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‘जय श्रीराम’ से ‘भारत माता की जय’ तक

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‘जय श्रीराम’ से ‘भारत माता की जय’ तक
भारतीय जनता पार्टी का मूल श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा १९५१ में निर्मित भारतीय जनसंघ है। १९७७ में आपातकाल की समाप्ति के बाद जनता पार्टी के निर्माण हेतु जनसंघ का अन्य दलों के साथ विलय हो गया। इससे १९७७ में पदस्थ कांग्रेस पार्टी को आम चुनावों में हराना सम्भव हुआ। तीन वर्षों तक सरकार चलाने के बाद १९८० में जनता पार्टी विघटित हो गई और पूर्व जनसंघ के पदचिह्नों को पुनर्संयोजित करते हुये भारतीय जनता पार्टी का निर्माण किया गया। यद्यपि शुरुआत में पार्टी असफल रही और १९८४ के आम चुनावों में केवल दो लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही। इसके बाद राम जन्मभूमि आंदोलन ने पार्टी को ताकत दी। कुछ राज्यों में चुनाव जीतते हुये और राष्ट्रीय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करते हुये १९९६ में पार्टी भारतीय संसद में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। इसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जो मात्र १३ दिन ही चली।
१९९८ में आम चुनावों के बाद भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का निर्माण हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी जो एक वर्ष तक चली। इसके बाद आम-चुनावों में राजग को पुनः पूर्ण बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार ने अपना कार्यकाल पूर्ण किया। इस प्रकार पूर्ण कार्यकाल करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी। २००४ के आम चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और अगले १० वर्षों तक भाजपा ने संसद में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाई। २०१४ के आम चुनावों में राजग को गुजरात के लम्बे समय से चले आ रहे मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारी जीत मिली और २०१४ में सरकार बनायी। इसके अलावा जुलाई २०१४ से पार्टी पांच राज्यों में सता में है।
भाजपा की कथित विचारधारा “एकात्म मानववाद” सर्वप्रथम १९६५ में दीनदयाल उपाध्याय ने दी थी। पार्टी हिन्दुत्व के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त करती है और नीतियाँ ऐतिहासिक रूप से हिन्दू राष्ट्रवाद की पक्षधर रही हैं। पार्टी सामाजिक रूढ़िवाद की समर्थक है और इसकी विदेश नीति राष्ट्रवादी सिद्धांतों पर केन्द्रित हैं। जम्मू और कश्मीर के लिए विशेष संवैधानिक दर्जा ख़त्म करना, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करना तथा सभी भारतीयों के लिए समान नागरिकता कानून का कार्यान्वयन करना भाजपा के मुख्य मुद्दे हैं। हालांकि १९९८-२००४ की राजग सरकार ने किसी भी विवादास्पद मुद्दे को नहीं छुआ और इसके स्थान पर वैश्वीकरण पर आधारित आर्थिक नीतियों तथा सामाजिक कल्याणकारी आर्थिक वृद्धि पर केन्द्रित रही।
इतिहासकार रामचंद्र गुहा के अनुसार जनता सरकार के भीतर गुटीय युद्धों के बावजूद, इसके कार्यकाल में आर॰एस॰एस॰ के प्रभाव को बढ़ते हुये देखा गया, जिसे १९८० पूर्वार्द्ध की सांप्रदायिक हिंसा की एक लहर द्वारा चिह्नित किया जाता है। इस समर्थन के बावजूद, भाजपा ने शुरूआत में अपने पूर्ववर्ती हिन्दू राष्ट्रवाद का रुख किया इसका व्यापक प्रसार किया। उनकी यह रणनीति असफल रही और १९८४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केवल दो लोकसभा सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनावों से कुछ समय पहले ही इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस रिकोर्ड सीटों के साथ जीत गई।
वाजपेयी के नेतृत्व वाली उदारवादी रणनीति अभियान के असफल होने के बाद पार्टी ने हिन्दुत्व और हिन्दू कट्टरवाद का पूर्ण कट्टरता के साथ पालन करने का निर्णय लिया। १९८४ में आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया गया और उनके नेतृत्व में भाजपा राम जन्मभूमि आंदोलन की राजनीतिक आवाज़ बनी।तब भाजपा का मुख्य नारा था जय श्रीराम. १९८० के दशक के पूर्वार्द्ध में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के स्थान पर हिन्दू देवता राम का मन्दिर निर्माण के उद्देश्य से एक अभियान की शुरूआत की थी। आंदोलन का आधार यह था कि यह क्षेत्र राम की जन्मभूमि है और यहाँ पर मस्जिद निर्माण के उद्देश्य से बाबर ने मन्दिर को ध्वस्त करवाया। भाजपा ने इस अभियान का समर्थन आरम्भ कर दिया और इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया। आंदोलन की ताकत के साथ भाजपा ने १९८९ के लोक सभा चुनावों में ८६ सीटें प्राप्त की और समान विचारधारा वाली नेशनल फ़्रॉण्ट की विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार का महत्वपूर्ण समर्थन किया।
