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भारत माता की जय बोलो

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भारत माता की जय बोलो
मन की अपनी गांठे खोलो.भारत माता की जय बोलो

जब जब हमने उसे पुकारा,
माँ के जैसा दिया सहारा
हम सब उसके बालक जैसे
धर्म तराजू में मत तोलो. भारत माता की जय बोलो
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई
आपस में सब भाई भाई
माता सबको आश्रय देती
खाना देती मुख तो खोलो. भारत माता की जय बोलो

मेरे देश के प्यारों आओ
भारत माता की जय बोलो.
भारत माता ग्राम वासिनी
कवियों ने बतलाया है
सस्य श्यामला पुलकित यामिनी
सबको यह समझाया है
सदियों से यह खिला रही है
घर आँगन के पट तो खोलो, भारत माता की जय बोलो

इसने जन्म दिया, ऋषियों को
वीरों की यह धरती है
चाहे जख्म इसे दो जितना
पेट सभी का भरती है
जर्जर होकर तुझे जगाती
मत सोओ अब ऑंखें खोलो, भारत माता की जय बोलो
सियाचीन की सीमा पर
वीर सिपाही घायल होते
कभी कभी थक सो जाते वे
दुघ्ध धवल माँ आँचल पाते
रहें सुरक्षित हर पल हम सब
अपने ही घर आँगन में
टी वी पर प्रोग्राम देखते
लगते जो मन भावन है
कठिन समय में उठकर देखो
अपने मुख को जोर से खोलो, भारत माता की जय बोलो

कुछ लोगों को दिक्कत होगी
मन में उनको सिद्दत होगी
मांझी नाव चलाता जाता
लहरों में बलखाता जाता
अपनी धरती सबको प्यारी,
फूलों से सजती है क्यारी
रंग बिरंगे फूल खिले हैं
मुक्त हवा में सभी हिले हैं
माँ का आँचल सबको प्यारा
बेटे को दे सदा सहारा
माँ तो बस वो माँ होती है
गीले बिस्तर पर सोती है
उस माँ के भी गले मिलो जी
प्रेम के मीठे बोली बोलो भारत माता की जय बोलो

राम रहीम खुदा के बन्दे
क्यों हो जाते हम सब अंधे
शांति मार्ग ही सभी बताते
वही मार्ग जो जन्नत जाते
बैर भाव न पालो मन में
दया धर्म से सबको तोलो, भारत माता की जय बोलो

अब एक साथ
लेना हो गर बैंक से ऋण तो भारत माता की जय बोलो
नहीं चुकाने हो जब ऋण तो भारत माता की जय बोलो
करना हो नुक्सान किसी का भारत माता की जय बोलो
नारा नूतन देश भक्ति का भारत माता की जय बोलो
अगर पड़ोसी आँख दिखाए भारत माता की जय बोलो
अगर विरोधी मन न भाए भारत माता की जय बोलो
रण में कभी न पीठ दिखाएँ भारत माता की जय बोलो
वादा गर जो निभ न पाये भारत माता की जय बोलो
सपने में भी डर आ जाए भारत माता की जय बोलो
भारत माता की जय बोलो भारत माता की जय बोलो

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Dubey के द्वारा
March 30, 2016

मैंने शोभा जी के पोस्ट पर टिपण्णी की है, उसी को पुनः लिख रहा हूँ.-”देश प्रेम और भारत माता की जय बोलना दोनों दो बात है. हम लोग थोड़ा सा नजर और दिल से देश को देखे समझे तो हमलोगों को भी दिख जायेगा कि भारत माता की जय बोलने वाले बहुत से लोगों का आचरण भारत माता के विचारों के विरुद्ध है, और भारत माता की जय नहीं बोलने वाले भारत माता के साथ है. मुझे कबीर दास की पक्तियां याद आती है- “मन ना रंगाए, रंगाए जोगी कपड़ा”. मन की रंगाई की जरूरत है, कपड़े की नहीं.” कविता बिलकुल समयानुकूल है. बधाई.

    jlsingh के द्वारा
    March 31, 2016

    आदरणीय हरिश्चन्द्र साहब, आपसे ‘सलाम’ लेकर… भला इतना बड़ा ऋण कैसे चुका पाऊंगा, बिना उऋण हुए ही पधार जाऊंगा सर जी! आपकी पैनी परख और व्यंग्यात्मक पांडित्यपूर्ण लेखन का मैं ही नहीं अनेकों लोग प्रशंशक हैं. मैं तो जुगनू समान अँधेरे में ही दिख जाता हूँ. आपके हौसलाआफजाई से लिखने को प्रेरित होता हूँ … आपको शत शत नमन!

    jlsingh के द्वारा
    March 31, 2016

    आदरणीय राजेश दुबे जी, सादर अभिवादन! आपकी राय का मैं स्वागत करता हूँ. मेरी आखिरी कुछ पंक्तियों में एक साथ जो कुछ कहा गया है वह व्यग्य्त्मक शैली में आपकी बात का समर्थन करता है. आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार!

