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सरिता की धारा सम जीवन

Posted On: 5 Aug, 2015 कविता में

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नित्य करेला खाकर गुरु जी, मीठे बोल सुनाते हैं,
नीम पात को प्रात चबा बम, भोले का गुण गाते हैं.
उपरी छिलका फल अनार का, तीता जितना होता है
उस छिलके के अंदर दाने, मीठे रस को पाते हैं.
कोकिल गाती मुक्त कंठ से, आम्र मंजरी के ऊपर
काले काले भंवरे सारे, मस्ती में गुंजाते हैं.
कांटो मध्यहि कलियाँ पल कर, खिलती है मुस्काती है
पुष्प सुहाने मादक बनकर, भौंरों को ललचाते हैं.
भीषण गर्मी के आतप से, पानी कैसे भाप बने
भाप बने बादल जैसे ही, शीतल जल को लाते हैं.
यह संसार गजब है बंधू, जन्म मृत्यु से बंधा हुआ
जो आकर जीवन जीते हैं, वही मृत्यु को पाते हैं.
सुख दुःख का यह मधुर मिलन है, दो पाटों के बीच तरल
सरिता की धारा सम जीवन, भवसागर में आते हैं.
- जवाहर लाल सिंह

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 8, 2015

श्री जवाहर जी सही कविता यही सत्य है ” सुख दुःख का यह मधुर मिलन है, दो पाटों के बीच तरल सरिता की धारा सम जीवन, भवसागर में आते हैं”

    jlsingh के द्वारा
    August 9, 2015

    बहुत बहुत आभार आदरणीया डॉ. शोभा जी, मेरी छोटी सी कोशिश थी आपलोगों की सराहना और उत्साह वर्धन से मन को संतुष्टि मिलती है… सादर!

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 8, 2015

jls जो देखता हूँ, वही लिखता हूँ…सुंदर देखा लिखा अभिनन्दन ओम शांति शांति

    jlsingh के द्वारा
    August 8, 2015

    हार्दिक आभार आदरणीय हरिश्चंद्र जी … आम आदमी हूँ अंतर्ज्ञान नहीं है इसीलिये जो देखता हूँ वही लिखता हूँ सादर!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 7, 2015

प्रकृति और जीवन के दोनों रूपों का सार्थक वर्णन करती क्रिस्प कविता ,सुंदर रचना लिखी है आपने आदरणीय जवाहर सिंह जी .

    jlsingh के द्वारा
    August 8, 2015

    आदरणीया निर्मला जी काफी दिनों बाद आपके दर्शन हुए हैं आपकी चर्चाएँ यहाँ खूब होती है …आपकी कविताएँ पढ़े काफी दिन हो गए … मेरी कविता को सराहने और उत्साह बढ़ाने के लिए आपका हार्दिक आभार!

aman kumar के द्वारा
August 6, 2015

क्या बात गुरु जी मस्त मूड में हो ! अच्छी रचना बधाई हो

    jlsingh के द्वारा
    August 8, 2015

    त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आभार प्रिय अमन कुमार जी!


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