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आरती, बिजली माता की!

Posted On: 30 Sep, 2011 Others में

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महीनों तक बिजली गुल रहने का बाद आज गजोधर भैया की बस्ती, और उनके घर में बिजली माता का आगमन हुआ है!
दरअसल, उनकी बस्ती का ट्रांसफोर्मर जल गया था जिसे बदली करने के लिए विद्युत् विभाग ने काफी नखरे किये, पहले बकाया बिल जमा करवाए, फिर नए ट्रांसफोर्मर की अनुपलब्धता का रोना रोया; आखिर इलाके के जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर प्रदर्शन किये, फिर कुछ नकदी देकर पूजा-पाठ की; बस्ती के अन्य लोगों के साथ मिलकर, (विभाग के अधिकारियों के सहयोग से) ट्रक का भाड़ा देकर ट्रांसफोर्मर को लाया गया और पुराने ट्रांसफोर्मर को हटाकर नए ट्रांसफोर्मर की स्थापना में वक्त के साथ साथ आर्थिक और शारीरिक मदद के बाद ही —– नवरात्री शुरू होने के एक दिन पहले, बिजली माता के दर्शन संभव हो सका.
गजोधर भैया ने दुर्गा माँ की आराधना से पहले बिजली माता की आरती कुछ इस प्रकार की जो नीचे अंकित है.

या देवी, सर्वभुतेशु क्षमा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:

ॐ जय बिजली माता, मइया जय बिजली माता,
जब आवे तम भागे, सब सुख के दाता! ॐ जय बिजली माता!

बहुत देर से आवै, जात न देर लगे.
तुरत पसीना भागे, कूलर, ए. सी. चलै, ॐ जय बिजली माता!

सिल-लोढ़ा नहीं भावे, मिक्सी खूब चलै.
हीटर, ओवन, फ्रिज से, किचेन की भाव बढे. ॐ जय बिजली माता!

झाड़ू, पोंछा फेंको, क्लीनर घर लाओ.
दुष्ट धूल को मारो, वैकुम घर लाओ. ॐ जय बिजली माता!

मोमबत्ती, ढिबरी को, बाई,बाई करो.
आपातकाल-स्वचालित, लैम्प को चार्ज करो.ॐ जय बिजली माता!

मोबाइल, इन्टरनेट, टी.वी. की गाथा.
बिजली से सब चालित, मत जाना माता.ॐ जय बिजली माता!

बिजली मैया सबकी, ट्राम ट्रेन बेटी.
पैदल मत अब चलना, देर नहीं होती.ॐ जय बिजली माता!

दो रूपों में मिलती, ए. सी. और डी. सी.
दोने रूप की पूजा, कर तुम हे पी.सी. !ॐ जय बिजली माता!

बिजली संकटमोचक, भक्ति, इसकी करो,
और न देवी,देवा, सेवा इसकी करो. ॐ जय बिजली माता!

बिजली-घर की सेवा जो जन नित ही करे,
कहत गजोधर भैया, परहित भक्ति,करै.ॐ जय बिजली माता!

करो सम्हलकर पूजा, यह संकट हारी,
बिजली से बच रहना,यह आफत कारी.ॐ जय बिजली माता!

बिजली की यह आरती, जो जन नित गावै.
दूर अँधेरा भागे, सुख सम्पति पावै.ॐ जय बिजली माता!

दुर्गा माता क्षमा करें!

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
October 1, 2011

जवाहर जी यहाँ परदेस में तो लाईट जाती ही नहीं, पर क्या मज़ा आता था अपने घर में, जब दिन में ८-१० घंटा लाईट का पता ही नहीं रहता था, वो गर्मी, वो मच्छर, वो ………….. और भी बहतु फायदे थे …. सुन्दर आरती …… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    jlsingh के द्वारा
    October 1, 2011

    अबोध जी, नमस्कार! वो भी दिन क्या थे!— याद आती है!—- पर आज भी बिहार-झारखण्ड के कस्बों और ग्रामीण इलाके का यही हाल है जब मोबाइल चार्ज करने के लिए भी किसी जेनेरेटर युक्त दूकान में जाना पड़ता है! कस्बों और शहर की बात तो छोड़िये, राजधानी पटना में कल रात से बिजली गुल है कि लोगों को पीने के पानी की भी घोर किल्लत हो गयी है! वो कहते है न –हम नहीं सुधरेंगे! साभार -जवाहर.

