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भारतीय रेल भारतीय लोग (कविता)

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रेलगाड़ी अपनी खिड़की से, नूतन दृश्य दिखाती,
कहीं पहाड़, कहीं पर जंगल, आस पास दिखलाती.
अचल अटल पर्वत हैं जैसे, जंगल सुरभित होते..
अगर पहाड़ न होते, तो ये जंगल कहाँ से होते
जंगल अगर न होते, तो फिर बारिश कहाँ से होती
बारिश अगर न होती, तो ये नदियां कहाँ से होती.
नदियों का जल सिंचित करता, खेत, बाग़ सस्यों का.
नदी कूल पर जन्मी सभ्यता, सिंधु, द्रविड़, आर्यों का,
शस्य पूर्ण धरती को करता, जलधारा अमृत सा,
महिषी, गायें जीवन देतीं, दूध पिला निज थन का.
ईख, धान, सब्जी के पौधे, मन को कहीं लुभाते,
बाग़ बगीचे, आम्र, कदली के, फल को वही चखाते
शीशम के ये पेड़ खड़े हो, शक्ति अपनी दिखलाते,
शाल संग ये सागवान भी, वन सम्पदा कहाते..
चौड़ी नदी पर पुल से होकर, रेल गाड़ी जब चलती,
घर्षण,स्पंदन का स्वर, संगीत कर्ण में भरती.
रेल गाड़ी है गजब सवारी,,लोहे के पथ चलती,
अपने अंदर शत शत जन को, संग उमंग से भरती..
भारत देश की जीवन रेखा, रेलगाड़ी कहलाती,
भारत के ही सब प्रांतों का, सैर सदा ही कराती.
रेलगाड़ी की छुक-छुक छुक-छुक, जीवन की गाथा है,
एक साथ ही शत शत जन को, प्रेम से मिलवाता है.

जवाहर लाल सिंह

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mazid Umar के द्वारा
November 14, 2014

very nice poem, keep it up

pkdubey के द्वारा
November 12, 2014

लौहपथगामिनी को प्रकृति के साथ एक सूत्र में बहुत भव्यता से आप ने पिरोया, आदरणीय सादर आभार |

Shobha के द्वारा
November 11, 2014

जवाहर जी रेलगाड़ी को लेकर आपने बहुत सुंदर कविता लिखी है अंत की दो पंक्तिया मुझे बेहद अच्छी लगी डॉ शोभा

Alka के द्वारा
November 8, 2014

वाह जवाहर जी , आनंद आ गया पढ़कर .. रेल.. ki yatra घर बैठे ही करा di aapne सुन्दर saral रचना …

    jlsingh के द्वारा
    November 9, 2014

    उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीया अलका जी!

deepak pande के द्वारा
November 8, 2014

Bahut khoob aadarniya jawahar jee rail yatra ka sakaratmak chitran

    jlsingh के द्वारा
    November 9, 2014

    उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीय श्री दीपक पण्डे जी!

sanjay kumar garg के द्वारा
November 7, 2014

“……अंजन की सीटी से महारों दिल डोले” आदरणीय जे एल सर आपकी कविता को पढ़कर ये गीत याद आ गया! सुन्दर कविता! साभार!

    jlsingh के द्वारा
    November 9, 2014

    रेल गाड़ी पर बहुत सारे लोकगीत हमारे यहाँ गाये जाते हैं ..हमने अपना अनुभव का ही वर्णन किया है.. आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया का हार्दिक अभय आदरणीय श्री संजय गर्ग जी!

    jlsingh के द्वारा
    November 9, 2014

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आदरणीय श्री योगी जी! आपका समर्थन और सहयोग हमेशा मिलता है आगे भी मिलता रहेगा ऐसी उम्मीद रखता हूँ.

harirawat के द्वारा
November 6, 2014

प्रिय भतीजे जवाहर लाल, सबसे पहले आशीर्वाद दूंगा ! कविता पढ़ी, स्वयं कविता की लाइनों के साथ चंचल मन भी उड़ने लगा ! जंगल पर्वत झरने, नदी की धाराओं में छलांग लगाने लगा ! आपने कुदरत के क्रिया कलापों, रस अंलकारों को शब्द रुपी धागों में पिरोकर मन को गहराई तक छूने वाली कविता रच डाली ! शुभकामनाएं देता हूँ ! मेरे ब्लाक में आकर मेरे चहरे पर पड़ी हुई सिलवटों को मुस्कान में बदलने के लिए धन्यवाद भी देता हूँ ! कोशिश करूंगा जागरण परिवार से जुड़ा रहूँ ! हरेन्द्र जागते रहो !

