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फीकी पड़ती चमक

Posted On: 9 Aug, 2015 Others,न्यूज़ बर्थ,Politics में

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सोने की चमक फीकी पड़ती जा रही है. शेयर मार्केट नीचे ऊपर हिचखोले खा रहा है. ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान जो अडानी को आवंटित हुआ था वह रद्द होने के कगार पर है. प्रधान मंत्री मोदी जी का अभी कोई चर्चित विदेश दौरा नहीं हो रहा. उनका कोई जोरदार भाषण या वक्तब्य भी मीडिया में नहीं आ रहा. ललित मोदी, सुषमा प्रकरण, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के ब्यापम पर उनकी लगातार चुप्पी, छत्तीसगढ़ का राशन घोटाला, संसद में जोरदार हंगामा, कांग्रेस के २५ सांसदों क निलंबन, कांग्रेस के साथ कुछ विपक्षी पार्टियों द्वारा संसद का बहिष्कार, भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार का कथित यु टर्न, संसद की सर्वदलीय बैठक से प्रधान मंत्री की दूरी —कितना कुछ है जो नरेंद्र मोदी की विफलता के कहानी कह रहा है. बिहार में दिए गए नीतीश के खिलाफ डी. एन. ए. वाला विवादित बयान उसपर नीतीश कुमार की खुली चिट्ठी. उद्योगपति राहुल बजाज का निराशाजनक बयान और भी काफी कुछ है जो प्रधान मंत्री के चमकते हुए शहंशाह की छवि पर बट्टा तो लगाता ही है. जनता कुछ चमत्कार की उम्मीद में थी पर आशा के अनुरूप परिणाम न देखने पर जनता का भी मोह भंग होना स्वाभाविक है. प्याज टमाटर के लगातार बढ़ते दाम, पूरे देश में कानून ब्यवस्था का बुरा हाल, दिल्ली में सबसे अधिक आपराधिक घटनाओं का होना, महिलाओं के साथ हो रहे लगातार जुर्म और दुष्कर्म…. दिल्ली की केजरी सरकार के साथ राज्यपाल का लगतार टकराव ……और कितने दिन चलेंगे मोदी की नाम … भाजपा नेताओं की विवादास्पद बयानबाजी, शत्रुघ्न सिन्हा का विपक्ष के साथ गलबहियां करना, पार्टी के अंदर की सुगबुगाहट …..कुछ तो बात है, जो अभी परदे के अंदर चल रहा है. हर बात में मुखर रहने वाले प्रधान मंत्री आखिर इन सारे ज्वलंत मुद्दों पर खामोश क्यों हैं? सोसल मीडिया को महत्व देनेवाले प्रधान मंत्री पर आज व्यंग्यात्मक टिप्पणियां की जा रही है, जो कभी मनमोहन सिंह पर की जाती थी, अब कोई उनसे डिग्री दिखाने को कह रहा है …यह भी अच्छी बात तो नहीं कही जा सकती. …..आने वाले दिनों में बिहार में चुनाव का आगाज….. चमक अभी बाकी है, या फीकी पड़ रही है?
ऐसे समय में देश के शीर्ष उद्योगपतियों में से एक और राज्यसभा के सांसद राहुल बजाज ने NDTV से की गई एक खास बातचीत में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए तल्ख शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा है कि पिछले साल ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में आने वाली एनडीए सरकार अपनी चमक खोती जा रही है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को मिली ऐतिहासिक जीत का ज़िक्र करते हुए बजाज ग्रुप के चेयरमैन ने कहा, “मई, 2014 में हमें एक ‘शहंशाह’ मिला था, और पिछले 20-30 सालों में दुनिया के किसी भी देश में, किसी को भी ऐसी सफलता नहीं मिली थी… मैं इस सरकार के विरोध में आज भी नहीं हूं, लेकिन सच्चाई यही है कि अब इस सरकार की चमक फीकी पड़ती जा रही है…”
राहुल बजाज ने अपनी बात को आगे ले जाते हुए कहा कि वह “वही कह रहे हैं, जो बाकी लोग कह रहे हैं…” उन्होंने कहा, सरकार की गिरती साख पिछले साल से अब तक कई चुनाव नतीजों में साफ नज़र आई है. “दिल्ली में यह दिखा, पश्चिम बंगाल के निगम चुनावों में भी दिखा… मैं दोनों पार्टियों के साथ हूं, मैं भारत की भलाई चाहता हूं… मैं सरकार से बाहर का आदमी हूं, मैं कुछ नहीं जानता हूं, लेकिन अगर बीजेपी बिहार में अच्छी सरकार बना पाती है तो कम से कम इस स्थिति से कुछ छुटकारा मिल सकता है… बीजेपी की थोड़ी उम्मीद आने वाले बंगाल, केरल, असम और पॉन्डिचरी चुनाव से है…”
सरकार द्वारा प्रस्तावित ब्लैक मनी बिल के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए राहुल बजाज ने कहा, जिन लोगों के पास काला धन जमा है, यह बिल उन्हें उसे सार्वजनिक करने के लिए तीन महीने का समय देता है. इसमें जो लोग तीन महीने की समयावधि का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके लिए 60 प्रतिशत चार्ज देना पड़ेगा, लेकिन उन पर किसी तरह का केस नहीं चलेगा. जो लोग इस तीन महीने की विंडो का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, दोषी पाए जाने पर उन पर 120 प्रतिशत जुर्माना और 10 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है.