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 1, 2011

आदरणीय जवाहर लाल जी ……सादर अभिवादन ! दुर्गा माता क्षमा करे आपकी यह रचना संभाल कर रखी जाने लायक है …. इसकी जितनी भी तारीफ की जाए वोह कम ही खी जायेगी ….. आपकी कला के इस रूप में दर्शन करके हम सभी दंग है और प्रसन्न भी है ….. जय हो माता बिजली रानी जी की ….. जय हो माता रानी जगत जननी जी की :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/30/“आदरणीय-निशा-मित्तल-–-दा-ल/

    jlsingh के द्वारा
    October 1, 2011

    गुरुदेव, प्रणाम! अगर आप कहते हैं तो मैं इसे सम्हाल कर रख लेता हूँ. क्योंकि बिना इनकी (बिजली माता की) कृपा के हमलोगों के बीच का यह संवाद का सिलसिला भी तो जारी नहीं रह सकेगा. और यह हम चाहते नहीं. इसलिए इनकी वंदना और आरती दोनों ही जरूरी है. जो बालक कुछ अनुचित करहीं, ‘गुरु’ पितु मातु मोद मन भरहीं! सादर– जवाहर.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 30, 2011

प्रिय जे यल सिंह जी आज कल एक नयी कला …सुन्दर ..दुर्गा जी को भी आज कल झांकी के लिए इनकी बड़ी जरुरत है …. भ्रमर ५ बिजली की यह आरती, जो जन नित गावै. दूर अँधेरा भागे, सुख सम्पति पावै.ॐ जय बिजली माता! दुर्गा माता क्षमा करें!

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    भ्रमर जी, नमस्कार! दुर्गा माँ की असीम कृपा है कि गजोधर भाई की बस्ती में नवरात्री से पहले बिजली आ गयी! पंडालों की शोभा और दुर्गा माँ की भब्यता तो बिजली के प्रकाश में ही मनोरम लगती है! प्रतिक्रिया के लिए आभार!- जवाहर.

atharvavedamanoj के द्वारा
September 30, 2011

ॐ जय बिजली माता..मैया जय बिजली माता| तेरी शरण में आने वाला तर जाता| दूध मलाई क्या है मेवा मिल जाता|| ॐ जय बिजली माता..मैया जय बिजली माता| तुम हो एक अगोचर , कभी कभी दिख जाती| जब दिखती तब कोई ब्लॉग बना जाती| ॐ जय बिजली माता| एलेक्ट्रोन की स्वामिनी, फोटानी माया| सकल भुवन में दिखती है तेरी छाया| ॐ जय बिजली माता| तेरी कृपा से गज का नाम गजोधारी| एक व्यंग्य ने सारी चूल हिला डाली| ॐ जय बिजली माता| मैं हूँ मुर्ख गवांरू,मुझ पर कृपा करो| कभी हमारे घर भी इन्वर्टर कर दो | ॐ जय बिजली माता| आदरणीय जवाहर जी… गजोधर भैया ने कुछ चुगली कर दी…उनकी कुछेक लाइनें इधर भी खिसक आई हैं|धृष्टता के लिए छोटे भाई को माफ कीजियेगा|जय भारत, जय भारती|

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    मनोज जी, आप तो आशु कवि हैं, भला आपके सामने गजोधर भैया की विसात! गजोधर भाई तो फूले नहीं समां रहे हैं, एक महान और देशभक्त कवि उनके सुर में सुर मिला रहा है. मिले सुर मेरा तुम्हारा– तो सुर बने हमारा! कोटिश: धन्यवाद!

