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अशांत व्यावसायिक परिवेश में विकास के लिए कर्मचारियों की रचनात्मकता

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Employee creativity for growth in turbulent Business Environment
अशांत ब्यावसायिक परिवेश में विकास के लिए कर्मचारियों की रचनात्मकता
हम इस पृथ्वी ग्रह पर एक दिलचस्प स्थिति में हैं. हमारे व्यापार के वातावरण में भी अल्पकालिक चुनौतियों की आशंका बनी रहती है, जब व्यापार प्रबंधक के रूप में हमें एक वैश्विक वित्तीय संकट, एक पर्यावरण संकट, महामारियों की धमकी, राजनीतिक और सामाजिक अशांति आदि महत्वपूर्ण अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ जाता है. हर जगह प्रबंधकों के लिए चुनौती है, मजबूत व्यापारिक स्थिरता, और मुनाफा की स्थिति को बनाये रखना.
वैश्विक आबादी में बेतहाशा बृद्धि और हमारे सीमित संसाधन हमेशा से चुनौती रहे हैं. सीमित संसाधनों के इष्टतम उपयोग हेतु लागत खर्च में कमी की बात अक्सर की जाती है, साथ ही साथ हम सभी दिन प्रतिदिन सुविधा भोगी होते जा रहे हैं. ऐसी स्थिति में किसी भी ब्यवसाय में उसके कर्मचारियों की अहम् भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है.
किसी भी ब्यवसाय को चलाने हेतु अग्रेजी के चार M और एक E की महत्वपूर्ण भूमिका है चार M यानी Man(मनुष्य), Machine(मशीन), Method (तरीका) , Material (सामग्री) के साथ एक E यानी Environment (पर्यावरण) का भी अपना योगदान है.
पर्यावरण को सिर्फ वातावरण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए वरण प्राकृतिक आपदा, संसाधनों की अनुपलब्धता या अभाव, सामाजिक और राजनीतिक वातावरण भी खास मतलब रखता है.
उर्जा के पारंपरिक स्रोत तेल, गैस, और कोयले को ही ले लें, तो ये सभी सीमित हैं और आनेवाले दिनों में इनकी भयंकर कमी भी होनेवाली है. इसके अलावा तूफान, सूखा, बाढ़, भूकंप, सुनामी आदि प्रकृतिक आपदा भी हमें प्रभावित करते रहते हैं. नदियों और भूगर्भ जल का निरंतर प्रदूषण हो रहा है जो आने वाले समय में घोर संकट की स्थिति उत्पन्न करने वाला हो सकता है. घटते हुए कृषि भूमि और उसकी उर्वर शक्ति में ह्रास खाद्य सामग्री के उत्पादन में कमी की तरफ इशारा करते हैं. सिंचाई की सुविधा का अभाव किसानों के कर्ज में डूबने की स्थिति और आत्महत्या की तरफ उन्मुखता ..ये सभी चिंतित करनेवाले वातावरण हैं.
एक बड़ी आबादी का गाँव से शहरों की ओर पलायन जारी है. ट्रांसमिशन और वैश्विक परिवहन प्रणाली के माध्यम से यह आसान होता जा रहा है. परिणामत: शहरों का प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ा है.
एक ऐसे समय की भी आशंका की जा रही है कि लोग भोजन, पानी, कपड़ा और आवास के लिए आपस में संघर्ष/सिर फुटौवल न करने लग जाएँ. जबकि कई जगहों में यह हो भी रहा है.
कई बार पड़ोसी देशों से हमारे सम्बन्ध अच्छे नहीं होते या बाहरी आक्रमण की भी चिंता बनी रहती है. ऐसे में हम सम्बन्ध सुधारने, आपसी सामंजस्य और सौहार्द्र बनाये रखने की आवश्यकता महसूस करने लगते हैं.
सवाल यह है कि इस अनिश्चतता के इस माहौल में अपने ब्यापार को कैसे सुदृढ़ रख सकते हैं और उसमे हमारे कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी?
भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित स्व. जे आर डी टाटा का कहना था – ब्यवसाय के लिए उपयोगी ४ ‘एम’ में से एक ‘एम’ मनुष्य(मैन) है जो सबसे क्लिष्ट पर परम उपयोगी है. हमें इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
कर्मचारी किसी भी संस्थान की रीढ़ और हाथ पैर होते हैं. ब्यापारिक संस्थान की सफलता और असफलता बहुत हद तक कर्मचारियों के कुशल क्रिया कलाप पर ही निर्भर करते हैं. क्योंकि काम करनेवाले कर्मचारी ही होते हैं. समुचित उत्पादन, गुणवत्ता, निष्पादन और इष्टतम लागत सभी कुछ कर्मचारियों पर ही निर्भर है. समय के अनुसार बदलाव, तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्ता और लागत के बारे में उनकी प्रतिबद्धता संस्थान को दीर्घकाल तक बरकरार रखने में उनकी सहभागिता अत्यन्त ही आवश्यक है. बड़े बड़े संस्थान प्रमुख अपने कर्मचारियों के गुणगान करते नहीं थकते और बीच बीच में वे अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी करते रहते हैं.
कहते हैं, हम अपने दिमाग का बहुत ही कम इस्तेमाल करते हैं …जो कहा जाता है, वही करते हैं. अगर हम अपना दिमाग का सही औए सकारात्मक इस्तेमाल करने लगें तो उसके निश्चित ही सकारात्मक परिणाम भी होंगे. दिमाग इस्तेमाल कैसे करेंगे? सुझाव, विचार मंथन, आपसी वार्तालाप और प्रबंधन के साथ मेल मिलाप माध्यम है, दिमाग के इस्तेमाल का. हमारे अन्दर वो जज्बा होना चाहिए कि यह संस्थान है तो हम हैं और यह भी हमपर उतना ही आश्रित है जितना कि हम इस पर. …
इसलिए समय के अनुसार बदलाव यह समय की मांग होती है, इसलिए बदलना भी आवश्यक है, न कि हम पुराने ढर्रे पर जो काम कर रहे थे, वैसे ही करते रहेंगे.
हाँ, अशांति के वातावरण के बावजूद, हम वास्तव में कुछ निश्चितता को भी विकसित कर रहे हैं. साथ ही विकसित कर रहे हैं, नए नए अवसर के साथ आनेवाले समय भविष्यवाणी भी. इसलिए इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि जहाँ चाह है वही राह भी है.
कई संस्थानों में कर्मचारियों की सहभागिता के लिए सुझाव पेटी योजना, लघु समूह क्रिया कलाप (स्माल ग्रुप एक्टिविटीज), मंथन अब शॉप फ्लोर से (मास), गुणवत्ता समूह (क्वालिटी सर्किल), टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टी पी एम) आदि कार्यरत है.
हिरोशिमा नागाशाकी पर बम वर्षा ने जापान को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था, पर वहाँ के नागरिकों, कर्मचारियों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, जिसका परिणाम सामने है. जापान के बारे में कहा जाता है कि वहां के कर्मचारी अपने ‘लंच ऑवर’ से कुछ समय निकाल कर गार्डेन निंग (बागवानी का काम) करते हैं. कर्मचारियों के भरपूर योगदान का ही परिणाम है कि आज चीन सबसे आगे है.
कार्य में रचनात्मकता को बढ़ावा के 5 तरीके
