२ साल में मेरे पापा भी स्वर्गवासी होगये थे ! तीन चाचा थे एक विश्व युद्ध में शहीद होगये थे अंग्रेजों की तरफ से लड़ते हुए, दो भी शहर कस्बों में आजीविका की खोज में चले गए थे ! बूढ़े दादा जी थे जो खेती पाती करने में असमर्थ थे ! ये १९४५ की बातें हैं ! हम चार भाई एक ६ महीने की बहिन थी पापा के बिछुड़ने के कुछ ही दिनों के बाद मेरा चार साल का सबसे छोटा भाई जो हम सबमें अति सुन्दर था वह भी संसार छोड़ कर चला गया था ! मुझे मेरे छोटे मामा जी ले गए थे पढ़ाने के लिए ! वहीं मैंने 8वीं पास की थी, फिर बड़े मामा ने 10वींपास करवाई थी ! बड़े भाई जो केवल १४ साल के थे ने हल बैल सम्भाले, जब तक दादाजी रहे उन्हें खेती के गुर सिखाते रहे ! सं १९४७ में दादाजी भी संसार छोड़ कर चले गए ! ल;यकीन मेरी माँ ने अपना विवेक और धीरज नहीं खोया ! मैं सेना में भर्ती होगया बड़े भाई ने खेती संभाली ! माँ बड़े भाई के साथ ही रहती ! फिर माँ को मैं अपने ही साथ ले आया था, उन्हें दिल्ली, फैजाबाद भी घुमाया और १९९८ चार नवम्बर को उन्होंने मेरी पत्नी की बाहों में आख़री सांस ली और स्वर्ग में पापा से मिलाने चली गयी ! आज हमारे परिवार में बड़े भाई के चार लडके, २ लडकियां हैं, सब शादीशुदा हैं और खुश हैं, मेरे दो बेटे एक बेटी है आज अच्छी पोजिशन पर हैं ! छोटे भाई के भी दो बेटे एक बेटी अपने परिवार के साथ खुश हैं ! ये सब माँ के आशीर्वाद का फल है, माँ का जिंदगी के साथ का संघर्ष का ही फल है ! आज भी माँ के दुखों को याद करके आँखों में आसूं टपकने लगती हैं !

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री जवाहर जी आपने समवेदन शील विषय पर लिखा है ज्यादातर हम इन लोगों के बारे में भी जानते नहीं मैं नृत्यांगना सोनल मानसिंह के बारे में मैं नहीं जानती थी महिलाओं को सबसे पहले कमजोर समझा गया और उन्हें दबाकर रखने का हर संभव प्रयास हुआ, पर आज देखिये उन सफल महिलाओं को जो हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। अबकी रिजल्ट देख लीजिये लडकियों ने कमाल कर दिया है | मैं आपसे अपनी ख़ुशी शेयर करती हूँ सर्वजीत फिल्म की स्टोरी स्क्रीनप्ले डायलोग पूरी मेहनत के साथ अन्य काम मेरी भांजी मेरी बेटी ही है मेरे बच्चों सब साथ पली बढ़ी हैं मेने एक बार जेनरेशन गैप पर लिखा है यह भी उन्हीं शैतान बच्चों में शामिल है मेरी बच्ची इंजीनियर की , दुबई से मेनेजमेंट की स्कालर शिप से पढाई आगे हालीवुड में फिल्म मेकिंग की पढाई की रामलीला में वय संजय लीला भंसाली की सेकेंड दायाँ हाथ रही है उसकी बच्ची समय से पहले हुई इस लिए कुछ समय काम रोका और भी अनेक उपलब्धियां हैं कितनी लिखूं |उत्तम लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

बेटे जवाहरलाल, आयुष्मान ! आपने आसाम चुना के बारे में वस्तृत जानकर देकर नेताओं को एक खुला सन्देश दे दिया है की अगर तुम डाल डाल तो जनता पात पात ! सरकारें की एक परिवार की वपउति नहीं है ! अरे राज खानदान जिनकीकल तक तोती बोलती थी, पैतृक सम्पति अधिकार जमाने वाले भी मिट गए ! तो प्रजातंत्र में जनता को एक ही परिवार भुलावे में ज्यादा दिन तक नहीं रख सकता ! कोई अपने को कितना भी बलशाली, शक्तिशाली, मशकलमैन समझ ले, कभी न कभी जोडवाला पैदा होही जाता है ! कांग्रेस की १९७७ में कितनी किरकरी हुयी थी, ३५० सांसदों में से घटकर केवल ८६ रह रहे थे ! वो तो मुराजी देसाई को हटाकर स्वयंम प्रधान मंत्री का ख़्वाब देखने वाले चरणसिंह जी महाराज की कृपा हुई, चुनाव् ३ साल के अंदर हुए, इन्द्राजी के नेतृत्व में फिर १९८० में कांग्रेस सत्ता पर आगई ! इसके बाद कांग्रेस को लगने लगा की देश कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता ! गद्दी पर या कांग्रेस के शीर्ष पर गांघी परिवार का ही होना चाहिए,कांग्रेस का नेतृत्व करने वाला, चाहे वो पप्पू का दिमाग रखता हो, चाहे पैदायशी विदेश की ही क्यों न हो ! चाहे भष्टाचार के गद्दे में ही क्यों न पड़ा हो ! आसाम के चुनाव २०१६ पर एक सही और विस्तृत जानकारी के लिए थपकी देता हूँ और आशीर्वाद कहता हूँ ! चाचा के ब्लॉग पर आकर सकारात्मक टिप्पणी के लिए धन्यवाद करता हूँ !

