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आग को रोकिये ! (संशोधन के साथ पुनर्प्रकाशन)

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images[1]आये दिन ख़बरों में प्रतिदिन कहीं न कहीं आग की घटनाएँ देखने सुनने को मिल जाती है! आज तो शुबह ही चार पांच जगहों से भयंकर आग लगने की खबर सूनी/देखी. आग बुझाने के लिए दर्जनों दमकल आग बुझाने के लिए जाते हैं. फिर भी काफी जान माल की क्षति हो जाती है. भयंकर पानी की कमी से जूझते सरकार और जनता का पानी आग बुझाने में ही बेकार हो जाते हैं. कहीं कहीं पर पानी की कमी के चलते आग बुझाने में काफी देर हो जाती है, अंत: हम सब की जिम्मेवारी बंटी है कि आग न लगे उसके लिए सावधानी बरतें. आग लगने पर तुरंत उपलब्ध संसाधनों से बिझाने का हर सम्भव प्रयास करें बिजली के कारन लगी आग पर पानी डालने से पहले सुनिश्चित करें कि बिजली काट दी गयी है या बिजली के लिए उपयुक्त अग्निशमन यंत्र का प्रयोग करें. कारखाने जहाँ उच्च तापक्रम और ज्वलशील पदार्थों का वातावरण रहता है, आग लगने की संभावना बनी रहती है.
आग लगने के मुख्य कारणों पर अगर गौर किया जाय तो मूल रूप से इसके तीन करक हैं ओर तीनो को मिलाकर ही प्रतिफल प्राप्त होता है . यथा ताप, ज्वलनशील पदार्थ और ऑक्सीजन = आग . इन तीनो में से किसी भी एक हटा दिया जाय तो आग लगने की संभावना न के बराबर होगी. ताप किसी भी कारणों से पैदा हो सकती है जैसे गर्मी के दिनों में वातवरण का तापक्रम ऐसे ही ज्यादा रहता है. एक छोटी सी चिंगारी चाहे जैसे भी पैदा की गयी हो, अगर वहाँ ज्वलनशील पदार्थ और हवा यानी ऑक्सीजन है, तो आग लगने की संभावना प्रबल हो जाती है.
270px-Fire_tetrahedron.svg[1]
ज्यादातर मामलों में यह सुना जाता है कि विद्युतीय शोर्ट सर्किट से आग लग गयी. आइये अब यह समझने की कोशिश करें की विद्युतीय शोर्ट सर्किट होता क्या है और यह उत्पन्न कैसे होता है ?
ओम का नियम हम सबने पढ़ा है उसके अनुसार विद्युतीय धारा (कर्रेंट) = विभवांतर (वोल्टेज)/अवरोध (रेजिस्टेंस)
विद्युतीय ताप उत्पन्न = (धारा)२ × अवरोध × समय ( करेंट२ × रेजिस्टेंस × टाइम )
शोर्ट सर्किट (लघु परिपथ) का मतलब होता है न्यूनतम अवरोध और अधिकतम धारा (करेंट).  अधिकतम धारा का वर्ग यानी बहुत ज्यादा ताप- बहुत ज्यादा ताप मतलब, ज्यादा तापक्रम और ज्यादा तापक्रम, मतलब अग्नि का प्रज्वलन- कोई ज्वलनशील पदार्थ जैसे रबर, प्लास्टिक कागज , कपड़ा, लकड़ी आदि कुछ भी हो हवा हर जगह मौजूद ही रहती है- आग लगेगी. आग लगेगी तो आसपास जितने भी ज्वलनशील पदार्थ होंगे सबको चपेट में ले लेगी. आग लगने से आसपास की हवा गर्म होकर ऊपर धुंए के साथ निकल जायेगी तो खाली जगह भरने के लिए चारोतरफ की हवा दौड़ पड़ेगी फलस्वरूप आग को जलने फ़ैलने में मदद ही मिलेगी. धीरे धीरे यही आग भयंकर रूप धारण कर लेती है, जिससे जान माल की भारी क्षति होती है. हम सभी जानते हैं कि बिजली के दो नग्न तार अगर आपस में किसी कारण वश टकड़ा गए तो चिंगारी (स्पार्क) निकलेगी और आग लगने की संभावना बढ़ेगी.
आग शुरुआत में बहुत छोटी होती है, अगर उसे तत्काल बुझाने का प्रयास किया जाय तो जल्दी बुझ भी जायेगी. इसीलिए आजकल महत्वपूर्ण स्थानों पर अग्निशमन यंत्र रखने की ब्यवस्था होती है. बिजली के उपकरण में लगी आग हो तो कभी भी पानी से न बुझायें, नहीं तो आपको विद्युत झटका लगेगा और आप उसके प्रभाव में आ जायेंगे. उसके लिए कार्बन डाइऑक्साइड युक्त उपकरण का प्रयोग करें. अगर पता है तो मुख्य स्विच को ऑफ कर दें. हमेशा ही सही क्षमता वाले उपकरण का प्रयोग करें. तारों के जोड़ को इन्सुलेटेड टेप से ‘कवर’ करें कहीं भी विद्युत उपकरण को खुला न छोड़े या उससे बिना जानकारी के छेड़ छाड़ न करें. अगर कोई भी उपकरण तार आदि बहुत पुराने हो गए हैं या उनमे कुछ गडबडी है तो फ़ौरन बदल दें या बिजली मिस्त्री से दिखला दे.
इसके अलावा माचिस की तीली, सिगरेट आदि को पूरी तरह बुझाकर ही फेंके. गैस सिलिंडर को अच्छी तरह बंद रक्खें. जरा भी गंध होने से गैस सिलिंडर को खुली हवा में रख दें और अगर संभव है तो ग्राहक सेवा केन्द्र को सूचित करें .
अग्निशमन विभाग के फोन नंबर को टेलीफोन के पास ही लिखकर रखें या अपने मोबाइल में सेव कर रखें.
अति ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, केरोसीन आदि को कभी भी खुला न रखें न ही इसे उच्च तापक्रम के पास रक्खें.
आग के भी कई प्रकार होते हैं :-
जंगल में वृक्ष के डाल जब आपस में घर्षण करते हैं तो भी अग्नि उत्पन्न होती है, जिसे दावानल कहते हैं . इस आग से जंगल की सूखी लकड़ियों एवं पत्तों के अलावा पूरे जंगल में तबाही मच जाती है और जंगल के साथ जंगली जानवरों का भी भारी नुकसान होता है.
इन सब आग के अलावा एक और आग होती है पेट की आग जिसे जठराग्नि कहते हैं. यह आग जब लगती है तो सारे आग इसके सामने फीके पर जाते हैं!
‘दिल की आग’ के बारे में मुझे ज्यादा अनुभव नहीं है. इसके बारे में अनुभवी ब्यक्ति जानकारी दे सकते हैं.
इसके अलावा और भी कुछ आग हैं :- जैसे बदले की आग, ईर्ष्या, डाह, चिंता, अहंकार, चिंता, अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बनाने की चाह, दूसरे को दुखी कर खुद प्रसन्न होने की चाह, खिल्ली उड़ाने का भाव, अत्यधिक दुःख, अत्यधिक खुशी, तड़प, …. आदि आदि ……