सितम्बर १९९० में आडवाणी ने राम मंदिर आंदोलन के समर्थन में अयोध्या के लिए “रथ यात्रा” आरम्भ की। यात्रा के कारण होने वाले दंगो के कारण बिहार सरकार ने आडवाणी को गिरफ़तार कर लिया लेकिन ६ दिसम्बर १९९२ को कार सेवक और संघ परिवार कार्यकर्ता फिर भी अयोध्या पहुँच गये और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए हमला कर दिया। इसके परिणामस्वरूप अर्द्धसैनिक बलों के साथ घमासान लड़ाई हुई जिसमें कई कार सेवक मारे गये। तभी भाजपा ने विश्वनाथ प्रतापसिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया और एक नये चुनाव के लिए तैयार हो गई। इन चुनावों में भाजपा ने अपनी शक्ति को और बढ़ाया और १२० सीटों पर विजय प्राप्त की तथा उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
इसके कई सप्ताह बाद देशभर में हिन्दू एवं मुस्लिमों में हिंसा भड़क उठी जिसमें २,००० से अधिक लोग मारे गये। २७ फ़रवरी २००२ को हिन्दू तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक रेलगाडी को गोधरा कस्बे के बाहर आग लगा दी गयी जिसमें ५९ लोग मारे गये। इस घटना को हिन्दुओं पर हमले के रूप में देखा गया और इसने गुजरात राज्य में भारी मात्रा में मुस्लिम-विरोधी हिंसा को जन्म दिया जो कई सप्ताह तक चली। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य सरकार के उच्च-पदस्थ अधिकारियों पर हिंसा आरम्भ करने और इसे जारी रखने के आरोप लगे। अप्रैल २००९ में सर्वोच्य न्यायालय ने गुजरात दंगे मामले की जाँच करने और उसमें तेजी लाने के लिए एक विशेष जाँच दल (एस॰आई॰टी॰) घटित किया। सन् २०१२ में एस॰आई॰टी॰ ने मोदी को दंगों में संलिप्तता के आरोप से मुक्त कर दिया।
वाजपेयी जी ने २००४ में राजग का अभियान “इंडिया शाइनिंग” (उदय भारत) के नारे के साथ शुरू कराया जिसमें राजग सरकार को देश में तेजी से आर्थिक बदलाव का श्रेय दिया गया। पर, राजग को अप्रत्यासित हार का समाना करना पड़ा और लोकसभा में कांग्रेस के गठबंधन के २२२ सीटों के सामने केवल १८६ सीटों पर ही जीत मिली।
२०१४ के आम चुनावों में भाजपा ने २८२ सीटों पर जीत प्राप्त की और मोदी जी के नेतृत्व वाले राजग को ५४३ लोकसभा सीटों में से ३३६ सीटों पर जीत प्राप्त हुई। यह १९८४ के बाद पहली बार था कि भारतीय संसद में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला। भाजपा संसदीय दल के नेता नरेन्द्र मोदी को २६ मई २०१४ को भारत के १५वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गयी। मोदी जी का विजय रथ पहले दिल्ली औरे बाद में बिहार में रुक गया। हिंदुत्व के रथ पर सवार भाजपा को सवर्णों और ब्यापारियों (बनियों) की पार्टी कहा जाने लगा। बीच बीच में आर एस एस प्रमुख भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात उठाकर दलितों और पिछड़ों के मन में शंका के बीज बो दिए, जिसे मोदी विभिन्न मंचों से खंडित करते रहे और जब भी मौका मिला अम्बेडकर, जगजीवन राम, भक्त रविदास आदि के गुण गाने रहे। पर इससे भी शायद संतुष्टि नहीं हुई और कई राज्यों में जाति आधारित क्षेत्रीय पार्टियों से निपटने के लिए आगामी विधान सभाओं के चुनावों को देखते हुए अभी से ही पांच राज्यों के नए अध्यक्ष नियुक्त कर दिए जो या तो पिछड़ी या दलित जाति से आते हैं। यानी कि अब भाजपा के रणनीतिकारों की नजर भी दलित-पिछड़ों के जातिगत आधारित वोट बैंक पर पडी है। सबका साथ और सबका विकास कहते हुए मुसलमानों की सभाओं में जाते हुए और अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाते हुए मुस्लिमों के एक वर्ग तक पहुँचने की भी भरपूर कोशिश भी जारी है। कभी कभी कुछ राष्ट्रवादी नारों ‘भारत माता की जय’ और वन्दे मातरम के माध्यम से हिन्दुओं और राष्ट्वादियों को जोड़े रखने की कवायद भी जारी रही है।
उत्तर प्रदेश की आम जनता मे एक अन्जाना सा नाम केशव मौर्य जी को पूरे प्रदेश भाजपा की बाग़डोर सौप दी गयी, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे वह किसान रहे है और चाय अखबार भी बेचते रहे है। नेता बनने के बाद कई करोड़ की संपत्ती के मालिक भी हो चुकें है। केशव मौर्य फूलपुर इलाहाबाद से सांसद है, उसकें पहले वह विधायक भी रह चुके है। उसी तरह पंजाब में विजय सांपला, कर्णाटक में बी एस यदुरप्पा, तेलंगाना में के लक्ष्मण और अरुणाचल प्रदेश में तापिर गाव को कमान सौप दी है। दिक्कत इस बात की है कि देश के बड़े दलो मे इतना आत्म विश्वास नही कि इनको 50% से ज्यादा वोट कौन देगा ?
इसे जातिवाद से जोड़कर देखना अन्याय होगा, भाजपा तो जातिवाद में नहीं, राष्ट्रवाद में बिश्वास रखती है, मैंने कुछ गलत नहीं कहा न! मोदी जी तो विकास के रथ पर आरूढ़ हैं। वे भारत को आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध, विश्व के प्रमुख राष्ट्रों में शामिल करते हुए विश्वगुरु भारत की तरफ बढ़ना चाहते हैं। नास्त्रेदम की भविष्यवाणी भी तो यही कहती है। जय श्री राम (श्री रामनवमी के शुभ अवसर पर), भारत माता की जय ! जय हिन्द!

- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर।

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
April 19, 2016

आदरणीय सिंह साहब बहुत विस्तार से अच्छा लिखा है आपने -जय श्रीराम से भारत माता की जय तक । कोई संदेह नही भारत एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप मे विश्व पटल पर उभर कर सामने आयेगा । बस जरूरत है थोडा संयम रखने की ।

    jlsingh के द्वारा
    April 20, 2016

    उत्साह वर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय बिष्ट साहब.

    jlsingh के द्वारा
    April 20, 2016

    हम लोग सभी आशावादी हैं, और भारत को शक्ति संपन्न ही देखना चाहते हैं. उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय बिष्ट साहब!

rameshagarwal के द्वारा
April 17, 2016

जय श्री राम जवाहर लालजी ममता कहती उन्हें किसी का दर नहीं चुनाव आयोग छाए जितने नोटिस भेजे हम बार  बार यही करेंगे यानी आचार संहिता तोडेगे क्या यही लोकतंत्र है नितीश कहते आरएसएस के खिलाफ सब एकजुट हो लगता है उन्हें आतंकवादियो को लेने में भी नहीं परहेज इन विधान सभा के चुना में आसाम में ही बीजेपी सरकार बना सकती बाकी जगह अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद आज कल के नेता उलटे सीधे व्यान देते रहते देश की चिंता कम हर एक प्रधान मंत्री का सपना देख रहा आपने लेख में बहुत अच्छी बाते खुल कर रक्खी आपकी लेखनी की बारीखता से पढ़ कर मज़ा आ जाता आप ऐसे लिखते रहे  हम लोग  पढ़ते रहे राम नवमी की शुभकामनाओ के साथ भगवन रामजी राष्ट्र  को अपना  आशीर्वाद  प्रदान करे.