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 29, 2016

जवाहर तुझे सलाम ,,,,लेना हो गर बैंक से ऋण तो भारत माता की जय बोलो नहीं चुकाने हो जब ऋण तो भारत माता की जय बोलो करना हो नुक्सान किसी का भारत माता की जय बोलो नारा नूतन देश भक्ति का भारत माता की जय बोलो अगर पड़ोसी आँख दिखाए भारत माता की जय बोलो अगर विरोधी मन न भाए भारत माता की जय बोलो,,ओम शांति शांति  रण में कभी न पीठ दिखाएँ भारत माता की जय बोलो वादा गर जो निभ न पाये भारत माता की जय बोलो सपने में भी डर आ जाए भारत माता की जय बोलो भारत माता की जय बोलो भारत माता की जय बोलो

    jlsingh के द्वारा
    March 31, 2016

    आदरणीय हरिश्चन्द्र साहब, आपसे ‘सलाम’ लेकर… भला इतना बड़ा ऋण कैसे चूका पाऊंगा, बिना उऋण हुए ही पधर जाऊंगा सर जी! आपकी पैनी परख और व्यंग्यात्मक पांडित्यपूर्ण लेखन का मैं ही नहीं अनेकों लोग प्रशंशक हैं. मैं तो जुगनू समान अँधेरे में ही दिख जाता हूँ. आपका हौसलाआफजाई से लिखने को प्रेरित होता हूँ … आपको शत शत नमन!

Jitendra Mathur के द्वारा
March 29, 2016

बहुत खूब जवाहर जी ! आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । गद्य हो या पद्य, आपकी लेखनी की चमक और धार कभी मंद नहीं पड़ती । इस बहुआयामी और अत्यंत श्रेष्ठ कविता पर मैं क्या प्रतिक्रिया दूं ? इसकी प्रशंसा के लिए तो मुझे अपना शब्द-भंडार ही अल्प प्रतीत हो रहा है ।

    jlsingh के द्वारा
    March 31, 2016

    आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी, सादर अभिवादन! आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पढ़कर मैं फूला नहीं समां रहा हूँ. आप जैसे मित्र पाकर मैं अपने आपको धन्य समझता हूँ. आपका हार्दिक आभार!

pkdubey के द्वारा
March 26, 2016

आदरणीय जन्म देने वाली माँ २-४ वर्ष ही स्तन पान कराती है ,पर धरती माता आजीवन पेट भरती है ,सारे जीव इसी से बने इसी में विलीन हो जायेंगे | मैंने किसी धार्मिक पुस्तक में पढ़ा -मनुष्य “जय” ही बोल सकता है ,इससे अधिक कुछ कर भी नहीं सकता ,जय बोलने से ही मुक्ति संभव है ,प्रकृति और परमात्मा का इतना अहसान ,कृपा ,करुणा कुछ भी कह लो ,मानव के ऊपर है ,जिसे वह कभी उत्तर नहीं सकता |

    jlsingh के द्वारा
    March 30, 2016

    आदरणीय दुबे जी, मेरा यही कहना है कि आवाज अन्दर से निकालनी चाहिए न कि ऊपर ऊपर! अपने कर्तव्यों का पालन भी देश भक्ति है. नारा तो क्षणिक उत्साह बदहने के लिए है. अब तो भगवत जी ने भी कह दिया है कि जबर्दश्ती नहीं करनी है किसी के साथ. वे भी कब क्या बोलेंगे और कब पलट जायेंगे कहाँ मुश्किल है. हम सब अपना आप खो देते हैं और मरने मारने को उतारू हो जाते हैं. हर कोई अपनी माँ और मातृभूमि से प्यार करता है अपने अपने तरीके से. मैं समझता हूँ आप समझते होंगे. सादर!

Shobha के द्वारा
March 25, 2016

श्री जवाहर जी जितना सुंदर आप लेख लिखते है उतनी ही सुंदर कविता कुछ लोगों को दिक्कत होगी मन में उनको सिद्दत होगी मांझी नाव चलाता जाता लहरों में बलखाता जाता अपनी धरती सबको प्यारी, फूलों से सजती है क्यारी सबको अपनी धरती से लगाव होता है उसे धर्म के तराजू से क्यों तोला जाए भावनात्मक कविता

    jlsingh के द्वारा
    March 30, 2016

    उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीया शोभा जी!

rameshagarwal के द्वारा
March 25, 2016

जय श्री राम जवाहर जी बहुत भावपूर्ण देश प्रेम से ओतप्रोत कविता के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये शर्म आती जब देख की जिस भारत माता जिंदाबाद के नारे लगा कर देशवाशियो ने अपनी जान दे दी आज उसी पर ओवैसी ऐसे लोग विरोध करते और कुछ सेक्युलर ब्रिगेड का लोग समर्थन करने लगते पता नहीं हम लोग कितने नीचे गिर गए और स्वाभीमान कहाँ चला गया.अखीरी १० पंक्तियाँ हमारी समझ से बहार सुन्दर कविता के लिए साधुवाद.

    jlsingh के द्वारा
    March 30, 2016

    आदरणीय श्री रमेश अग्रवाल साहब, जय श्री राम. आपकी प्रथम प्रतिक्रिया में रा हौसला बढ़ाती है. मेरा तात्पर्य यही है कि भारत भूमि हमरी माता है, हम सब उनके बच्चे /लाल है. हमें अपनी माँ का सम्मान करना ही चाहिए साथ ही हमें अपने कर्तव्य पालन का भी ध्यान रखना चाहिए. भारत माता की जय बोल देने से हमारे अपराध कम नहीं होते. अंतिम दस पंक्तियों में व्यंग्यात्मक शैली में मैंने यही कहने की कोशिश की है. उम्मीद है आप मेरा आशय समझ गए होंगे. सादर!


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