    jlsingh के द्वारा
    November 9, 2014

    आदरणीय चाचा जी, सादर अभिवादन और हार्दिक आभार, आप मेरा उत्साह इसी तरह बढ़ाते रहें और अपनी रचनाओं को भी मंच पर उतारते रहें. आपके अनुभव हम सभी के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं. सादर!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 5, 2014

आदरणीय जवाहर जी बहुत kam shabdon me rail ke janopyogi swaroop ka chitran kiya hai aapne .badhai

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आदरणीया शिखा जी!

OM DIKSHIT के द्वारा
November 5, 2014

आदरणीय जवाहर जी,नमस्कार.सुन्दर अभिव्यक्ति.

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    हार्दिक आभार आदरणीय ओम दीक्षित जी, बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए…सादर!

ranjanagupta के द्वारा
November 5, 2014

मुझ जैसे लोग जो जल्दी कभी यात्रा पर नही निकलते !उनके लिए अच्छी कविता लिखी है !पढ़ कर मुफ्त में यात्रा का आ गया !बहुत बधाई आदरणीय जवाहर जी !सादर !

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    पर क्यों आदरणीया? रेलवे को घाटा क्यों करा रही हैं. भीड़-भाड़ से बचिए पर मौैका मिले तो घूमने अवश्य निकलिए और भारतीय ट्रैन तो सबसे सस्ती सवारी है…ऐसा लोग कहते हैं… सबसे बड़ी बात हर तरह के लोगों से मुलाकात होती है और बाकी मैंने तो अनुभव के आधार पर ही लिखा है….

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
November 5, 2014

वाह, बेहद खूबसूरत कविता । बच्चे पढें या बूढे सभी को आन्नद आए । सुंदर रचना ।

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    अच्छा लगा …बच्चे बूढ़े एक सामान ही होते हैं …बच्चों के लायक ही कविता है…आपकी प्रतिक्रिया का आभार आदरणीय श्री बिष्ट जी!

Rajesh Dubey के द्वारा
November 5, 2014

भारतीय रेल भारत के दर्शन से मेल कराती हुई निरंतर बढ़ते रहती है.जीवन के सभी रंग इसमें है, गीत, संगीत, मिलान, जुदाई सबसे परिपूर्ण है भारतीय रेल.

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    हार्दिक आभार आदरणीय श्री राजेश दुबे जी! आपका साथ हमेशा मिलता है ऐसे उत्साहवर्धन करते रहें. सादर!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 4, 2014

चौड़ी नदी पर पुल से होकर, रेल गाड़ी जब चलती, घर्षण,स्पंदन का स्वर, संगीत कर्ण में भरती. रेल गाड़ी है गजब सवारी,,लोहे के पथ चलती, अपने अंदर शत शत जन को, संग उमंग से भरती.. कविता की सफलता ये है कि पढ़ते पढ़ते रेल गाड़ी में घुमने जैसा आनन्द आ गया,मज़ेदार रचना ,साभार .

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    इसी तरह उत्साह बढ़ाते रहें आदरणीया निर्मला जी, हम लोग तो कविता नहीं तुकबंदी लिखते हैं…सादर आभार!

yamunapathak के द्वारा
November 4, 2014

आदरणीय जवाहर जी बहुत ही सरल और सुन्दर कविता है सब कुछ अंतर्सम्बंधित है इस जग में इस बात को भी बखूबी प्रस्तुत किया है आपने साभार

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार, आदरणीया यमुना जी!

ranjanagupta के द्वारा
November 4, 2014

आदरणीय जवाहर जी !सहज सरल जन की कविता !भाषा भाव सब सरल सहज ! सुन्दर सफल !साभार !सादर !!

    jlsingh के द्वारा
    November 5, 2014

    हार्दिक आभार, आदरणीया रंजना जी!


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