राहुल बजाज ने यह भी कहा कि उद्योग जगत से जुड़े लोग इस बात से चिंतित हैं कि इस तरह की घोषणाओं के बावजूद उन्हें इस बात की गारंटी नहीं मिलती है कि भविष्य में उन पर केस नहीं चलाया जाएगा. “हम सार्वजनिक जानकारी दे देते हैं और फिर आप कहते हैं कि यह गैरकानूनी है… अगर ऐसा होता है तो मैं कुछ भी सार्वजनिक नहीं करूंगा, मैं रिस्क लूंगा और सुप्रीम कोर्ट जाकर जीवन भर अपनी लड़ाई लड़ूंगा… मुझे कुछ भी नहीं होगा…”
हालांकि सरकार ने इन घोषणाओं पर बारीक नज़र रखने की बात कही है, ताकि उन्हें टैक्स अधिकारी परेशान न कर सकें, लेकिन राहुल बजाज इस तर्क से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है, “हर कोई कह रहा है… चाहे वह आईटीओ हो या प्रवर्तन निदेशालय, उन जगहों पर मौजूद तकरीबन लोग वैसे ही हैं, जैसे पहले थे… आप हर हाल में परेशान किए जाएंगे…”
राहुल बजाज ने यह भी कहा कि उन्हें उन उद्योगपतियों से कोई सहानुभूति नहीं, जो कानून तोड़ते हैं, लेकिन यह कानून पारदर्शी नहीं है. “मेरे ख़्याल से इस कानून का प्रारूप ही किसी परिकल्पना के तहत किया गया है… मैं यह बात पूरे समूह के लिए नहीं कह सकता हूं, लेकिन जिन्होंने ऐसा किया है, मेरी सहानुभूति उनके साथ नहीं है. यह सब बदले की कार्रवाई के तहत किया गया है… यह नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं है…”
राहुल बजाज ने ऐसा बयान सार्वजनिक रूप से दिया है, पर ऐसे बहुत सारे उद्योगपति, राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषक कह रहे हैं. संसद का लगातार ठप्प होना और किसी बिल पर बहस न होना, निराशा का भाव पैदा करता है. संसद का वक्त बर्बाद होना मतलब करोड़ों की क्षति अलग से हो रही है. सरकार और विपक्षी दल दोनों का दायित्व है कि संसद को चलायें और जनता का काम करें. प्रस्तावित विधेयक पर बहस हो और उसे दोनों सदनों से पास कराया जाय, पर ऐसा होता दीख नहीं रहा क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने रास्ते पर अड़े और खड़े हैं.
सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सुषमा स्वराज, स्मृति इरानी आदि अपनी अपनी व्यक्तिगत खुन्नस निकल रहे हैं, जो किसी भी तरह से या कहें कि भारतीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है. मोदी जी कहीं से बीच-बचाव करते नजर नहीं आ रहे हैं … उनका मौन उनके लिए भी आत्मघाती न बन जाय. अभी बिहार में चुनाव होना है, वहां भी मोदी जी और नीतीश जी अपनी-अपनी व्यक्तिगत खुन्नस का जिक्र सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. जनता सब कुछ देख रही है, मीडिया हवा बनाने में माहिर है. संयोग से लोक सभा में मोदी जी के लिए प्रचार सामग्री तैयार करने का काम सम्हालने वाला प्रशांत किशोर इस बार नीतीश जी के साथ है. अरविन्द केजरीवाल भी नीतीश कुमार का समर्थन करने को तैयार बैठे हैं, ऐसे में बिहार का चुनाव परिणाम ही बताएगा कि मोदी जी की चमक बरक़रार है या फीकी पड़ी है.
फिर भी पूरी निराशा नहीं व्यक्त की जा सकती है. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के साथ कुछ राष्ट्रों में भारत का नाम हुआ है. संयुक्त-राष्ट्र-संघ में भारत की भागीदारी बढ़ी है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की नीलामी से सरकारी खजाने में मुद्रा की बृद्धि हुई है, वहीं कोयले के उत्पादन में बृद्धि से बिजली उत्पादन में भी थोड़ा सुधार हुआ है. लेकिन इसके अलावा प्राकृतिक गैस, तेल, इस्पात, सीमेंट, फर्टिलाइजर्स आदि में गिरावट ही दर्ज की गयी है. जोर-शोर से चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान के परिणाम भी उत्साहजनक नहीं हैं. भ्रष्टाचार का उन्मूलन हो गया है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है …. और भी कई योजनाओं पर मोदी सरकार को गंभीरता से कदम उठाने होंगे. किसानों, मजदूरों, गरीबों, बेरोजगारों के हित में आवश्यक कदम शीघ्रातिशीघ्र उठाने होंगे, तभी उनकी साख आगे भी बनी रहेगी वरना जनता के पास विकल्प की अभी भी कमी है… किसके पास जाय?…यानी जाये तो जाये कहाँ? वाली बात है.
आशाजनक परिणाम की आकांक्षा के साथ – जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 17, 2015