    jlsingh के द्वारा
    April 18, 2016

    आदरणीय अगरवाल साहब, जय श्रीराम! ममता कभी किसी से नहीं डरी हैं. ज्योति बसु ने उन्हें पुलिस से बहुत पिटवाया था, फिर भी वह लाठी खाकर भी लड़ती रहीं और एक दिन माकपा (बामपंथियों) के गढ़ को उखड फेंका. चुनाव आयोग अपनी ड्यूटी निभाने में स्वतंत्र है कानून का डंडा चुनाव आयोग के पास है. उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी ममता ही सरकार बनाएंगी पर जीतने काम पाएंगी. भाजपा हर जगह फायदे में रहेगी. नीतीश कुमार आत्म मुग्ध हैं,पर अभी राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बननी बाकी है. वैसे बिहार में उन्होंने जो काम किया है वह धरातल पर दिखता है. जनता ने ऐसे ही तीसरी बार उन्हें नहीं चुना है. जमशेदपुर में रामनवमी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, पर हजारीबाग, बोकारो में थोड़ी बहुत अशांति हुई है. कुछ खुरापाती लोग ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं. आपका हार्दिक आभार और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं! जय श्री राम!

rameshagarwal के द्वारा
April 16, 2016

जय श्री राम जवाहर लाल जी इस सार्थक,विस्तृत और तथ्यों से पूर्ण लेख के लिए बढ़ाई सेक्युलर नेता ममता,केजरीवाल,नितीश मोदीजी के लिए जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हताशा दिखती.बीजेपी हिन्दुओ को साम्प्रदायिक कहना गलत यदि बीजेपी सेक्युलर नहीं तो कोइ भी नहीं मोदीजी बहुत अच्छा काम कर रहे लेकिन मीडिया का एक भाग कांग्रेस की चमचागिरी में लगा रहता बिहार में बीजेपी हारी क्या वहां वोट विकास या अन्य मुद्दों पर पड़े नहीं जाती के नाम पर एक अपराधी भ्रष्टाचारी लालू यदि चुनाव जीत जाता ये बिहार के और देश के लिए शुभ नहीं कल हमने १० बार प्रतिक्रिया डालने की कोशिश की नहीं गयी हार गए आज फिर कोशिश कर रहे आपकी लेखनी के तो हम मुफीद है बहुटी आभार और साधुवाद.योग और आंबेडकर जी को संयुक्त राष्ट संघ में शामिल करना देश का बहुत बड़ा सम्मान मोदीजी बधाई के पात्र

    jlsingh के द्वारा
    April 16, 2016

    आदरणीय अग्रवाल साहब, मोदी जी की कार्य शैली और उनकी छवि से जनमानस लगभग संतुष्ट है, पर विरोधी तो विरोध करेंगे ही, मेर तात्पर्य है कि उनके छुटभैये नेता को अंत शांत बयानबाजी से बचने चाहिए. विदेशों में जो छवि भारत की बनी है वह मोदी जी के व्यक्तित्व और कार्यकुशलता, वक्तृत्व कला की देन है. आम जनता/ गरीब जनता को भी नजर आना चाहिए कि काम धरातल पर हो रहा है. जैसे लातूर में पानी पहुँचाना, मोदी जी और सुरेश प्रभु की उपलब्धि कही जाएगी. केरल के कोट्टम में मोदी जी का पहुंचकर मदद पहुँचाना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है, मेरी राय में. विपक्ष क्या बोलता है उसकी चिंता करते रहेंगे तो काम नहीं कर पाएंगे, और मोदी जी चिंता करते भी नहीं हैं. अभी फिलहाल उनको खतरा नहीं है. १९ मई के नतीजे अगर आशानुकूल रहे तो आगे का रास्ता भी साफ़ होगा. थोड़ी बहुत परेशानी हर सरकार को रहती है . उससे चतुराई से पेश आना ही तो राजनीति है. मैं आपकी ही प्रतिक्रया का इंतज़ार कर रहा था, पर जागरण जंक्शन की तकनीकी टीम के कारण आप बार बार असफल हो रहे थे. कहर … जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलहि न कछु संदेहू. आपका बहुत बहुत आभार!

Shobha के द्वारा
April 16, 2016

श्री जवाहर जी जब भी आपकी साईट पर 60,000 Posts 85200 कमेंट्स हो प्रतिक्रिया में ० हो आप समझ जाएँ कितना भी आपके मुरीद प्रतिक्रिया देना चाहें प्रतिक्रिया नहीं जायेगी | इसका अर्थ जागरण के कम्प्यूटर ब्लॉग में कोइ प्रोब्लम हैं यह शनीवार इतवार को ही होता है आप विल्कुल भी दुखी न हों में जब तक एक आदमी भी मेरा लेख पढ़ेगा मैं लिखती रहूंगी |

    jlsingh के द्वारा
    April 20, 2016

    आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आपने नयी जानकारी दी है पर अभी हम लोग उस लक्ष्य से काफी दूर हैं.