आप अपनी टीम को और अधिक सफल देखना चाहते हैं, तो आप को एक रचनात्मक काम के माहौल बनाने की जरूरत है. पूर्ण रचनात्मकता के लिए, समस्याओं का समाधान, वर्तमान बाधाओं को दूर करने और अपने उद्योग में अभिनव प्रयोग के लिए संगठन का होना बहुत महत्वपूर्ण है. एक रिपोर्ट के अनुसार 2,000 कर्मचारियों की एक कंपनी में 59 प्रतिशत ने नए विचारों के विकास को अपनी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण पाया. इसके अलावा, कार्यालयों के 52 प्रतिशत ने सामान्य या सामाजिक सुविधा की कमी की और इशारा किया, 50 प्रतिशत कर्मचारियों में और अधिक रचनात्मक करने की क्षमता थी, तो काफी लोग उनकी कंपनी और अधिक लाभदायक हो सकती है, सिद्धांत के समर्थक थे. वहीं सहयोग करने के लिए अवसर की कमी को 33 प्रतिशत कर्मचारी महसूस करते हैं.
यहाँ रचनात्मकता को बढ़ावा देने के कई सुझाव दिए गए हैं:
1. बुद्धिशीलता की शक्ति का प्रयोग करें.
उनकी आवाज को सब सुन रहे हैं यह सुनिश्चित करने के लिए, विचार मंथन के द्वारा अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करके, आप नए विचारों को एकत्रित करें. कर्मचारियों के विचारों को लिखें और उनके सार को ग्रहण कर उसे उपयोग में लाने हेतु योजना बनाएं. विचार मंथन के दौरान समय सीमा निश्चित ना करें, बल्कि इसे कार्यालय या कार्यस्थल के बाहर भी करने की योजना बनायें.
2. विविध टीमों का निर्माण करें.
एक विविध वातावरण बनाने के लिए, आप को लोगों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है. आमतौर पर, जो सहयोग नहीं करते, जो ताकत और कमजोरियों का एक अलग सेट है, अलग पृष्ठभूमि से आने वाले कर्मचारियों के एक समूह को इकट्ठा करो. टीम में हर परियोजना में बराबर की हिस्सेदारी और इनपुट को सुनिश्चित करें. ऐसा करने से, कर्मचारियों का एक दूसरे से सीखने और अच्छा करने की क्षमता का विकास होगा. ऐसे सक्षम कर्मचारियों में टीम भावना का विकास कर विभिन्न टीमों जैसे, गुणवत्ता समूह, टी पी एम सर्किल, सुझाव प्रबंधन, मंथन अब शॉप फ्लोर से आदि का निर्माण करें और उन्हें कुछ रचनात्मक करने में सहयोग को बढ़ावा दें.
3. महान विचारों को पुरस्कृत करें.
अपने बुद्धिशीलता सत्र से बाहर आकर सबसे अच्छे विचारों पर अपनी टीम को वोट दें. विजेता टीम को पुरस्कृत कर उसे और भी ज्यादा प्रोत्साहित कर सकते हैं. आप इसके लिए बजट रख सकते हैं, आप को सबसे अच्छे विचार में निवेश करना चाहिए. वे परिवर्तन के कारण और वे संभावित बाजार के लिए अपने विचारों को ला सकता है.
4. उन्हें बड़ी खुली जगह दीजिए.
अपनी टीम के लिए जितना संभव हो अव्यवस्था को दूर करके एक खुला और विशाल माहौल बनाएँ. कई कर्मचारियों को अपनी प्रवीणता को कार्यरूप देने का वातावरण (माहौल) नहीं मिलाता. उन्हें उपयुक्त माहौल प्रदान करिए. इससे आप सकारात्मक परिणाम हाशिल कर सकते हैं.
5. अपने प्रबंधन रचनात्मकता का समर्थन सुनिश्चित करें.
कई बार कर्मचारियों की रचनात्मकता के विकास में कुछ चुनौतियों का समाना करना पड़ सकता है, कुछ जोखिम भी उठाने पड़ सकते हैं. आपको इसके लिए तैयार रहना होगा और हर समय इष्टतम को प्राप्त करने की और ही अभिमुख रहना होगा. एक दूसरे का समर्थन अत्यावश्यक है. जोखिम उठाने और बॉक्स के बाहर सोचने के लिए कर्मचारियों को दंडित नहीं – उन्हें गले लगाओ!
दफ्तर में रचनात्मकता को दिलाने के लिए 6 तरीके