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम जवाहर लालजी बहुत सही फ़रमाया आपने लेख में आज कर धरने की राजनीती हो गयी आपने केजरीवाल के डिग्री की बात पर कुछ सुनना चाहते थे.वोट बैंक की राजनीती ने देश को बर्बाद कर दिया कांग्रेस संसद पर बहस नहीं करती सडको पर धरना आगंवाडियो के बारे में हमें कुछ नहीं मालूम ममता तो चुनाव आयोग को देखने की भी बात करती मीडिया वाले राजनीती में ज्यादा दिलचस्पी रखते बापू आशारामजी के समर्थक इतना समर्थन जुटते कोइ मीडिया नहीं दिखता मीडिया ट्रायल भी बहुत खतरनाक है हमने अपनी समस्या के बारे में कई मीडिया वालो को लिखा कोइ सुनता नहीं कुछ मीडिया वाले मोदीजी के समर्थन वाले पत्र भी नहीं प्रकाशित करते अब उत्तराखंड पर और केजरीवाल पर आपके लेखो का इंतज़ार है.लेख के लिए धन्यवाद और साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! बहुत खूब ! क्या गजब का आपने सपना देखा है और लिखा है ! बहुत मनमोहक और कल्पनाशील पोस्ट है ! मैं तो उस समय इस मंच से जुड़ा ही नहीं था ! किन्तु उस समय के एक से बढ़कर एक अनगिनत विद्वानों की ढेरों प्रतिक्रिया पढ़कर यही लगता है कि साहित्यिक दृष्टि से वो इस मंच का स्वर्णिम युग था ! क्रिया-प्रतिक्रिया से दूर हो अब तो अधिकतर लोग सिर्फ लिखे जा रहे हैं ! यही वजह है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ एक प्रतिक्रिया पाने तक को तरस जा रही है ! उस समय यानि 2011 -12 में मंच पर ऐसी प्रतिभाशाली और सक्रीय विद्वत मंडली थी जो सबकी कलम को अच्छा से अच्छा लिखने को प्रोत्साहित रहती थी ! तब मंच पर काफी कम्पटीशन भी था, लेकिन यही कम्पटीशन ब्लॉगर को अच्छा से अच्छा लिखने को मजबूर भी कर देता था ! पुराने ब्लॉगरों कि रचनाओं तक किसी प्रतिक्रिया के जरिये ही फ़िलहाल पहुंचा जा सकता है ! उस समय के अधिकतर साहित्यकार मंच से आज गायब हैं, किन्तु उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक धरोहर मंच पर अब भी मौजूद है, जिसे न सिर्फ सम्भालकर रखने की जरुरत है, बल्कि उनतक सहजता से आज के ब्लॉगर पहुँच सकें, इसकी भी व्यवस्था करने की जरुरत है ! कुछ दिन पहले जागरण मंच को मैंने सुझाव दिया था कि पुराने ब्लॉगरों की रचनाओं तक आसानी से पहुँचने के लिए मंच न सिर्फ उनकी एक लिस्ट मुख्य पेज पर प्रकाशित करे, बल्कि सर्च करने की सुविधा भी प्रदान करे ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत सुन्दर, जवाहर बेटे, आगस्त वेस्ट लैंड पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा किया गया जघन्य अफराध वो भी सोनिया जी के मैके की अदालत द्वारा लगाए गए, इतनी विस्तृत जानकारी के लिए साधुवाद ! सोनिया गांधी कितना भी कहे की मैं नहीं डरती, किसने कहा की "सोनिया-राहुल डरो" ! जिस दिन से मोदीजी ने सत्ता संभाली चोर उसी दिन से बंगले झांकने लगे थे ! मोदी जी को तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं पडी, इस परिवार द्वारा 'नेशनल हैराल्ड' घोटाला, अपने आप खुला, आगस्त वेस्ट लैंड इटली की अदालत ने नामों के साथ उजागर किया, अब तो मोदी जी या भाजपा ने क्या करना है जो कुछ करेगी अब भारत की अदालत करेगी ! शेर के सामने खड़े होकर तुम क्या कर सकते हो जो कुछ करना है अब तो शेर को करना है ! बेटे को अच्छी जानकारी मुहैया कराने के लिए आशीर्वाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपकी पैनी लेखनी से निकले इस तथ्यपरक एवं निष्पक्ष लेख को पढ़ने के उपरांत इंडिया टुडे, आउटलुक आदि किसी भी पत्रिका में इस विषय से संबंधित सामग्री को पढ़ने की आवश्यकता नहीं लगती । जो कुछ भी कहा जा रहा है, फ़ैसले की प्रति को ठीक से पढ़े (और समझे) बिना ही कहा जा रहा है । स्पष्ट ही है कि सत्य तक पहुँचने का प्रयास करने के स्थान पर राजनीतिक एवं चुनावी लाभ हेतु गाल बजाए जा रहे हैं । जनता का ध्यान उसके हित से जुड़े विषयों से हटाने के लिए क्षणिक रोमांच देने वाले नवीन घटनाक्रमों की दिन-प्रतिदिन आवश्यकता भी तो होती है हमारे नेताओं को जो यही मानते हैं कि जनता को मनोरंजन ही चाहिए, अपनी दैनंदिन समस्याओं का समाधान नहीं ।

के द्वारा:

आदरणीया डॉ शोभा जी, सादर अभिवादन! गांवों की उपेक्षा शुरू से होती रही है तभी गांव के लोग शहरों की तरफ पलायन करते हैं जीतन मैंने हाल के बिहार को देखा है नीतीश कुमार ने भी गांवों के विकास के लिए बहुत काम किया है. अन्य राज्य भी इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे तो अवश्य ही देश विकसित होगा. हम सब उम्मीद करते हैं कि पंचायत प्रतिनिधि, खासकर महिला प्रतिनिधि, जिनपर प्रधान मंत्री ने जोर देकर कहा है कि अगर वे चाह लें तो इसे सम्भव किया जा सकता है. यह भी उम्मीद की जाने चाहिए कि पुरुष वर्ग उन्हें ईमानदारी से काम करने देंगे. अन्य सरकारी अफसर को भी पूरा पूरा सहयोग करना चाहिए जैसा कि आयोजन को सफल बनाने में सबका योगदान रहा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी बहुत ज्ञान वर्धक लेख सबसे बड़ी बात तब मानी जाएगी जब गावों में ही रोजगार बढ़ेंगे लोग बड़े शहरों की और पलायन नहीं करेंगे आपके लेख द्वारा बहुत कुछ जानने को मिला जैसे डॉ भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और पंचायतों के सहयोग से भारत उदय अभियान की शुरूआत की और इसका समापन 24 अप्रैल 2016 को जमशेदपुर में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश भर के लगभग 6000 पंचायती राज प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन के साथ होगा । इस सभा को प्रधान मंत्री व झारखंड के मुख्यमंत्री संबोधित करेंगे ।स्थानीय समस्यों और राजनीति पर आप सदैव बहुत अच्छा प्रकाश डालते हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा:

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय अगरवाल साहब, जय श्रीराम! ममता कभी किसी से नहीं डरी हैं. ज्योति बसु ने उन्हें पुलिस से बहुत पिटवाया था, फिर भी वह लाठी खाकर भी लड़ती रहीं और एक दिन माकपा (बामपंथियों) के गढ़ को उखड फेंका. चुनाव आयोग अपनी ड्यूटी निभाने में स्वतंत्र है कानून का डंडा चुनाव आयोग के पास है. उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी ममता ही सरकार बनाएंगी पर जीतने काम पाएंगी. भाजपा हर जगह फायदे में रहेगी. नीतीश कुमार आत्म मुग्ध हैं,पर अभी राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बननी बाकी है. वैसे बिहार में उन्होंने जो काम किया है वह धरातल पर दिखता है. जनता ने ऐसे ही तीसरी बार उन्हें नहीं चुना है. जमशेदपुर में रामनवमी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, पर हजारीबाग, बोकारो में थोड़ी बहुत अशांति हुई है. कुछ खुरापाती लोग ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं. आपका हार्दिक आभार और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं! जय श्री राम!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर लालजी ममता कहती उन्हें किसी का दर नहीं चुनाव आयोग छाए जितने नोटिस भेजे हम बार  बार यही करेंगे यानी आचार संहिता तोडेगे क्या यही लोकतंत्र है नितीश कहते आरएसएस के खिलाफ सब एकजुट हो लगता है उन्हें आतंकवादियो को लेने में भी नहीं परहेज इन विधान सभा के चुना में आसाम में ही बीजेपी सरकार बना सकती बाकी जगह अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद आज कल के नेता उलटे सीधे व्यान देते रहते देश की चिंता कम हर एक प्रधान मंत्री का सपना देख रहा आपने लेख में बहुत अच्छी बाते खुल कर रक्खी आपकी लेखनी की बारीखता से पढ़ कर मज़ा आ जाता आप ऐसे लिखते रहे  हम लोग  पढ़ते रहे राम नवमी की शुभकामनाओ के साथ भगवन रामजी राष्ट्र  को अपना  आशीर्वाद  प्रदान करे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय अग्रवाल साहब, मोदी जी की कार्य शैली और उनकी छवि से जनमानस लगभग संतुष्ट है, पर विरोधी तो विरोध करेंगे ही, मेर तात्पर्य है कि उनके छुटभैये नेता को अंत शांत बयानबाजी से बचने चाहिए. विदेशों में जो छवि भारत की बनी है वह मोदी जी के व्यक्तित्व और कार्यकुशलता, वक्तृत्व कला की देन है. आम जनता/ गरीब जनता को भी नजर आना चाहिए कि काम धरातल पर हो रहा है. जैसे लातूर में पानी पहुँचाना, मोदी जी और सुरेश प्रभु की उपलब्धि कही जाएगी. केरल के कोट्टम में मोदी जी का पहुंचकर मदद पहुँचाना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है, मेरी राय में. विपक्ष क्या बोलता है उसकी चिंता करते रहेंगे तो काम नहीं कर पाएंगे, और मोदी जी चिंता करते भी नहीं हैं. अभी फिलहाल उनको खतरा नहीं है. १९ मई के नतीजे अगर आशानुकूल रहे तो आगे का रास्ता भी साफ़ होगा. थोड़ी बहुत परेशानी हर सरकार को रहती है . उससे चतुराई से पेश आना ही तो राजनीति है. मैं आपकी ही प्रतिक्रया का इंतज़ार कर रहा था, पर जागरण जंक्शन की तकनीकी टीम के कारण आप बार बार असफल हो रहे थे. कहर ... जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलहि न कछु संदेहू. आपका बहुत बहुत आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर लाल जी इस सार्थक,विस्तृत और तथ्यों से पूर्ण लेख के लिए बढ़ाई सेक्युलर नेता ममता,केजरीवाल,नितीश मोदीजी के लिए जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हताशा दिखती.बीजेपी हिन्दुओ को साम्प्रदायिक कहना गलत यदि बीजेपी सेक्युलर नहीं तो कोइ भी नहीं मोदीजी बहुत अच्छा काम कर रहे लेकिन मीडिया का एक भाग कांग्रेस की चमचागिरी में लगा रहता बिहार में बीजेपी हारी क्या वहां वोट विकास या अन्य मुद्दों पर पड़े नहीं जाती के नाम पर एक अपराधी भ्रष्टाचारी लालू यदि चुनाव जीत जाता ये बिहार के और देश के लिए शुभ नहीं कल हमने १० बार प्रतिक्रिया डालने की कोशिश की नहीं गयी हार गए आज फिर कोशिश कर रहे आपकी लेखनी के तो हम मुफीद है बहुटी आभार और साधुवाद.योग और आंबेडकर जी को संयुक्त राष्ट संघ में शामिल करना देश का बहुत बड़ा सम्मान मोदीजी बधाई के पात्र