Shobha के द्वारा
April 16, 2016

श्री जवाहर जी आपका लेख देश की दलीय राजनीति की कहानी है कुछ बातें तो मैं नहीं जानती थी आजकल कुछ सही नहीं चल रहा लोग प्रतिक्रिया देते हैं जाती नहीं थी मैने भी अपने विचार लिखे थे परन्तु जब देखा आप तक पहुंचे नहीं फिर दुबारा लिखा ज्यादातर हतोत्साहित हो जाते हैं |आप ऐसे ही लिखते रहिये हम सब की यही होबी हैं अपनी बात कहना आप सबकी सुनना बहुत ज्ञानवर्धक लेख भारत की राजनीति का विश्लेष्ण करना मजाक नहीं है |

    jlsingh के द्वारा
    April 16, 2016

    आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आप सही कह रही हैं, जागरण जंक्शन साइट भी काफी देर के बाद खुलता है कभी कभी तो खुलता ही नहीं. तकनीकी विभाग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. आखिर इतना पॉपुलर साइट अगर तकनीकी रूप से समृद्ध न हो तो निराशा होती है. नवभारत टाइम्स इससे आजकल बेहतर लग रहा है. अपने विचार प्रकट करने का ये कुछ साइट हैं जहाँ हम एक दुसरे से रूबरू होते हैं. कुछ नयी जानकारियां भी मिलती हैं. काफी लोग विद्वान हैं, तार्किक हैं. आपकी तो कोई तुलना ही नहीं है. आप समय भी खूब देती हैं. काफी ब्लॉग को आप पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं. प्रतिक्रिया पाकर लेखक का हौसला बढ़ता है और आगे लिखने की इच्छा होती है. बस बहुत बातें लिख गया सादर आभार आपका हौसला अफजाई के लिए!

Shobha के द्वारा
April 15, 2016

श्री जवाहर जी आपका लेख विस्तार से पढ़ा भारतीय जनता पार्टी का पूरा इतिहास था हमारे देश का दुर्भाग्य है देश में कईदल हैं जिन में विचारधारा से अधिक परिवार वाद हैं तमिल नायडू में ही देख लीजिये अन्ना दुरई के दो चेले जय ललिता और करुणानिधि दोनों की एक सी विचार धारा पर दो अलग गढ़ | ऐसे ही समाज वादी कांग्रेस और भाजपा की नीति एक सी है आर्थिक और विदेश नीति लेकिन भाजपा हिंदुत्व की और अधिक झुकी है | ज्यादा तर प्रजातंत्रिक विकसित देशों में तीन दल तीन विचारधारा केवल फ्रांस को छोड़ कर आपने बहुत अच्छा लेख लिखा सोच को दिशा देने वाला लेख |

    jlsingh के द्वारा
    April 15, 2016

    आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आपका समर्थन पाकर संतुष्टि हुई! मुझे लगा, लेख या तो काफी लम्बा या उबाऊ है इसलिए लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं. मैं सप्ताह में एक ही आलेख सामान्यत: पोस्ट करता हूँ. हाँ मैं अन्य सभी ब्लॉगर के सभी पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता हूँ, इसका मतलब समयाभाव है. मैं अपने प्रिय लेखकों, लिखिकओं की सभी रचनाएँ पढ़ना चाहता हूँ. कोशिश करता हूँ. कृपया अन्यथा न लें! सादर!

jlsingh के द्वारा
April 14, 2016

कल राम नवमी का त्यौहार है. राम भक्त और हनुमान भक्त अपने अपने तरीके से भगवन राम और श्री हनुमान जी की आराधना करेंगे. पर एक अनुशासन अवश्य होना चाहिए अन्यथा ऐसे ही हमलोग धार्मिक दुघटनाओं के शिकार होते रहे हैं. अंत: आतिशबाजी से दूर ही रहें, महावीर झंडे का जुलूस में ख़ास सावधानी बरतें ताकि पर्व शांति पूर्ण और उल्लास के वातावरण में संपन्न हो!