कर्मचारियों से रचनात्मकता के लिए मांग, तेजी से तकनीकी उन्नति के इस युग में बढ़ रहा है. हम गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एक रूप में जाना जाता है. कुछ सेटिंग देख यह स्पष्ट है 20 प्रतिशत कार्यक्रम या नीति गूगल डेवलपर्स पक्ष परियोजनाओं पर उनके काम के घंटे के 20 प्रतिशत (काम पर एक दिन) खर्च करने के लिए मिलता है. यह कर्मचारियों को देने का प्रयास किया गया समय – अभिनव सोच के लिए. दरअसल, नीति कार्यक्रम से गूगल (जैसे गूगल न्यूज) उद्भव का सबसे अच्छा उत्पादों में से कुछ के साथ, अच्छी तरह से काम करता है.
आप में से कुछ में रचनात्मकता की सीख को और विकसित किया जा सकता है तो कुछ की तुलना में एक जन्मजात विशेषता हो सकती है. यह तो है, लेकिन एक के बिना भी हो सकता है. अनुकूल माहौल व्यक्त करने के लिए रचनात्मकता के लिए, कैसे हम रचनात्मक कर्मचारियों से उत्पन्न होने वाले विचारों को देखने की उम्मीद कर सकते हैं? यह आपको करने के लिए आपको कार्यस्थल में वे तरीके अपनाने होंगे जो तरीके उन्हें समझाने/दिखाने के लिए पर्याप्त हों.
रचनात्मकता का विज्ञान और अपनी रचनात्मकता को वापस लाने के लिए सुझाव:
1. रचनात्मकता को पुरस्कृत करना
कर्मचारियों को लगता है कि वे अपनी रचनात्मकता के एवज में कुछ प्राप्त करना चाहते हैं तो बाहर आप में से कुछ फार्म के साथ उन्हें प्रेरित करने की जरूरत हा उन्हें पुरस्कृत करने की. इसके अलावा, सुझाव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए कर्मचारियों के कार्यस्थल में सुधार लाने के लिए और अधिक रचनात्मक तरीके के साथ आने की जरूरत हैं. अन्यथा, हर कोई को लगेगा कि यह यह समय की बर्बादी है. बेहतर यही होगा कि आप रचनात्मक रस को निचोड़ कर बाहर निकल उन्हें उपयोग में लायें.
रचनात्मकता शुरू करने के लिए आप कर सकते हैं – लक्ष्य का निर्धारण, निर्धारित कार्य प्रक्रियाओं को और अधिक सुगम बनाने के कुछ तरीके से सोचने के लिए अपने कर्मचारियों के लिए. शायद प्रत्येक कर्मचारी को प्रत्येक सप्ताह के अंत तक में एक सुझाव प्रदान करने का काम सौंपा जा सकता है और आप को जो विचार सबसे अच्छा है, का आकलन करेंगे. एक इनाम प्रोत्साहन के साथ छूटे हुए कर्मचारी भी समान रूप से महत्वपूर्ण है. इनाम हो सकता है मूर्त रूप में लोगों को मौद्रिक प्रोत्साहन, या अमूर्त रूप में लोगों को संगठन से सम्मान के लिए विजेता की घोषणा करके.
2. गुमनामी और गोपनीयता
कई बार ऐसा हो सकता है कि कुछ कर्मचारियों में संकोच का भाव हो या उन्हें ऐसा लगता हो कि उनके विचार का उपयोग कोई दूसरा न कर ले. इसके लिए जरूरी है कि एक हद तक गोपनीयता और गुमनामी का भी सहारा लिए जाय. इसके लिए बहुत ही उपयोगी है सुझाव प्रबंधन समिति का सही तरीके से काम करना और रचनात्मकता को बढ़ावा देना और सही ब्यक्ति को पुरस्कृत करना.
हालांकि, सबसे रचनात्मक विचारों में से कुछ ही बाहर पैदा होते हैं. बुद्धिशीलता सत्र में लोगों के एक समूह चर्चा और एक समस्या के लिए संभव समाधान के बारे में बहस, जहां कर्मचारियों के विचारों का समुचित योगदान को रेखांकित किया जा सकता है. इसके अलावा, प्रभावी विचारों को महत्व प्रदान कर उन लोगों की पहचान हो और तदनुसार उन्हें प्रतिष्ठित किया जाय.
3. टीमों का नवाचार