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आप सही कह रही हैं, जागरण जंक्शन साइट भी काफी देर के बाद खुलता है कभी कभी तो खुलता ही नहीं. तकनीकी विभाग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. आखिर इतना पॉपुलर साइट अगर तकनीकी रूप से समृद्ध न हो तो निराशा होती है. नवभारत टाइम्स इससे आजकल बेहतर लग रहा है. अपने विचार प्रकट करने का ये कुछ साइट हैं जहाँ हम एक दुसरे से रूबरू होते हैं. कुछ नयी जानकारियां भी मिलती हैं. काफी लोग विद्वान हैं, तार्किक हैं. आपकी तो कोई तुलना ही नहीं है. आप समय भी खूब देती हैं. काफी ब्लॉग को आप पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं. प्रतिक्रिया पाकर लेखक का हौसला बढ़ता है और आगे लिखने की इच्छा होती है. बस बहुत बातें लिख गया सादर आभार आपका हौसला अफजाई के लिए!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपके कई लेखों के माध्यम से पता चलता है कि आप जातिवाद और जातिगत भेदभाव के खिलाफ हैं. मेरे स्वर्गीय अग्रज भी रामाश्रम सत्संग संस्था से जुड़े थे, उनके साथ मैं भी कभी-कभी सत्संग में जाता था. वहां भी जाति गत भेदभाव नहीं था. सभी एक साथ बैठकर सत्संग भी करते थे और एक साथ बैठकर सामान्य भोजन करते थे. कुछ संस्थाएं हैं जो इन प्रयासों में लगी हैं पर अधिकांश धार्मिक संगठन या तो जातिगत भेदभाव से ग्रसित हैं या फिर राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनेताओं के संपर्क में रहते हैं. आप सही कह रहे हैं कि सब धार्मिक संस्थाएं और धर्मगुरु ऐसा ही करें तो दलितों का और हिन्दू समाज का कुछ भला हो ! पर प्रश्न बड़ा है कि यह भार लेनेवाला कौन हैं. सभी तो आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं. बीच बीच में विष वमन कर और घृणा का माहौल उत्पन्न करते रहते हैं.खैर कभी न कभी तो परिवर्त्तन होगा या फिर भयंकर क्रांति से सब कुछ ख़त्म न हो जाए. बुद्धिजीवियों , नेताओं और समाज सुधारकों को सतत प्रयास करने की जरूरत है. आपके उत्साहवर्धन का हार्दिक आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी, सादर अभिवादन! मोदी जी की बातें बहुआयामी होती हैं. वे बातों को मोड़ना, घुमाना अच्छी तरह से जानते हैं. आज आरक्षण के अंतर्गत इतना बड़ा वोट बैंक है कि सत्ता में रहनेवाली या विरोधी पार्टियां कभी भी आरक्षण जैसे हथियार को अपने हाथ से जाने नहीं देंगी. बीच बीच में जो आवाजें उठती हैं वह भी मेरी समझ से तुष्टिकरण जैसी ही लगती है. ताकि सवर्ण अपने आपको उपेक्षित न समझे. या भाजपा अब उनके साथ अन्याय कर रही है, ऐसा सन्देश न जाय! इसीलिये कभी-कभी आरक्षण पर पुनर्विचार की बात कह दी जाती है और उधर हरियाणा को तबाह करनेवाली जाट-समुदाय को आरक्षण के अंदर शामिल कर लिया जाता है. बहुत कठिन है आर्कषण को हटाना, और उससे भी कठिन है सही लोगों/यानी जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुँचाना. आपने विस्तृत और सारगर्भित प्रतिक्रिया दी है उसके लिए आपका ह्रदय से सम्मान करता हूँ.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

साप्ताहिक सम्मान के लिए हार्दिक बधाई जवाहर जी । आपका लेख तथ्यपरक होने के साथ-साथ पॉलीटिकली करेक्ट भी है क्योंकि आज का युग तो अंबेडकर के महिमामंडन का ही युग है । चुनाव के बाज़ार में बिकने वाला ब्रांड बन गए हैं वे । उनकी आलोचना करने के लिए तथा उनसे संबंधित नकारात्मक तथ्यों को उजागर करने के लिए बड़ा साहस चाहिए जो अंतिम बार अरुण शौरी जी ने दिखाया था, अब कोई दिखा सकने वाला नहीं । कोई दिखाएगा तो उनके उग्र भक्त उसे जीने नहीं देंगे । वे प्रासंगिक हैं लेकिन उनके नाम की रोटियां तोड़ने वाले उनके चेले-चपाटे अनवरत तथा असीमित आरक्षण एवं  तथाकथित सवर्ण जातियों की वर्तमान पीढ़ी के निर्दोष सदस्यों के प्रति प्रतिशोधात्मक दृष्टिकोण में ही उनकी प्रासंगिकता देखते हैं, अन्य किसी रूप में नहीं । निस्संदेह वे दलितों के मसीहा थे और हैं लेकिन आज जो हो रहा है, वह वे नहीं चाहते थे । आपने समाचार-पत्रों में पढ़ा होगा कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पूर्व ही खम ठोककर घोषणा की थी कि आज स्वयं अंबेडकर भी आ जाएं तो वे भी आरक्षण को समाप्त नहीं करवा सकते । क्या आप उनके इस वक्तव्य के मर्म को भाँप सकते हैं ? 