jlsingh के द्वारा
April 14, 2016

भारत माता की जय स्वत्: स्फूर्त होना चाहिए और यह बात अंदर से निकलनी चाहिए न कि जबर्दश्ती किसी पर थोपा जाय. इसे उन्माद के रूप में भी नहीं लिया जाना चाहिए यह मेरा अपना मत है और भी कइयों का मत है जितना मैंने पढ़ा सुना है. मोहन भगवत ने भी तो अंत में कह ही दिया किस्से पर जर्दश्ती नहीं थोपा जाय! अभी मुद्दा है विकास, सरवसमंय तक मूलभूत सुविधा को पहुँचाना. अगर लोगों तक सुविधा पहुंचेगी तो प्रचार की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. नहीं?

jlsingh के द्वारा
April 14, 2016

डा. अम्बेडकर को हर कोई अपनाना चाहता है.अपनी स्वार्थ सिद्धि हेतु. भाजपा और मोदी जी दलितों में अपनी छवि दुरुस्त करना चाहते हैं. कांग्रेस भी आजकल जय भीम बोलकर दलितों अपने पास बुलाना चाहती है या कहें की वह भी अपने आपको दलितों का हमदर्द बनने की कोशिश करते दिखलाई पर रहे हैं. कुछ दलित समुदाय अम्बेडकर के नाम पर इकट्ठे होना चाहते हैं और राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. आरक्षण पर भी राजनीति हो रही है. दरअसल होना चाहिए सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया. विद्वतजन अपनी राय रक्खें. सादर!

OM DIKSHIT के द्वारा
April 14, 2016

आदरणीय जवाहर जी,जय श्री राम. सटीक लेख.समयानुसार चाल.अंततः जातिवाद का ही सहारा ,पार्टी कोई भी हो.कभी पटेल,कभी अम्बेडकर,कभी मौर्या,कभी पिछड़ा और कभी जाट….आदि और आदि.न कोई सिद्धांत और न कोई विकास…..भाग्यम फलति सर्वदा,न च विद्या न च पौरुषं..हर शब्द को अपने विचार से नया अर्थ दिया जा सकता है.

    jlsingh के द्वारा
    April 14, 2016

    आदरणीय ओम दीक्षित जी, सादर अभिवादन! आपने मेरे आलेख के मर्म को समझा, छुआ और सूक्ति भी उद्धृत कर डाली. आपका बहुत बहुत आभार! भाग्य और भवितव्य ऐसा है कि उसके आगे सभी लचर हो जाते हैं कभी कभी. गुरु वशिष्ट ने भी कहा था – सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहे मुनिनाथ, हानि लाभ जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ. पर कर्म प्रधान विश्व करी राखा भी तो सही है. मोदी जी और उनकी टीम कार्यरत है …साम दाम दण्ड भेद सब कुछ कर रहे हैं. कहीं पर उनकी युक्ति काम कर जाती हैं और कहीं पर जैसे दिल्ली और बिहार में…. फेल अब देखना है १९ मई का परिणाम!

harirawat के द्वारा
April 12, 2016

प्रिय बेटे जवाहरलाल, खुश रहो ! इतनी सारी जानकारी के लिए मैं सराहना करता हूँ ! देश की किस्मत अच्छी रही की उसे मोदी जैसा देश भक्त, विकास पुरुष मिला, जो सारे देश को साथ लेकर चलना चाहता है, पर सोनिया, राहुल, उनका प्रिय दामाद, नितीशकुमार, लालू, मायावती, ममता, साम्य्वादियों को देश के इस विकास से अपना घर का चूल्हा बुझता नजर आने लगा है इसलिए इनकी नींद भूख मिट गयी है और दिन रात मोदी जी को कोशने में लगे हैं ! मोदी जी की सियत बनी रहे, भारत मात की जय ! हरेंद्र जागते रहो !

    jlsingh के द्वारा
    April 14, 2016

    आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम! आपका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है. लिखने के लिए थोड़ी जानकारी जुटानी पड़ती है, तभी तो आलेख तर्कसंगत कहा जाएगा. मोदी जी की आकांक्षा प्रबल है. वे सचमुच कुछ करना चाहते हैं. कुछ उनके मंत्रीगण भी सही हैं. अभी हाल ही में सुरेश प्रभु की पानी एक्सप्रेस का कदम सराहनीय है. पर कुछ नेता अनर्गल बयानबाजी कर पार्टी को और मोदी जी का ही नुकसान कर जाते हैं मेरी राय में. वैसे यह भाजपा और आरएसएस की अंदर की चाल हो सकती है. मैंने जो समझा वही लिखा है. सादर!


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