कार्यस्थल में रचनात्मकता को बढ़ावा देने का एक और अधिक व्यवस्थित तरीके से टीमों का नवाचार स्थापित करने के लिए है. प्रत्येक नवाचार टीम होगी विचारों के साथ आने के लिए काम सौंपा एक विशेष पहलू का काम प्रक्रिया में सुधार करने के बारे में. समय सीमा के अन्दर टीमों को अपने विचारों को प्रस्तुत करने और वे अगर बहुत ही अच्छे हैं, तो पुरस्कृत करने की सुनिश्चितता भी निर्धारित की जानी चाहिए.
4. रचनात्मकता का समर्थन
हो सदाकत है कि कोई संगठन/संस्था कर्मचारी की रचनात्मकता के जोखिम लेने को तैयार नहीं हो, ऐसे समय में संगठन को मार्गदर्शन करने की जरूरत है, और रचनात्मकता को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताते हुए इस के साथ बहुत कुछ करना है. आप अपने विचारों को कितने ग्रहणशील बना पाते हैं और आप कैसे एक और अधिक रचनात्मक कंपनी होने का अपना इरादा जाहिर कर सकते हैं.
5. विविधता
हर कोई एक समान तरीके से सोचता है कि कैसे विभिन्न विचारों का आदान प्रदान कर सकते हैं? तुलनीय पृष्ठभूमि, योग्यता, अनुभव आदि का साथ कर्मचारियों को सजातीय काम का माहौल एक बनाता है. शायद कर्मचारियों के बीच इस तरह की एकरूपता टीम से सम्बंधित है और इस तरह की सुविधा है, लेकिन यह कार्यस्थल पर रचनात्मकता की बात आती है, तो एक समान और सहमत समूह विचारों को पनपने के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता है.
6. सकारात्मक और उत्साह वर्धक परिवेश
कभी कभी, गंभीरता भी एक मानसिक रचनात्मकता में बाधा कर सकते हैं. काम के दौरान आनंद मना रहे एक कर्मचारी को आराम करने की अनुमति देता है और एक अद्भुत विचारों से प्रेरित हो जाता है कि कहने की जरूरत नहीं, एक तनावपूर्ण या भी निराशाजनक कामकाज के माहौल को एक अलग तरह से बातें कर रहे हैं, के बारे में सोचना मूड देना नहीं है. कर्मचारी केवल दिन के अंत करने के लिए तत्पर होगा.
मनोवैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि सकारात्मक मूड रचनात्मकता को प्रोत्साहित कर सकते हैं . विचार यह है कि सोच में अधिक से अधिक लचीलेपन के साथ सकारात्मक मूड हमारे दृष्टिकोण को व्यापक और विस्तारित कर रहे हैं . हम और अधिक खुले दिमाग की अवस्था में और भी ज्यादा करने को तैयार हैं. सारांश यह की अगर माहौल सुरुचिपूर्ण हो तो विकल्प तलाशने में हम ज्यादा सक्षम हो सकते हैं. अब इस तरह के निष्कर्ष जानने के बाद काम में मज़ा शामिल कर हर बार टीम संबंधित गतिविधियों को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है.
अंत में यही कहना चाहूँगा कि आज सभी प्रकार की ब्याव्सयिक संस्थाएं भी अपने कर्मचारियों के महत्व को समझ रही है और उनके योगदान को पूरी तत्परता से लेने के लिए तैयार भी है. परिस्थितियां बदली है. अब मालिक मजदूर का वातावरण नहीं है बल्कि सभी मजदूर यानी कर्मचारी ब्यावसायिक संस्थान के सक्रिय सदस्य हैं. और उनकी सहभागिता को जितना व्यापक और मजबूत बनाया जायेगा संस्थान को उतना ही फायदा होगा.
पिछले दिनों ब्यावसायिक मंदी के माहौल में कर्मचारियों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. काफी संस्थान ऐसे हैं जो कर्मचारियों और प्रबंधन के मजबूत बंधन में बंधकर संस्थान को आगे और आगे बढ़ाते जा रहे हैं. जो इस बात को नहीं समझते वे इस भयंकर प्रतियोगिता और उथल पुथल के माहौल में पिछड़ जाते हैं इसीलिए हमारे नए प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते है सबका साथ सबका विकास!