श्री जवाहर जी यह बात तो ठीक है हमारें यहां जैसे ही कानून में विसंगति देखते हैं उस पर एक और कानून बन जाता हैं इस तरह हर कानून में पेच और बचने के रास्ते हैं मोदी जी इस बात को समझते हैं दूर करने की कोशिश भी की जा रही है आप जानते हैं इंस्पैक्टर राज है एमी लगता हैं सुधारने में

    jlsingh के द्वारा
    August 18, 2015

    aadarneey shobha ji, aap theek kaha rahee hain, samay lagega samay poore paanch sdaal hain bhi par logon ko twarit parinaam kee aasha hai nahee to udyog pati gharana kyon naraaj hota? maine apnee samjha ke hee anusaar likha hai… saadar!

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 17, 2015

पता नही यह कमेंटृ भी पोस्ट हो सकेगा कि नही । अच्छा तथ्यात्मक लेख है । मोदी सरकार थोडा निराशा तो सभी को हो रही है । देखा जाए तो कुछ भी सार्थक सामने नही आ पा रहा है । कांग्रेस को हावी होने का अवसर मिला सो अलग से । देखिए आगे होता है क्या ।

    jlsingh के द्वारा
    August 18, 2015

    आदरणीय इस एल बिष्ट जी, सादर अभिवादन! मेरी राय में वर्तमान नेतृत्व में कंग्रेस को आगे बढ़ने का/ या हावी होने का कोई चांस नजर नहीं आ रहा है. यह एक कदम आगे बढ़कर दो कदम पीछे गिराने जैसा है. जब तक कोई विकल्प नहीं दीखता भाजपा को ही गले लगाना होगा और मोदी जी पर भरोसा करना होगा. मोदी जी भी सबको साथ लेकर चलने में खुद को कुछ असहाय सा महसूस कर रहे हैं. ऐसा मुझे लग रहा है ..वैसे उनका विदेशों में खूब नाम और सम्मान हो रहा है ..देखा जाय क्या परिवर्तन होता है? सादर!

