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“नव परिवर्तनों के दौर में हिन्दी ब्लॉगिंग” Contest

Posted On: 10 Sep, 2013 Others,Contest में

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संचार माध्यमों में आयी क्रांति ने समूचे विश्व को एक गांव में परिवर्तित कर दिया है. विश्व के किसी कोने में बैठ कर हम दुसरे छोर के किसी व्यक्ति से तुरंत सम्पर्क साध सकते हैं. टेलीविजन की दुनिया और इंटरनेट(अंतर्जाल) आज सुलभ है, जिसके माध्यम से यह विश्व हमारी मुट्ठी में आ गया है. भाषा का अनुवाद भी तुरंत हो जाता है. ‘गूगल’ ने विश्व की सभी प्रमुख भाषाओँ में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. इस प्रकार भाषा की दीवार अब नहीं रही.
अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओँ में भी पत्राचार होने लगे हैं, हर जगह अनुवाद की सुविधा है, मनुष्य की जगह मशीनो ने ले ली है. फिर हिंदी पीछे क्यों रहे. ज्ञातव्य है कि चीनी के बाद सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा हिंदी है. हिन्दी और इसकी बोलियाँ उत्तर एवं मध्य भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं । भारत और अन्य देशों में ६० करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फिजी, मारीसस, गुयाना, सूरीनाम में अधिकतर और नेपाल की कुछ जनता हिन्दी बोलती है। फिर हमारी तो राष्ट्रभाषा हिंदी है, फिर हम पीछे क्यों रहें.

देश में हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अभिव्यक्ति की वास्तविक, त्वरित, और कम खर्चीली स्वतंत्रता जैसी एक ब्लॉग दे सकता है, वह किसी अन्य माध्यम में उपलब्ध नहीं है। कुछ ही वर्षों में हजारों लोग हिन्दी ब्लॉग लेखन से जुड़े हैं और उन्हें पढ़ने वालों की संख्या तो लाखों में पहुँच गई है।

दूरसंचार के क्षेत्र में जिस तरह की क्रांति मोबाइल के आने से हुई लगभग उसी तरह की क्रांति इंटरनेट की दुनिया में ब्लॉग, यानी इंटरनेट पर आपके निजी ठिकाने, के आने से हुई। इसकी सफलता के पीछे दो प्रमुख कारण हैं जिनमें पहला तो यह कि ब्लॉगों की शुरूआत से पहले आम आदमी इंटरनेट पर केवल एक दर्शक था।

ब्लॉगिंग ने उसे दर्शक से लेखक बनाकर उसके हाथ में ऐसा हथियार दिया, जिससे वह दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते पहुँच सकता था। इसकी लोकप्रियता का सबसे प्रमुख कारण यह है कि इस पर हम अपनी भाषा का उपयोग करते हुए सारे काम कर सकते हैं. इसने उन लोगों को भी जोड़ा जिनकी इंटरनेट में कोई रुचि नहीं थी. हिन्दी ब्लॉगों के लिए चिट्ठा शब्द प्रचलित हुआ और ब्लॉगरों को ‘चिट्ठाकार’ कहा जाने लगा. शुरुआत में तो यह लेखन में शौक रखने वालों के बीच लोकप्रिय हुई पर जैसे जैसे इसकी उपयोगिता का पता चला, लिखने वालों की संख्या बढ़ती गयी. आज बड़ी बड़ी राजनीतिक हस्तियाँ और सेलिब्रेटी (अन्ना, अडवानी, अमितभ बच्चन आदि) भी ब्लॉग लिखने लगे.
बड़ी संचार माध्यम के सम्पादक और पत्रकार भी ब्लॉग्गिंग कर रहे हैं और हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं. बहुत सारे मीडिया पर आरोप लगते रहे हैं कि किसी के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया. स्वतंत्र ब्लॉग्गिंग में इसकी सम्भावना शून्य है, क्योंकि वहां आप खुद ही लिखते और सम्पादित करते हैं.
पत्रकार, संपादक जो किसी पत्र से जुड़े हैं, वहां वे समाचार पत्र की आचार संहिता से बंधे रहते हैं, वहां उनके स्वतंत्र विचार पर पाबंदी रहती है, पर ब्लॉग्गिंग में वह पाबंदी नहीं है. कुछ समय पहले ज्यादातर स्तरीय या कहें उच्च स्तरीय आलेख, समाचार, विवेचना अंग्रेजी भाषा में ही होती थी, पर आज दर्शकों और पाठकों का दायरा बढ़ा है, और हिंदी भाषी भी काफी सक्रिय हुए हैं और अब तो हिंदी आलेखों, शेरों, गजलों, छंदबद्ध और छंद मुक्त कविताओं आदि की बाढ़ सी आ गयी है. सभी के विचार खुली हवा में, अंतर्जाल में विचर रहे हैं.
सोसल मीडिया भी इन सब में रूचि को बढ़ावा दे रहा है … और हिंदी भाषा सरल, सुगम, सर्वग्राह्य होती जा रही है. कभी लोकोक्तियों, लोकगीतों, सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से हम विचार बांटते थे, जिसके लिए उपयुक्त समय और वातावरण की आवश्यकता थी, तो अब उन सब बन्धनों से हम मुक्त होते जा रहे हैं. अब तो ऐसा लगता है कि होली में हम मल्हार गाने लगेंगे और सावन में होली खेलने लगेंगे. मतलब मुक्ति … पर हाँ इस मुक्ति में उच्छृण्खलता नहीं होनी चाहिए, उद्दंडता नहीं होनी चाहिए. इसी आशा और विश्वास के साथ आइये और हिंदी ब्लॉग्गिंग के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करिए, अपने विचार दूसरों तक पहुंचाइए और दूसरों के भी ग्रहण करिए. कोई जरूरत नहीं हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, या हिंदी पखवारा मनाने की. सब दिन हिंदी में काम करिए, हिंदी लिखिए, हिन्दी में सोचिये और हिन्दुस्तान की मिट्टी में हिंदी को बोइये भी, जिससे हिंदी फले फूले और समृद्ध बने. वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं जब भारत के गांव-गांव में इन्टरनेट की सुविधा हो जायेगी और गांव के पढ़े लिखे किसान भी अपनी खेती और फसलों की जानकारी का आदान-प्रदान ब्लॉग के माध्यम से करने लगेंगे और गांव के लोकगीत भी भी अंतर्जाल पर गूंजने लगेंगे! जय हिंदी, जय हिन्द!