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! सादर हरि स्मरण ! साप्ताहिक सम्मान 'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' चुने जाने की हार्दिक बधाई ! समाज के दबे कुचले और अस्पृश्यों के प्रति अन्याय और शोषण की जो समस्या आपने उठाई है, ये तब तक रहेगी जबतक कि देश में जातिवाद हावी है ! इस समस्या का समाधान वस्तुतः धर्मगुरुओं खासकर शंकराचार्यों के पास है, किन्तु वो तो जातिवाद का फायदा और आनंद लेने में मग्न है ! वो कुछ नहीं करने वाले ! एक छोटे से प्रयास के रूप में अपने आश्रम में जातिवाद ख़त्म कर दिया है ! पिछले चौबीस सालों में जातिगत भेदभाव करने वाले कई लोंगो को निष्कासित किया गया ! सब धार्मिक संस्थाएं और धर्मगुरु ऐसा ही करें तो दलितों का और हिन्दू समाज का कुछ भला हो !

के द्वारा:

आदरणीय सादर प्रणाम .................. अगर आंकलन किया जाये तो सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि समाज का संभ्रात वर्ग आदिवासी समाज को सहजता से स्वीकार करता है लेकिन दलित जातियों को स्वीकारने में भयानक कतराता है। दलितों में भी हरिजन उसके लिए सबसे ज्यादा अस्वीकार्य? क्यों? क्यूंकि देश का अधिकांश उच्च वर्ग बात बात में गालियां भी देता है तो उसी तरह की जो इन जातियों के बारे में होती है और इनकी सामाजिक और सांस्कृतिक अनुपयोगिता पर होती है। जैसे सभ्यता के सभी सूत्र उसके पास है और वह जो चाहता है वही होता है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचार इसी घटिया समाजशास्त्र को चुनौती देते हैं। आज भी हमारे समाज में धार्मिक और जातिगत गैरबराबरी बदस्तूर जारी है  और इसी गैरबराबरी को हटाने के लिए बाबा साहेब अपनी अंतिम साँस तक अनवरत लड़ते रहे, उनका ये संदेश आज़ादी के दौरान जितना प्रासंगिक लगता था, आज उससे कहीं ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होता है l .......... 

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

आदरणीय सादर प्रणाम .................. अगर आंकलन किया जाये तो सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि समाज का संभ्रात वर्ग आदिवासी समाज को सहजता से स्वीकार करता है लेकिन दलित जातियों को स्वीकारने में भयानक कतराता है। दलितों में भी हरिजन उसके लिए सबसे ज्यादा अस्वीकार्य? क्यों? वह बात बात में गालियां भी देता है तो उसी तरह की जो इन जातियों के बारे में होती है और इनकी सामाजिक और सांस्कृतिक अनुपयोगिता पर होती है। जैसे सभ्यता के सभी सूत्र उसके पास है और वह जो चाहता है वही होता है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचार इसी घटिया समाजशास्त्र को चुनौती देते हैं। आज भी हमारे समाज में धार्मिक और जातिगत गैरबराबरी बदस्तूर जारी है  और इसी गैरबराबरी को हटाने के लिए बाबा साहेब अपनी अंतिम साँस तक अनवरत लड़ते रहे, उनका ये संदेश आज़ादी के दौरान जितना प्रासंगिक लगता था, आज उससे कहीं ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होता है l .......... 

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

आदरणीय राजेश दुबे जी, सदर अभिवादन! आप से पूरी तरह सहमत हूँ. आज जो सभी नेता या दल जो बाबा साहेब का नाम जप रहे हैं वे सत्ता प्राप्ति या सत्ता में बने रहने के लिए ही ऐसा कर रहे हैं. आपका यह भी कहना सही है कि राम विलास पासवान, उदित राज, मायावती जैसे नेता कायदे से ख़ास दलितों ने अपना और अपने परिवार के भले के बारे में ज्यादा सोचा है. वे अपने समाज, और पिछड़ी/दलित जातियों के बारे में, उनके उत्थान के बारे में बहुत ज्यादा नहीं कर पाए हैं. आज जरूरत उसी की है कि दबे कुचले लोगों को कैसे ऊपर लाया जाय. सर्वप्रथम तो उन्हें शिक्षित किया जाय और थोड़ी प्राथमिकता/सुविधा दी जाय ताकि वे एक आम आदमी का जीवन तो जी सकें. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी स्वर्गीय अम्बेडकर पर लिखा लेख पढ़ कर कितनी प्रशंसा करूं कम है | मुझे आकाश वाणी में वार्ता के लिए बुलाया जाता है एक बार अम्बेडकर जी पर आज का विचार लिखना था मैं दिल्ली की साहित्यिक लायब्रेरी में गयी उन पर लिखी सभी किताबें निकाल क्र पढने लगी जितना पढ़ती जाती उतना डूबती जाती परन्तु मैं इतनी अच्छी वार्ता इतना पढ़ क्र भी नहीं लिख सकी जितना आपने आधुनिक सन्दर्भ में लिखा है| कई बार हैरानी होती हैं बेहतरीन लेखक ब्लॉग में लिखते हैं लेकिन अखबार में लिखे लेख काम चलाऊ होते हैं केवल एक ही बात को घुमा देते हैं सम्पूर्ण लेख और समीक्षा |संविधान ही देखिये कम्प्लीट संविधान है| बहुत अच्छा लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी ! "भारत माता की जय" जैसे महत्वपूर्ण विषय पर यथार्थवादी और बहुत विचारणीय लेखन के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई ! आपने बहुत अच्छे और विचारणीय तर्क दिए हैं ! इस विषय पर मेरा भी एक तर्क है कि बाईबिल और कुरआन दोनों के अनुसार परमात्मा ने मिटटी से सृष्टि के पहले नर नारी यानी आदम और हौवा को बनाया और उनके नथुनों में प्राण फूंका ! इस तर्क से तो हमारे पूर्वज मिटटी से बने थे, इसलिए मिटटी माता पिता हुई ! आज भी शरीर पंचतत्वों से ही निर्मित मानी जाती है, जिसमे मिटटी भी शामिल है ! दूसरा तर्क ये कि जब आप तिरंगे को राष्ट्र का प्रतीक मान सम्मान दे सकते हैं तो मारत माता को भारत माता का प्रतीक मान उसे सम्मान देने में हर्ज ही क्या है ! दरअसल हमारे संविधान निर्माताओं से थोड़ी चूक हुई ! ये सब चीजें भी संविधान में शामिल कर देना चाहिए थे और समान नागरिक संहिता भी लागू कर देनी चाहिए थी ! दरअसल हमारे देश में हद से ज्यादा स्वार्थी, सत्ता के लालची और जरुरत से ज्यादा चालाक लोग बहुत हैं ! सब परेशानी और बवाल वही खड़े करते हैं ! आम आदमी तो बस गेहूं के संग घुन की तरह पीस भर रहा है !

के द्वारा:

आदरणीय सिंह साहब ! पितृ दिवस के अवसर पर सन २०१२मे आपने यह लेख अपने पिताजी की याद में लिखा था ! आज हमें भी पढ़ने का सुअवसर मिला ! बहुत भावपूर्ण और संवेदनशील आलेख और कविता ! मुझे अपने नाना जी की याद आ गई ! पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी और प्रतिदिन शाम को घर आये एक दो साधुओं की पूरे समर्पण भाव से सेवा करने वाले मेरे नाना जी बिलकुल ऐसे ही थे ! मैं खेलनेमे ज्यादा व्यस्त रहता था ! कभी कभार खाना दे के किसी ने खेत पर भेज दिया तो उन तक खेलते कूदते पहुँचने में चाहे कितनी भी देरी हुईं हो वो हमेशा हँसते रहते थे ! बहुत शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन उनका था .. न कोई लोभ लालच और न ही रूपये बटोरने के लिए कोई हाय हाय कीच कीच.. ! बहुत संतोषी जीवन था ! ब्लॉग दिल के करीब और बहुत अच्छा लगा ! आपसे आग्रह है कि इसे एक बार पुनः प्रकाशित कीजिये ! सादर आभार !