Shobha के द्वारा
August 17, 2015

श्री जवाहर जी बहुत अच्छा सटीक सोच के साथ लिखा गया लेख जो अब तक संसद में हुआ वह निराशा जनक था उसने सत्ता पक्ष को भी आडवाणी जी के नेतृत्व में जलूस निकालने पर विवश कर दिया जिस तरह देश की जनसंख्या बढ़ रही है देश का उद्धार होना सम्भव नजर नहीं आता जीएस टी बिल राजनीति की भेंट चढ़ गया मोदी जी समझ चुके थे राहुल और सोनिया जी के नेतृत्व में कांग्रेस अपनी जमीन खोज रही है इस लिए उन्होंने संसद में आने का कष्ट ही नहीं किया अब सदन की तरक्की हो रही है तख्तिया ले कर प्रदर्शन करना यह तख्तियां प्रधानमंत्री के मुहं पर लहराई जाती जो भी हुआ आप हम सब को सोचने पर विवश करता है अरे मैने किसी और लेख पर प्रतिक्रिया दी थी उसे न पहुँचने पर सेव कर लिया था |

    jlsingh के द्वारा
    August 18, 2015

    आपने लगता है, मेरे नयी पोस्ट के लिए यह प्रतिक्रिया लिखी थी. खैर कोई बात नहीं मैं उसे वहां कॉपी पेस्ट कर दे रहा हूँ.

sadguruji के द्वारा
August 12, 2015

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! आज की सुबह कमेंट आप तक पहुँच जाये तो वाकई आज की सुबह बहुत मंगलकारी होगी ! कमेंट का कुछ अता पता ही नहीं चल रहा है ! हम लोगों के बीच एक आत्मीय संबंध है ! आपस में संवाद न होने से लेखन एक ओपचारिकता मात्र बन के रह जाएगा ! आप ने बहुत से समाचार अपनी बेबाक और सटीक टिप्पणी सहित दिए हैं ! बहुत अच्छा लगा ! बिहार के चुनाव अब निश्चय ही आपके लेखन के केंद्रबिंदु बनेंगे ! मुझे तो लगता है कि बिहार में नितीश कुमार जी अभीतक अच्छी स्थिति में हैं ! आपने सही कहा है कि लोंगो की बढ़ती हुई बेचैनी और निराशा भाजपा, मोदी जी और उनकी सरकार की चमक फीकी पड़ने की सूचक है ! मोदी जी का समर्थक होने के वावजूद भी अब मुझे भी उनसे निराशा होने लगी है ! मोदी युग के अवसान के साथ ही राजनीति से मेरी और मेरे जैसे बहुत से लोंगो की दिलचस्पी भी ख़त्म हो जाएगी ! आगे हरि इच्छा ! हार्दिक बधाई !

    jlsingh के द्वारा
    August 18, 2015

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! बहुत निराश होने की जरूरत भी नहीं है. जो भी होगा अच्छा ही होगा. भारतीय लोकतंत्र की यही तो खासियत है. जनता को जब भी मौका मिलता है सही फैसला करती है. कांग्रेस अभी फिलहाल अपना खोया सम्मान वापस नहीं प् सकती जब तक उसके शीर्ष स्तर पर नेतृत्त्व परिवर्तन नहीं होता. ऐसे में क्षत्रीय दलअपने कार्य के अनुरूप प्रदर्शन करेंगे. मोदी का वाक्चातुर्य हर जगह काम कर जाता है इसलिए अभी कोई दूसरा विकल्प नहीं है. सबसे बड़ा तो ऊपरवाला है ही उन्ही के इच्छा से सब होता है …बाकी तो सभी पुतले हैं. सादर!

sumit के द्वारा
August 12, 2015

सुन्दर और सटीक पोस्ट ……. :)

    jlsingh के द्वारा
    August 18, 2015

    धन्यवाद सुमित जी!


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