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bdsingh के द्वारा
October 10, 2013

हिन्दी ब्लागिंग के महत्व कोबहुत अच्छे ढ़ंग से व्यक्त किया है आपने। आपकी बात– जो देखता हूँ,वही लिखता हूँ।    बहुत अच्छा। आपके लेखों से भी इस बात का एहसास होता है।

    jlsingh के द्वारा
    October 10, 2013

    हार्दिक आभार श्री बी डी सिंह जी!

yamunapathak के द्वारा
September 17, 2013

जवाहर जी सच है अपनी माटी,अपने वतन की खुशबू जितना हिन्दी भाषा में विस्तार पाती है उतना किसी अन्य भाषा में कभी नहीं. बहुत सुन्दर और गहन ता से परिपूर्ण आलेख है साभार

    jlsingh के द्वारा
    October 10, 2013

    हार्दिक आभार आदरणीया यमुना जी!

yogi sarswat के द्वारा
September 14, 2013

पत्रकार, संपादक जो किसी पत्र से जुड़े हैं, वहां वे समाचार पत्र की आचार संहिता से बंधे रहते हैं, वहां उनके स्वतंत्र विचार पर पाबंदी रहती है, पर ब्लॉग्गिंग में वह पाबंदी नहीं है. कुछ समय पहले ज्यादातर स्तरीय या कहें उच्च स्तरीय आलेख, समाचार, विवेचना अंग्रेजी भाषा में ही होती थी, पर आज दर्शकों और पाठकों का दायरा बढ़ा है, और हिंदी भाषी भी काफी सक्रिय हुए हैं और अब तो हिंदी आलेखों, शेरों, गजलों, छंदबद्ध और छंद मुक्त कविताओं आदि की बाढ़ सी आ गयी है. सभी के विचार खुली हवा में, अंतर्जाल में विचर रहे हैं.एक बात और श्री सिंह साब , 65 करोड़ नहीं 85 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं विश्व भर में ! भले बोलते न हों , समझते हैं ! बढ़िया लेखन

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीय योगी जी, सादर अभिवादन! आंकड़ा सही करने के लिए धन्यवाद और आभार!

Bhagwan Babu के द्वारा
September 14, 2013

जय हिन्दी, जय हिन्द… बहुत सुन्दर लेख…

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीय भगवान बाबु, सादर अभिवादन और आभार! जय हिन्दी, जय हिन्द…

ushataneja के द्वारा
September 13, 2013

सुन्दर लेख में हिंदी बोने का विचार तो बहुत ही बढ़िया है| आभार!

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीया उषा जी, सादर अभिवादन और आभार!

seemakanwal के द्वारा
September 10, 2013

वो दिन ज्यादा दूर नही है .हार्दिक आभार . सादर

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीया सीमा जी, सादर अभिवादन और हार्दिक आभार!

Rajesh Dubey के द्वारा
September 10, 2013

हिंदी ब्लोगिंग नित नई उचाई चढ़ रही है. किसी अन्य भाषा से इसे कम नहीं आँका जा सकता है.

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीय राजेश जी, सादर अभिवादन! उत्साहवर्धन के लिए आभार!

September 10, 2013

जहाँ चाह वहीँ राह यही सन्देश दे गए हैं आप .बहुत सुन्दर .

    jlsingh के द्वारा
    September 15, 2013

    आदरणीया शालिनी जी, सादर अभिवादन और आभार!


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