के द्वारा:

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

सिंह साहब, इतना संतुलित विश्लेषण कम देखने को मिलता है . इसे पढ़ कर मैं चकित हूँ कि किस प्रकार आपने तथ्यों के आधार पर सारी बातें रखी आप निश्चय ही एक अच्छे विचारक हैं सो आपको साधुवाद देता हूँ. दूर कि कौड़ी लगेगी पर यों कहिये कि एक ब्रेनवेव सी आई कि जिस तरह की मानसिकता का व्यक्ति अमरीकी राष्ट्रपति उम्मेदवार ( Republican party ) डोनाल्ड ट्रम्प है ठीक वैसी ही विचारधारा के कुछ लोग RSS और BJP में भी है और भारत का प्रबुद्ध बुद्धिजीवी वर्ग उसी तरह उनसे ख़ौफ़ज़दा है जिस प्रकार अमेरिका के बुद्धिजीवी डोनाल्ड ट्रम्प से हैं. ऐसे राजनीतिज्ञ (चाहे किसी भी देश के हों ) लोकतंत्र के लिए खतरेज़ॉन साबित होंगे. बेहतर है कि देश इन्हे इनकी सही जगह दिखाए याने इतिहास के कूड़ेदान में..

के द्वारा:

जय श्री राम जवाहर जी आप को तो लिखने की कला खूब आती ओस अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद.इतना बड़ा संस्कृति फेस्टिवल सफलतापूर्वक करना रवि शंकरजी जी की प्रबंधन और उनकी योगिता और प्रसिधी का परिचय देता जिसपर सब देश वाशियो को गर्व है लेकिन हिन्दू विरोधी जो JNU के कन्हैया को हीरो बना रहे इस भव्य प्रोग्राम को दिखने में शर्म महसूस कर रहे इंग्लिश मीडिया सेक्युलर पत्रकार बुद्दिजीवी इसलिए विरोध कर रहे क्योंकि एक हिन्दू संत ने किया मोदी विरोध के नाम पर देश की प्रतिष्ठा को भी भूल गए चीन,जापान,पाकिस्तान,रूस के लोगो के कार्यक्रम देखकर बहुत गर्व हो रहा था.जब गंगा जी के किनारे कुम्भ के मेले हो सकते तो जमुना के किनारे इस आयोजन पर विरोध क्यों ये सब कांग्रेस की चाल है विरोधी दल के लोगो की अनुपस्थिति ख़ास कर कांग्रेस की बहुत दुर्भाग्यपूर्ण शरद यादव ने राज्य सभा में इस फेस्टिवल को तमाशा बता इसे रोकने की मांग की.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आज यानी दूसरे दिन के कार्यक्रम की थोड़ी झलकी भर ही देखी. वह भी प्राइम टाइम के समाचार में. अच्छा लगा. मुझे तो झुंझलाहट भी हो रही थी की इतने अच्छे कार्यक्रम को मीडिया वालों ने लाइव प्रशारण में कोई रूचि नहीं दिखलाई. जबकि इससे सम्बंधित विवाद को सबों ने ज्यादा तूल दिया. इस तरह का आयोजन को सफलता पूर्वक कर पाना अपने आप में एक अलग ही विशेषता है. मेरे ख्याल से तो यमुना का इलाका सुरम्य बन गया. और लोग जो हैं की पर्यावरण पर्यावरण चिल्ला रहे हैं. खैर श्री श्री की विशेषता है की वे इस आयोजन को सफल बनाने में कामयाब रहे. भारत विविधताओं का देश है उन्हें एक सूत्र में पिरोने की जरूरत है न की भेदभाव पैंदा कर तोड़ने की कोशिश.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी अति उत्तम लेख राजनीति के दो उभरे कलाकारों की अची विवेचना केजरी वाल जी के 76 वादे थे वह तो जनता को रिझाने में सफल रहे | कन्हैया भी ऐसे ही नारे लगाता रहता लेकिन जे एनयू के बारे में लोग अधिक नहीं जानते थे यह बुद्धिजीवियों का गढ़ माना जाता था लेकिन नारों की आवाज इतनी बुलंद थी सारा देश चोंक गया देश के टुकड़े करने के नारे सब जान गये यहाँ किस तरह की विचार धारा पनप रही हैं सरकारी खर्चे पर मोटी तनखा लेने वाले विचारक कहे जाने वाले लोग कैसे गरीब छात्रों को स्वप्न दिखा कर इस्तेमाल कर इस्तेमाल कर रहे हैं यह भविष्य बताएगा क्या होगा कन्हैया बामपंथियों का मोहरा क्या कर दिखाएगा या गुमनामी में खो जाएगा चैनलों ने भी मौके का फायदा उठाया उन्हें टीआरपी चाहियें और भी कहे जाने वाले बुद्धिजीवियों ने भी जम कर वक्तव्य दिए विशाल सेना वाला देश यहाँ गांधी सरीखे पैदा हुए ऐसे ही प्लेट परदेश के टुकड़े कर नये उभरते नेताओं को परोस देंगे जो यह चाहते हैं क्या आप हम होने देंगे |

के द्वारा: Shobha Shobha

बेटे राजेश, आयुष्मान ! जाट आरक्षण आंदोलन किसी शैतान की सोची समझी चाल थी ! अरे आंदोलन तो होते हैं छुटपुट गरमा गर्मी भी हो जाती है, लेकिन इतना विध्वंसकारी, आगजनी, सरकारी व् प्राइवेट सम्पति का नुकशान और निर्दोषों की ह्त्या करने की इजाजत इन दुष्ट दुर्जनों को किसने दी ! आरक्षण जब मिलेगा, तब मिलेगा, पहले इन उग्रवादी, रेपिष्टों, हत्यारों, बिध्वंसकारी तत्वों को उनके दुष्कर्मों के लिए उनकी सम्पति कुर्की करके सरकारी और निजी सम्पति के नुकशान की भरपाई की जाय फिर कभी न भुलाएजाने वाली सजा देकर या जिंदगी भर अंधेरी कोठरी में या फांसी लगा दी जाय ! जघन्य अफराध के लिए सजा भी जघन्य ही होनी चाहिए ! जाट आंदोलन पर सविस्तार जानकारी के लिए साधुवाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री जवाहर जी जो कुछ हरियाणा के बारे में आपने लिखा पढ़ कर बहुत दुःख हुआ कहते हैं सेना के आने का रास्ता बाधित किया बहुत मुश्किल से सेना के तर्क गुजर सके हेलीकाफ्टर से अश्रुगैस के गोले मंगवाने पड़े यह उस समुदाय ने किया जिन पर देश को गर्व रहा है | उत्तम खिलाड़ी दिए सैनिक और अफसर दिए दिल्ली पुलिस में तो अलग से दिखाई देते हैं प्रशासनिक अधिकारी दिए दिल्ली वासियों का पानी रोक दिया |किस कष्ट से समय गुजरा था | सवाल यह है की इतनी बड़ी हिंशा क्या किसी राजनीतिक समर्थन के सम्भव थी. पुलिस यहाँ तक की सेना भी बुलाई गयी पर आंदोलनामकारी अपनी मनमानी करते रहे. क्या सचमुच ये लोग इतने कमजोर हैं कि उन्हें आरक्षण चाहिए, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुन चुन कर पंजाबियों और सैनियों को निशाना बनाया गया, लूटा गया, आग लगा दी गयी, गोलियों से भून दिया गया आज हर दिल में उठ रहा है