sadhana thakur के द्वारा
September 30, 2011

jlsingh ji ..आपकी इस आरती को पढ़ कर अपने वतन की याद आ गई ..यहाँ तो इन सब की बहुत सुविधा हैं ,पर बिजली जाने की यादें ..अँधेरे में अन्ताक्षरी खेलने का मजा ..हाथ में पंखा झेलने का मजा ..बहुत याद आता हैं …

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    साधना जी, नमस्कार! आरती को पढ़कर अपने वतन की याद आई, इससे बढ़कर खुशी की बात क्या हो सकती है. अँधेरे में अन्ताक्षरी खेलने और हाथ से पंखा झलने का मजा ही कुछ और है! उतासह्वर्धन के लिए धन्यवाद!

chaatak के द्वारा
September 30, 2011

बिजली माता की इस आरती को पढ़कर मन-मंदिर करंटमय सा हो गया ऐसा लगता है जैसे अब विद्युत् की गति से सारे काम निपट सकते है लैपटाप को थोडा ज्वर था लेकिन कई दिनों के बाद बिजली मैया का स्पर्श पाते ही रॉक एंड रोल करने के मूड में आगया लगता है| परन्तु पूर्णिमा के चाँद की तरह माह में के बार ही पूर्ण (फुल वोल्टेज) दर्शन देने वाली मैया इससे पहले दूज का रूप धारण करें जल्दी से सारे काम निपटा लेता हूँ| गजोधर भैया को इस आरती के लेखन पर हार्दिक बधाईयाँ एवं धन्यवाद !

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    चातक जी, नमस्कार! अपने तो आरती में कुछ नई पक्तियां जोड़ दी है, जिसे मैं स्मरण नहीं कर पाया था. बहुत बहुत धन्यवाद!

Santosh Kumar के द्वारा
September 30, 2011

आदरणीय जवाहर लाल जी ,.सादर नमस्कार आरती के मौसम में एक और उपयोगी आरती ,…माँ दुर्गा का अभय है चिंता ना करें ….साभार http://santo1979.jagranjunction.com/

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    संतोष कुमार जी, नमस्कार! आरती की उपयोगिता समझने और सराहना के लिए, धन्यवाद!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 30, 2011

जवाहर लाल जी, परम महिमामयी बिजली माता की आराधना में प्रस्तुत आपके शब्द आज भारत के हर मध्यम-छोटे शहर के लोगों की व्यथा का चित्रण है। अधिकतर क्रियाकलाप इन्हीं की महती कृपा से निष्पादित होते हैं।  आपकी यह आरती निश्चित ही एक संग्रहणीय कृति है। साभार,

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    वाहिद साहब, नमस्कार! आपका हर छोटे बड़े शहरों और कस्बों का भ्रमण का अनुभव! यथार्थ चित्रण! अतुलनीय है. महोदय, आपने आरती को सराहा!– बहुत ही खुशी हुई. मार्गदर्शन का आकांक्षी- जवाहर!

akraktale के द्वारा
September 30, 2011

जवाहर जी नमस्कार, बहुत ही सुन्दर आरती की आपने बिजली माता की,मेरे लिए तो इनकी आरती नित्य प्रति आवश्यक है क्योंकि खान पान और वैभव सब की ये दाता पूरे महीने सेवा करता वेतन तब पाता यदि बिजली की चोरी रुक जाए तो ये सर्व सुलभ, वैभव पूर्ण करने वाली २४ घंटे आपकी सेवा में हाजिर रहेगी.धन्यवाद.

    jlsingh के द्वारा
    September 30, 2011

    अशोक जी, नमस्कार! आप और हम लगता है, एक ही राह के फ़कीर है! यह सही है, कि यदि बिजली चोरी रुक जाय तो, —— पर रुकेगा कैसे और रोकेगा कौन? —- जहाँ ऊपर से नीचे भ्रष्टाचार की गंगा बह रही हो वहां बिजली की अविरल धारा को रोकने वाले भी तो वही लोग हैं! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!


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