प्रस्तुति – जवाहर लाल सिंह,

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 25, 2015

सिंह साहब बहुत ही उपयोगी लेख, नई जानकारियां जिन्हें आपने बडे श्र्म से जुटाई हैं । विकास की दौड मे कर्मचारियों की भूमिका और उनके रचनात्मक उपयोग तथा सकारात्मक परिणाम पाने के लिए जो उपाय किये जाने चाहिए उस पर आपने काफी विस्तार से अच्छा लिखा है । अक्सर ऐसे विषयों पर कम पढने को मिलता है । आपका यह प्रयास सराहनीय है ।

    jlsingh के द्वारा
    August 26, 2015

    आदरणीय एस एल बिष्ट साहब, सादर अभिवादन! आलेख को पूरा पढने और सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका हार्दिक आभार!

s.p. singh के द्वारा
August 24, 2015

सिंह साहेब विस्तृत लेख पर बधाई ! विषय वास्तु और व्यापक सोंच ।। लेकिन बात मै अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि भारत में कार्यरत। विदेसी कंपनियों को छोड़ कर देसी कंपनी वर्कर का । जितना शोषण करती है वो याद दिलाता है अफ्रीका में होने वाले शोषण की .। करोडो रुपये का व्यापार करने वाली भारतीय कंपनिया अपने खर्च १० प्रतिशत भी वर्कर पर खर्च नहीं करती ?

    jlsingh के द्वारा
    August 25, 2015

    आदरणीय एस पी सिंह साहब, सादर अभिवादन! आप बिलकुल सही कह रहे हैं, लेकिन चयन के बारे में जितना मैंने सुना है वहां और भी काम वेतन मिलता है और मजदूर फिर भी मन लगाकर काम करते हैं. उसके बावजूद भी चयन की मौजूदा स्थिति से आप भी वाकिफ होंगे ही. तात्पर्य यही है कि मजदूर/कर्मचारी/श्रमिक वर्ग किसी भी संस्था के लिए रीढ़ हैं. पर दिमाग तो प्रबंधन के पास ही रहता है और वह अपना नफा-नुक्सान और पुनर्निवेश, सरकार और समाज के साथ तालमेल में भी तो खर्च करता है. अगर ये उद्योगपति न हों तो देश की अर्थ ब्यवस्था का का क्या होगा आप और हम समझ सकते हैं. अधिकांश जनता कर्म करती है और कुछ लोग उनके ही कर्म का लाभ लेकर उनपर शासन करती है. …और ज्यादा के लिखें आप हमसे बेहतर समझते हैं. सादर!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 22, 2015

बहुत उत्कृष्ट आलेख आदरणीय जवाहर सिंह जी,आज हर संसथान को ये सब वातें जानना चाहिए ,और ब्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठ कर सोचना चाहिए ,आपने सही लिखा है कि कर्मचारियों की रचनात्मकता ,उत्साहवर्धन और रेक्रिईशन पर ध्यान देना चाहिए .सटीक सुझाव .सादर.

    jlsingh के द्वारा
    August 22, 2015

    आलेख को पढने और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक आभार आदरणीया निर्मल जी, साथ ही आपको साप्ताहिक सम्मान के लिए भी बधाई ! आपकी कविताएँ उच्च स्तर की होती है …कृपय मंच अपर अपनी उपस्थिति बनाये रक्खें!

Shobha के द्वारा
August 21, 2015

जवाहर जी बहुत अच्छा लेख देखा जाये तो पूरा लेख मैनेजमेंट पर आधारित हैं अंत मैं आपके लेख का सार “ज सभी प्रकार की ब्याव्सयिक संस्थाएं भी अपने कर्मचारियों के महत्व को समझ रही है और उनके योगदान को पूरी तत्परता से लेने के लिए तैयार भी है. परिस्थितियां बदली है. अब मालिक मजदूर का वातावरण नहीं है बल्कि सभी मजदूर यानी कर्मचारी ब्यावसायिक संस्थान के सक्रिय सदस्य हैं. और उनकी सहभागिता को जितना व्यापक और मजबूत बनाया जायेगा संस्थान को उतना ही फायदा होगा. पिछले दिनों ब्यावसायिक मंदी के माहौल में कर्मचारियों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता.” इसी से मंदी से निपटा जा सकता है | मैं फिर से लिखती हूँ बहुत अच्छा लेख

    jlsingh के द्वारा
    August 22, 2015

    आदरणीया शोभा जी यह आलेख पिछले साल का ही जो, मैंने INSSAN Indian Nation Suggestion Schemes’ Assocition, Northern India Chapter, New Delhi के लिए लिखा था. इस पर मुझे पुरस्कृत भी किया गया था.एक कविता भी लिखी थी जिसे मैंने एक मई के अवसर पर यहाँ पोस्ट की थी, उसे भी पुरस्कृत किया गया था. आपकी प्रतिक्रिया पा उपकृत हुआ आपका हार्दिक आभार!


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