के द्वारा: Shobha Shobha

जवाहरलाल भतीजे, लेख पढ़ा और दिल्ली का सच उभर कर बाहर आया ! अगर सचमुच यह वरसात का मौसम होता या सर्दियों में ही वरसात हुई होती तो राम जाने क्या होता ! इसमें सबसे बड़े गुनाहगार वे लोग है जिन्होंने जाते जाते नगर निगम को तीन भागों में बाँट दिया, फिर दिल्ली सरकार की लापरवाही ! केजरीवाल जी ने अभी तक क्या किया, उप राजयपाल, केंद्र सरकार से, तथा पुलिस कमीशनर से पंगा लेता रहा, अपनी खामियों का ठीकरा केंद्र के सर प् फोड़ता रहा ! उधार केंद्र में कांग्रेस राज्य सभा में बहुमत में रहने से हर बिल पर रोड़ा अटकाने का काम कर रही है, हेराल्ड जैसे गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए नित नए हथकंडे आजमा रही है ! विस्तृत और वास्तविक तत्थों के आधार पर दिल्ली के दिल की असलियत को उजागर करने के लिए धन्यवाद और आशीर्वाद देता हूँ !

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री जवाहर जी आपका यह कारगर लेख न जाने कैसे पढ़ने से चूक गई आपने पूरी तरह मालदा का सच समझाया है पहले यह खेती अफगानिस्तान मैं होती थी अब तो हैरानी होती है खुले आम अफीम की खेती होती है आज की नस्लें बर्बाद हो जाएँगी ऐसे तो विदेशों में भी भेजा जाता है पिछले दिनों एक पब्लिक स्कुल के बच्चों के माता पिता को बुलाया उन्हें समझाया आप अपने बच्चों के बाल पैन का ध्यान रखे इसमें भर के अफीम बच्चों को बेचीं जा रही है बच्चे सूंघ कर नशा करते हैं वह भी सातवीं आठवीं के बच्चे आज आप का लेख पढ़ा सारा चक्र समझ में आया अधिक कमाने का चस्का | मुस्लिम देशों मैं नशे के व्यपारियों को जान से मार देते हैं सीधे फांसी लगाते हैं हमारा कानून हल्का है |माँ बाप अपने बच्चों को कैसे बचाएं

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपका आशीर्वाद मिला जैसे सब कुछ मिल गया. अब समय सरकारों के साथ समाज को भी चेतने का ...आखिर हम कहाँ जा रहे हैं. अपने देश में रोज कुछ न कुछ ऐसा घटित हो रहा है जैसे हमारी मानवबुद्धि मंद होती जा रही है हम जंवरसे भी गए गुजरे हो गए हैं. आप सही समझ रहे हैं मैं बंगलोर की घटना के बारे में मैं कहा रहा हूँ. क्या हो गया है हमारे शिक्षित समाज को बंगलोर बहुत ही सुशिक्षित और सुनियोजित शहर है फिर वहां इस तरह की घटना एक विदेशी मूल की महिला के साथ जिसका कोई दोष नहीं ...सिर्फ रंग भेद के आधार पर.? हम कितने भेद करेंगे?...बहुत ही चिंतन मनन और सत्संग की आवश्यकता है. श्री श्री रविशकर से भी हम कुछ नहीं सीख पाये... बहुत कष्ट होता है....जब भी किसी महिला पर अत्यचार होता है.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय पारीख साहब, मैंने यह जानकारी मीडिया के विभिन्न कतरनों को जोड़कर इकठ्ठा किया है जिनका जिक्र भी मैंने किया ही है. हाँ यह बात अलग है कि सभी मीडिया घराने ने देर से सूचनाएं इकट्ठी की. सोंढूर इलाके में मीडिया की पहुँच भी नहीं हो पाती. वैसे इलाके में जहाँ पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है मीडिया का जाना भी भी काम खतरे की बात नहीं है. स्थिति शांत होने के बाद ही अधिकांश बड़े मीडिया घराने वाहन तक पहुँच सच से रूबरू कराया है. ... रही बात इन माफियाओं को सजाये मौत का तो आप भी जानते हैं कि हमारे यहाँ कानून की पहुँच कहाँ तक है और साक्ष्य जुटाने में कितना समय लगता है. ...काम से काम इस पर अंकुश लग जाए और इसे फैलाने फूलने न दिया जाय वही काफी है. मेरी राय में भटके को रास्ते पर लेन का हर सम्भव प्रयास होना चाहिए. अगर समुचित रोजगार के साधन सबको सुलभ होगा तो लोगों को भटकने के कम चांस होंगे. आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर लाल जी बहुत अच्छा और विस्तृत लेख के लिए धन्यवाद्,मालदा पर ममता मुस्लिम वोटो की वजह से चुप है क्योंकि उसको कुर्सी की देश से ज्यादा चिंता है २.५ लाख लोग कैसे इकट्ठा हो गए और किसकी इज़ाज़त से कोइ अपराधी नहीं पकड़ा गए हिन्दुओ के मकान जला दिए गए ममता ४ दिन चुप और दंगइयो को बचने की पुरी कोशिश बंगाल के बहुत हिस्से खास कर मालदा और बगल के हिस्से अपराधियो ड्रग्स नकली नोटों अफीम की खेती आदि के अड्डे वहां पुलिस की नहीं ममता के दल वालो की चलती मीडिया ने भी ज्यादा नहीं किया और निंदा नहीं की एक महीने बाद विरोध और वो भी पठानकोट में आतंकवादी हमले के दिन क्या गलत सन्देश नहीं देता ४ दिन आराजकता होती रही उसके बाद पूर्णिमा में फिर फतेहपुर में लेकिन केजरीवाल,नितीश,लालू,मुलायम कांग्रेस सेक्युलर ब्रिगेड बुद्दिजीवी चुप देश का दुर्भाग्य राष्ट्र भक्तो को इसके विरुद्ध आवाज़ उठानी चाइये लेख के लिए साधुवाद और आपकी स्टाइल के लिए भी.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम जवाहर लाल जी लेख के लिए धन्यवाद् हर एक को हर काम की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती ये आराजकता है जी ल्कोगो ने प्रधान मंत्री के खिलाफ नारे लगे उन्हें सजा मिलेगी चुनाव आते राजनीती शुरू हो जाती दलित मुसलमानों के नाम पर सब राजनीती होती पुणे में एक हिन्दू को मुसलमानों ने मार दिया सब चुप कुछ लोग स्वार्थ वश देश में गृह युद्ध करवाना चाहते जिसकी इज़ाज़त नहीं कही दलित बच्चो ने आत्महत्या की कोइ विरोध नहीं किसान मरते हिन्दू मारे जाते मुसलमानों के हाथ कोइ मीडिया या सेक्युलर नहीं बोलते दोहरा मापदंड नहीं आतंकवादियो के समर्थन वाले देश द्रोही है.दिव्यंगो को सुविधा के लिए सरकार ने कई कदम उठाये है

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय बिष्ट साहब, सादर अभिवादन! यहाँ देश का मामला है और इस मामले को सभी भेदभाव भूलकर देश के साथ होना है. सोसल मीडिया आजकल बड़ा अनसोसल हो गया है. ऐसे ऐसे भद्दे कमेंट आ रहे हैं और बेवजह एक दुसरे को गाली दे रहे हैं ... शालीनता के साथ तर्क हो तो ठीक है वरना, अपना दमन बचा कर रखना भी बड़ा मुश्किल है. आपने पढ़ा/सुना होगा NDTV के पत्रकार रवीश कुमार को भी लोग कैसी कैसी गलियां लिख रहे हैं... कमसे काम रवीश कुमार ऐसा पत्रकार है जो सच बोलता है या कहें की जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करता है. सभी राजनीतिज्ञों को वह अच्छी तरह खबर भी लेता है. , पर बोलने की स्वतंत्रता का मतलब यह तो नहीं किसी को आप भद्दी गाली देंगे! आप सब समझते हैं आप की प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार !

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जवाहरलाल बेटे, आयुष्मान ! मैंने पठानकोट एयर बेस के ऊपर आतंकी हमले के बारे में बहुत कुछ पढ़ा और सूना भी ! मेरा संपर्क अपने चेले चांटियों से भी है और उनसे भी काफी कुछ खबर मिल जाती है ! वायु सेना के देश में जितने भी एयर बेस हैं उनकी सुरक्षा एयर फोर्स की सुरक्षा गार्ड करती है ! फिर प्रदेश की पुलिस फ़ोर्स, प्रदेश की ही स्पेशल आर्म्ड फ़ोर्स ! एयर बेस के बाहर चारों ओर प्रदेश की स्पेशल गार्ड का पहरा रहता है ताकि अंदर कोई मक्खी मच्छर भी न घुसने पाए ! फिर रॉ जैसी देश की इटेलीजेन्स एजेंसी पड़ोसी दुश्म देशों पर बराबर नजर गड़ाए रहती है ! तब भी अगर छ: छः आतंकवादी विध्वंसक साज सामान के साथ एयर बेस में घूस जाते हैं तो आम आदमी की सुरक्षा ?????? इंटेलिजेंस एजेंसियों ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी हमला होने की सम्भावना बता कर अलर्ट भी करे दिया था , फिर भी काण्ड हो गया ! पुलिस फ़ोर्स में एसपी एक बड़ी जिम्मेदारी पोस्ट है, वह बिना गार्ड के सिविज में बाहर ख़ास मकसद से जा रहा था, आतंकियों ने पकड़ लिया और छोड़ भी दिया ! इनकी आवाजाही भी शक के दायरे में है, उन्हें कटघरे में खड़ा करके ही असलियत बाहर आएगी साथ ही सुरक्षा कवच पर कितने छेद हैं उनका पर्दाफास तभी हो पाएगा ! एयर फ़ोर्स का जवान, बीएसएफ का जवान भी पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए पकडे जा चुके हैं, इनसे भी सच्चाई उगलाई जाएगी ! आपको याद होगा आतंकियों ने जब संसद पर अटैक किया था उस समय देश की अस्मत ऊपर वाले ने बचाई थी ठीक अबके भी बहुत बड़ी दुर्घटना होते होते सात वीर जवानों की बलिदान तक ही सिमित गयी ! विस्तृत और साफगोई लेख के लिए साधुवाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम जवाहर लालजी एअक और भावपूर्ण और तथ्यों के आधार पर सिचने के लिए मजबूर लेख.देश में सेकुलरिज्म और वोट बैंक की राजनीत के कारन हम दुस्मानो को पाल रहे उत्तर प्रदेश् पच्छिमबंगाल,असम, केरल  और कर्णाटक वे राज्य है जम्मू कश्मीर के अलावा जहाँ वोट के लिए देश विरोधियो को संरक्षण मिल रहा जो हॉल में मालदा पूर्णिमा में हुए खतरनाक प्रदर्शन के बाद मीडिया और राजनेताओ के व्यान और व्यवहार से पता चल गया.पठानकोट में गलती हुयी लेकिन सैनको ने बहुत हिम्मत दिखाई मोदीजी देखने गए लेकिन हमें विश्वास है की पाकिस्तान को अब कठोरता से निबटा जाएगा ऐसा  हमें विश्वास है ममता,लालू,नितीश और कांग्रेस देश के दुस्मानो की तरह बात करते मीडिया का रोले बहुत ख़राब दादरी पर २१ दिन तक बोलने वेक अब चुप .खैर पाकिस्तान समझ गया की अब देश में सत्ता ऐसे आदमी के हाथ में है जिस्सको बरगलाया नहीं जा सकता.जवाहर लाल जी आपके लेख पढने में मज़ा आ जाता .उम्मीद है  हालत सुधरेंगे

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया यमुना जी, सादर अभिवादन! एवं नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! मोदी जी पर पूरा भरोसा है देश को और उन्हें भी बहुत कुछ करने की इच्छा है ...बस परिणाम सामने नजर नहीं आ रहा. अब फिर से अपने सचिवों को निर्देश दे रहे हैं शायद नए साल में कुछ धरातल पर नजर आये. अभी उनके पास समय है. नौजवानों को रोजगार, और किसानों की पैदावार पर सख्त ध्यान देने की जरूरत है अन्यथा असंतोष पनपेगा ही और राज्य सभा में उनको मुंह की खानी पड़ेगी ...वैसे उम्मीद पर दुनिया कायम है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार ५८ लाख लोगों ने गैस की सब्सिडी छोड़ दी है अब अधिक आमदनी वालों की बारी है उसके बाद? पेट्रोलियम प्रोडक्ट के दाम ऐसे ही अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में काम होते जा रहे हैं. डायरेक्ट कॅश सब्सिडी से भी लाभ सरकार को ही हुआ है. राजस्व की बृद्धि हुई है फिर निवेश क्यों नहीं हो रहा है. आप भी सब समझती हैं ... मैं तो न्यूज की बात ही बतलाता हूँ. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

हमें ये उम्मीद करनी चाहिए कि भारत का औद्योगिक विकास बुलेट ट्रेन की स्पीड से होगा. नौजवानों को रोजगार मिलेगा. देश के किसान भी आधुनिक तरीके से खेती करेंगे. और आत्महत्या के बारे में तो कोई सोचेगा भी नहीं. उनके उत्तराधिकारी बच्चे भी चमकती दुनिया के सपने नहीं देखेंगे बल्कि खेती को पुस्तैनी कारोबार के रूप में आगे बढ़ाएंगे. दलहन तेलहन प्याज और खाद्यान्नों की कमी होगी ही नहीं. बुन्देलखंड के लोग घास और जंगली पौधों में पौष्टिकता ढूंढ ही लेंगे. आदिवासियों, बनवासियों, बेरोजगारों को कोई भड़काकर नक्सली या आतंकवादी नहीं बनाएगा. सभी मिलकर देश का विकास करेंगे यानी ‘सबका साथ सबका विकास’ यही तो मूल मन्त्र है ! बस इस मन्त्र का जाप करते रहें, और मन में राम माधव की तरह पाकिस्तान, भारत, बंगला देश एक होने का सपना देखते रहें! जेटली, कीर्ति, शत्रु आदि घर की बात है इसे मिल बैठकर सुलझा/समझा लेंगे. जयहिंद! बहुत दिन बाद पढ़ा . धीरे धीरे समझने भी लगूंगा . बधाई