जितनी प्रकार के आग हैं, उन्हें शुरुआती यानी प्रारंभिक अवस्था में बुझाना बहुत ही आसान होता है. पर जब यह प्रचंड रूप धारण करती है तो सबको जलाकर ही शांत होती है.
(अगर इस आलेख के माध्यम से कहीं भी आग रोकने में मदद मिलती हो तो मैं अपने आपको धन्य समझूंगा – जवाहर )

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
April 29, 2016

बेटे जवाहलाल, आशीष ! ब्लॉग के लिए जहां पर जनता को दिशा निर्देश दिए गए हैं की आग पर कैसे काबू पाया जा सकता है, तथा अग्नि के प्रकार पर प्रकाश डालने के लिए साधुवाद ! हरेंद्र जागते रहो

    jlsingh के द्वारा
    April 29, 2016

    आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम. आलेख को पढ़ने और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार! आपका मुझ पर प्यार बरसता रहता है, और इसी प्यार से सिंचित आपका यह भतीजा फलता फूलता रहता है. सादर!

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
April 28, 2016

जवाहर लाल जी, बहुत ही ज्ञानपरक रचना दी है आपने जो सभी पाठकों के काम आएगी सावधानी से ही सुरक्षा है.और सुरक्षा की जानकारी से ही सावधान हुआ जा सकता है धन्यवाद

    jlsingh के द्वारा
    April 29, 2016

    आदरणीय अगरवाल साहब, बहुत दिनों के बाद आपसे साक्षात्कार हो रहा है., आपका हार्दिक अभिनन्दन! आपके ब्लॉग भी काफी उपयोगी होते हैं. आप समाज के प्रहरी के रूप में हमेशा जगाने का काम करते रहते हैं.

Jitendra Mathur के द्वारा
April 28, 2016

बहुत ही उपयोगी लेख है जवाहर जी आपका । हार्दिक आभार । साथ ही इस बात की हार्दिक बधाई कि आपको दिल की आग का कोई अनुभव नहीं है ।

    jlsingh के द्वारा
    April 29, 2016

    आलेख की सार्थकता को समझने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी! दिल तो दिल है, नजरिया अपना अपना सोच अपनी अपनी अपनी. सादर!

Shobha के द्वारा
April 28, 2016

श्री जवाहर जी दिल्ली में मंडी हाउस के गोल चककर पर फिक्की बिल्डिंग में बच्चों के लिए बनाया म्यूजियम इस तरह से जल रहा था देख कर दहशत हो रही थी| आप का लेख पढ़ने के बाद सोचने पर विवश हो गई हम आग के प्रति इतने उदासीन क्यों है अक्सर फैक्र्टियां जलना आम बात हो गई है ज्यादातर शॉर्ट सर्किट कह कर बात टाल दीजाती है बच्चे और भी उदासीन है वह लाइट बुझाना ही नहीं जानते |आपने आग के कारण पर प्रकाश डाला विदेशों में पिकनिक का रिवाज है वहीं खाना पकता है सुलगती आग को छोड़ कर चल देते हैं कभी – कभी बेफिक्री से जंगल जलने लगते हैं बहूत अच्छा लेख

    jlsingh के द्वारा
    April 29, 2016

    आदरणीया डॉ. शोभा जी, सादर अभिवादन! मैंने आग की विभिन्न घटनाओं को देखते हुए ही मैंने इस आलेख को पोस्ट किया. आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया का हर्दिक आभार!


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