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! ठंढ का प्रकोप तो जमशेदपुर में भी है. यहाँ भी पारा ६ डिग्री तक नीचे गया है. सामान्यत: यहाँ ७-८ डिग्री तक ही जाता है. इस साल ज्यादा गिरा है. फिर भी यहाँ तो सारे काम वैसे ही चलते हैं, जैसा कि मैंने जमशेदपुर के बारे में लिखा था. अब मैं क्या कहूँ. आप अपने स्वास्थ्य का ख्याल रक्खें और सुविधानुसार ही नेट पर समय दें! ....राजनीति यहाँ की कुछ अजीब है. एक आदमी कुछ करना चाहता है तो दूसरा उसे नीचे खींचने को तैयार रहता है. भाजपा में त्रिमूर्ति काम कर रहे थे. उनमे एक अमित शाह बिहार चुनाव में मात खा गए तो नेपथ्य में जा बैठे. अब दुसरे अरुण जेटली पर प्रहार होने लगा है और इस मौके का फायदा तमाम विरोधी उठा रहे हैं. केजरीवाल तो केजरीवाल कीर्ति आजाद भी अब आजाद होना चाह रहे हैं और उनको शह अपनी ही पार्टी के नेता अवश्य दे रहे हैं. देखें आगे क्या होता है. मोदी के प्रयास पर पानी फेरने के लिए बहुत सारे लोग इकट्ठे हो रहे हैं. मोदी जी भी सबको साथ न लेकर अकेले ही सारा श्रेय लेना चाहते हैं, यही बात सबको अखर रही है. केजरीवाल अपनी अति महत्वाकांक्षा का परिचय दे रहे हैं. इन सबके बीच पिस रही है आम जनता. अब गैस की सब्सिडी की सीमा भी तय हो गयी. मध्यम वर्ग थोड़ा नाराज तो होगा ही. इन सबका लाभ अगर गरीबों तक पहुंचे तो ठीक है लेकिन बुंदेलखंड की हालत जो समाचारों में दिखाए जा रहे हैं, नहीं लगता कि वहां के बारे में नेताओं को अहसास भी है या नहीं? सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर भी आप तो कमल का लिख्तेव है क्या लेख लिखा पढ़ कर मजा आ गया युद्ध किसी समस्या का हल नहीं वाजपेयी जी ने कहा था की पड़ोसी बदल नहीं सकते इसलिए दोनों के लिए शांतिपूर्वक रहकर देशवाशियो के लिए कार्य करे शायद लगता को आर्मी भी राजी है नहीं शरीफ जी के लिए मोदीजी को बुलाना सम्भव नहीं था मोदीजी ने कदम बढया अब यदि पकिस्तान की तरफ से कोइ गलती हुई तो विश्व समुदाय के क्रोध का सामना करना पड़ेगा ऍजद(यू) और कांग्रेस के नेताओ ने सारी राजनातिक मर्यादाओ को टाक पर रख दिया जो उनकी हताशा को दर्शाता उम्मीद करनी चाइये की इस पहल का सकरात्मक नतीजा २०१६ में देखने को मिलेगा.आपके लेख की तारीफ के लिए शब्द कम है वैसे इस फोरम में बुद्धिजीवी प्रतिक्रिया देने में कंजूसी क्यों दिखाते है?

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम जवाहरजी आपके विचार पढ़े केजरीवाल सबसे बड़ा संकी है भ्रष्टाचार से शुरू कार्यक्रम नोदी विरोध में आ गया आज देश का अजेंडा बदल गया विकास,सुशाशन,कानून व्यवस्था सब भूल कर मोदी विरोध पर उतर आये इसीलिये संसद नहीं चलने देते.केजरीवाल के दफ्तर में नहीं उसके प्रमुक सचिव के यहाँ सिकायत पर पड़ा था जेटली का मामला अदालत में है सच सामने आ जायेगा ममता,नितीश,केजरीवाल कांग्रेस सब जेहाडियो का समर्थन और मोदी के विरोध पर चल रहे केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो चूका है छोटी सी पार्टी नहीं समाल सक्यता बीजेपी में कुछ लोग कुर्सी के भूके है सत्रुघन सिन्हा,अरुण शोरी अद्वानीजी जोशीजी सिन्हा और शांता कुमार इतने बड़े दल में विरोध जरूरी हो जाता बहुत लोगो को मोदीजी की लोकप्रियता पच नहीं रही लेख के लिए आभार

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय पी के दुबे जी, 'नेता' शब्द ही आज बदनाम हो गया है ...अब कुछ और नए नए शब्द ईजाद हुए हैं जो सोसल मीडिया पर बहुत ही प्रचलित हैं जैसे - भक्तगण, आपिये, सेक्युलर, असहिष्णुता, आदि आदि ...खान्ग्रेसी तो पहले से ही था. 'कांग्रेस मुक्त' का नारा अब दूसरे जगह भी इस्तेमाल होने लगा है. प्रदूषित और विषाक्त तो सारा वातावरण ही हो गया है. वैसे इस घड़ी में हम सबको यानी लेखक, ब्लॉगर, मित्रों को आपसी मतभेद को मनभेद में नहीं बदलने देना है. बहुत सारे लोग हैं, सबके अपने अपने विचार हैं. शालीनता शोभा देती है. केजरीवाल सनकी या मनोरोगी तो खुद हैं. उनको अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए, पर वह भी बड़ा शातिर है. मोदी जी को कोसता ही रहता है और केंद्र सरकार उसके काम में अड़ंगा लगाती रहती है तो वह आग बबूला हो जाता है. अपने पार्टी के लोगों के लिए भी वह कटु शब्दों का प्रयोग कर चुका है. अब तो हर गतिविधि पर सूक्ष्म नियंत्रण रखने की जरूरत है सभी को... सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

अभी कुछ दिन पहले ही कविता लिखी थी एक पहल मेरी भी - शायद पढ़ी हो फिर से लिकं दे रहा हूँ - अगर समय मिले तो पढ़ लें ... बड़ा अजीब लगता है सपने दिखाना और देखना बड़ा आसान लगता है पर उसे पूरा करने में की हाल होता है आअज प्रधान मंत्री श्री मोदी भी बखूबी समझते होंगे. सबका साथ सबका विकास और बहुत सारे अच्छे दिन के सपने ...कहाँ गए अब जेटली जी, कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा .... आदि मिलकर क्या गुल खिलाएंगे समझाना ज्यादा मुश्किल नहीं है इतनी जल्दी पूर्ण बहुमत की सरकार डांवाडोल हो जाएगी, ये अंदाजा शायद ही किसी को था. उधर मीडिया में खबरे चल रही है की मास्को PM मोदी राष्ट्रगान के समय डांवांडोल हो गए . बहुत नाम कम लिए माननीय मोदी श्री अब मुश्किलों के दिन आन पड़े हैं.मेरी कविता के लिंक यहाँ है - http://jlsingh.jagranjunction.com/2015/12/16/%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E2%80%98%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E2%80%99-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%80/ सादर आदरणीय अतुल जी!

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के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्री राम. मोदी जी तो सोनिया जी और और मनमोहन सिंह से चाय पर चर्चा कर ही चुके हैं और कितना नतमस्तक होंगे. इधर उनकी वाणी में भी विनम्रताऔर मधुरता आई है फिर कांग्रेस कोप भी अपने रुख में परिवर्तन लाना चाहिए. क्योंकि आगे का नफा नुक्सान जितना वह समझती है जनता भी खूब समझती है. आदरणीय अग्रवाल साहब, मै नीतीश कुमार का समर्थक हूँ, लालू और उनके बेटों का नहीं. लालू को थोड़ा धीरज रखना चाहिए था. अब निर्भर करता है उनके बेटों पर किवे नीतीश जी को अग्रज मानकर उनके साथ चलते हैं या उनके राह में रोड़ा अँटकाते हैं. नीतीश का अपना अलग व्यक्तित्व है जिसका आदर सभी करते हैं. ... प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री जेटली जी भी...., आपकी उत्तम प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh