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असम चुनाव के रणनीतिकार

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चुनाव जीतने के लिए अब केवल राजनीतिज्ञ के कोरे वादे से काम नहीं चलने वाला है. अब तकनीक के साथ कुछ नए नारे बनाने होते हैं। प्रचार में तकनीक का सहारा लेना होता है। सत्तासीन पार्टी की बाल के खाल भी उधेड़ने होते हैं! और यही सब काम किया असम चुनाव के इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट रजत सेठी ने। मोदी को लोकसभा चुनाव में जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर के कांग्रेस से जुड़ने के बाद बीजेपी को नया किंगमेकर मिल गया है। असम में मिली जीत में इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट रजत सेठी का अहम रोल बताया जा रहा है। 29 साल के ग्रेजुएट रजत ने बीते साल नवंबर में असम के लिए कैम्पेन शुरू किया था। उनकी टीम की मेहनत का नतीजा यह रहा कि बीजेपी अब नॉर्थ ईस्ट में पहली बार किसी राज्य में सरकार बनाने जा रही है। 126 सीटों वाली असम विधान सभा में बीजेपी+ को 86, कांग्रेस को 26, एआईयूडीएफको 13 और अन्य को 1 सीटें मिली हैं। BJP के स्ट्रैटजिस्ट्स की टीम 6 महीने में 6 लोगों के साथ मिलकर 20 घंटे काम कर असम में BJP को दिलाई जीत दिलाई है। ऐसा कहा जा रहा है….
कानपुर के रहने वाले रजत सेठी ने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की है। बाद में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में ग्रेजुएशन किया। उनके परिवार की संघ से करीबी का रिश्ता रहा है। 2012 में पढ़ाई के लिए अमेरिका गए। 2014 में रजत हार्वर्ड इंडिया एसोसिएशन के लिए इवेंट्स कराते थे। एक बार जब राम माधव वहां गए तो वे उनके संपर्क में आए। 2015 में पढ़ाई पूरी करने के बाद माधव के कहने पर रजत भारत लौटे और बीजेपी से जुड़ गए।
रजत ने टीम बनाने की शुरुआत की। 6 लोगों की टीम में 4 IIT खड़गपुर के पास आउट थे। 2 मेंबर ऐसे थे जो प्रशांत किशोर की टीम में रहे थे। उन्होंने नवंबर 2015 से असम में काम शुरू किया। बीजेपी के लिए रजत ने ‘असम निर्माण’ का नारा दिया। हर दिन 20 घंटे काम करते हुए पूरी टीम राम माधव और अमित शाह के कॉन्टेक्ट में रहती थी। टीम ने पब्लिक के बीच डायलॉग सीरिज चलाई, टी-लेबर्स, एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और सोशल वेलफेयर जैसे मुद्दों को उठाया। वर्ल्डबैंक में काम कर चुके रजत ने बताया, ”हमारी स्ट्रैटजी थी कि हर दिन कुछ नया करते हुए कांग्रेस या उनके लीडर पर सीधे टारगेट करें। ताकि कांग्रेस बैकफुट पर रहकर सिर्फ जवाब दे सके। इसका फायदा हमें ऐसे मिला कि कांग्रेस का कैम्पेन आचार संहिता लागू होने के सिर्फ एक महीने पहले ही शुरू हो पाया।” रजत ने बताया कि हार्वर्ड में कोर्स के दौरान प्रोजेक्ट वर्क के लिए उन्होंने कुछ महीनों तक हिलेरी क्लिंटन के लिए कैम्पेन किया है। उनके कोर्स में कैम्पेन मैनेजमेंट का एक प्रोजेक्ट था। इस दौरान उन्हें अमेरिका के इलेक्शन मैनेजमेंट को समझने का मौका मिला।
कैम्पेन स्ट्रैटजी रजत की 6 लोगों की टीम में आशीष सोगानी, महेंद्र शुक्ला, शुभ्रास्था, शिखा, और आशीष मिश्रा थे। शुभ्रास्था पहले प्रशांत की टीम में थीं। 2015 में बिहार में महागठबंधन को लेकर उनके प्रशांत से मतभेद हुए और फिर वे उनकी टीम से अलग हो गईं। टीम की सीनियर मेंबर शुभ्रास्था ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मोदी ने एक बार अपने भाषण में गरीबों को 2 रुपए प्रतिकिलो चावल देने की स्कीम का जिक्र किया था। इस स्कीम की काफी अपील थी। वहीं, अमित शाह ने अपने बयानों में अहम मुद्दे उठाए। ये सारी चीजें हमारी टीम ने ड्राफ्ट की और सजेस्ट की थीं। शुभ्रास्था ने बताया, ”हमने 175 से ज्यादा RTI लगाकर गोगोई के खिलाफ माहौल का फायदा उठाया। पार्टी के टॉप लीडर्स तक हमारे लिए एक मैसेज पर एक्सेस था। इसके चलते हर स्टेप पर मिले उनके सपोर्ट ने विनिंग स्ट्रैटजी को मजबूती दी।”
सबसे पहले इन लोगों ने बूथ से लेकर हर विधान सभा सीट का एनालिसिस किया और वहां के मुददों और जरूरतों को समझकर एक विजन डॉक्युमेंट बनाया। हर सीट के लिए माइक्रो मैनेजमेंट किया। सोशल मीडिया पर ये कांग्रेस से बहुत आगे रहे। फेसबुक के जरिए इन्होंने करीब 30 लाख लोगों तक अपनी पहुंच बनाई और वाट्सएप के जरिए भी यूथ से कॉन्टेक्ट किया। जबकि फेसबुक पर कांग्रेस केवल 5 से 10 हजार लोगों तक सिमटी रही।
एनालिसिस और माइक्रो मैनेजमेंट के बाद ही एजीपी के साथ एलायंस करने का फैसला किया गया। हालांकि असम बीजेपी के लोकल लीडर्स इसके खिलाफ थे। टीम ने एनालिसिस में बताया कि 2014 के लोक सभा चुनाव में एजीपी ने करीब 3 से 4 फीसदी वोट हासिल किया थे। तर्क दिया कि लोक सभा चुनाव में जब ये पार्टी इतना वोट हासिल कर सकती है, तो असेंबली इलेक्शन में तो और भी अच्छा कर सकती है।
चुनावों से पहले सर्बानंद सोनोवाल को सीएम पद का कैंडिडेट बनाया जाना भी इस टीम की स्ट्रैटजी का ही हिस्सा था। असम में बीजेपी पर आरोप लगता था कि यह हिन्दी भाषी स्टेट्स की पार्टी है। इसकी काट के लिए टीम ने एक ट्राइबल लीडर को सीएम पद का चेहरा बनाने की राय दी। तरुण गोगोई के करीबी हिमंता बिस्वा सर्मा को तोड़ना और उनसे जमकर रैली करवाने का फैसला भी बेहद फायदेमंद रहा। हेमंत बिस्वा ने बाद में राहुल गाँधी की खिल्ली भी उड़ाई। हेमंत ने कहा – राहुल से मिलना उनके कुत्ते से मिलने के बराबर था।
सर्मा ने 2 हफ्तों में 200 रैलियां की। इन रैलियों में नारा लगाया जाता था कि ‘असम में आनंद लाना है, तो सर्बानंद को लाना है’। इसके अलावा बांग्ला देशी मुस्लिमों का मुद्दा उठाना भी फायदेमंद रहा। रजत का कहना है कि इस मुद्दे की वजह से असम के मुस्लिमों का वोट उन्हें मिला।
बीजेपी के स्ट्रैटजिस्ट की टीम में शामिल आशीष मिश्रा ने मीडिया को बताया, ”हमने रोज 20 घंटे तक काम कर डाटा जुटाया। मुद्दे उठाने के लिए कई आरटीआई फाइल कीं। सबसे खास बात यह थी कि इलेक्शन कैम्पेन में सर्बानंद सोनोवाल के पोस्टर के साथ कांग्रेस कैंडिडेट तरुण गोगोई की बजाय कांग्रेस की अलायंस पार्टी AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल की फोटो लगाई जाती थी। इसके पीछे स्ट्रैटजी यह थी कि पूरे कैम्पेन में गोगोई को वेटेज न मिले और जनता के बीच उनकी रिकॉल वैल्यू कम रहे।”
शिखा का कहना है, हम यूपी में BJP के लिए कैंपेन के लिए तैयार हैं। आखिरी फैसला पार्टी हाई कमान को करना है। हमारी स्ट्रैटजी थी कि कांग्रेस खुद कुछ नया कैंपेन करने की जगह हमारे कैंपेन का रिस्पॉन्स एंड ही बनी रहे। और ऐसा ही हुआ।
इसके अलावा आरएसएस के समर्पित कार्यकर्ता भी काफी दिनों से असम में भाजपा के लिए जमीन तैयार कर रहे थे. वे जमीनी स्तर के लोगों से मिलकर भाजपा के पक्ष में माहौल बना रहे थे. इन सबका लाभ भाजपा को मिला. प्रधान मंत्री ने रैलियों में असम के वेश भूषा पहनकर वहां के लोगों से आत्मीयता स्थापित की.
अब आइए आपको बताते हैं रजत के बारे में दस बातें- 1. रजत सेठी कानपुर के रहने वाले हैं.
2. इन्होंकने आरएसएस के स्कूेल शिशु मंदिर से पढ़ाई की. 3. आईआईटी खड़गपुर से सेठी ने बीटेक किया. 4. खड़गपुर में इन्हों ने एक हिंदी सेल की शुरुआत की. 5. इसके बाद अमेरिका में एमआईटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में इन्हों ने पढ़ाई की. 6. सेठी ने एक आईटी कंपनी भी डाली, जिसे बाद में इन्होंरने बेच दिया. 7. राम माधव से मुलाकात के बाद और उनके कहने पर सेठी ने बीजेपी ज्वॉमइन की. 8. राम माधव ने सेठी को 32 जिलों, 25 हजार बूथों पर काम करने के लिए कहा. 9. सेठी की टीम ने गुवाहाटी को अपना हेडक्वा र्टर चुना और 20-20 घंटे काम किया. 10. 400 युवाओं को अपनी टीम में इन्होंकने शामिल किया.
बंगाल में ममता दीदी का गरीबों, मुसलमानों, बंगलादेशियों के प्रति झुकाव और उनके हित में किये गए काम को लोगों ने पसंद किया. यही हाल जयललिता के बारे में भी कहा जाता है. उन्होंने भी तमिलनाडु की जनता के लिए सरकारी खजाने से खोब धन वर्षा की. लोगों को उनके जरूरत के सामन मुहैया कराये. यानी यहाँ ये दोनों नेत्री जनता की पसंद बने और दुबारा चुनकर सत्ता में लौटीं. केरला मे परिवर्तन चाहिए था इसलिए वहां की जनता ने कांग्रेस के बजाय लेफ्ट को चुना. पोंडुचेरी छोटा राज्य है, वहां कांग्रेस अपनी साख बचाने में कामयाब रही.
सारांश यही है कि, एक तो आपको परफॉर्म करना होगा, जनता की आकाँक्षाओं की पूर्ति करनी होगी, दूसरा उनके बीच बिश्वास कायम करना होगा। तीसरा उनके बीच जाकर उनकी मांग को सुनना होगा और सत्तारूढ़ दल के विकल्प के रूप में अपने दल को पेश करना होगा। आजकल सोसल मीडिया, मीडिया मैनेजमेंट, ओपिनियन पोल सबका अपना अपना अहम रोल है। मोदी नीत भाजपा सरकार इन सारी तकनीकों का लाभ ले रही है। तभी इनका आत्मबिस्वास बढ़ा है । अब आगे यु पी और पंजाब के चुनाव हैं, देखा जाय वहां क्या होता है…. जनता जनार्दन ही सर्वोपरि है। मेरा देश बदल रहा है. आगे बढ़ रहा है …. जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 28, 2016

श्री जवाहर जी ज्ञानवर्धक लेख वाकई आज के युग में चुनाव की तकनीक बदल गई हार्वर्ड बी स्कुल के पास ऑउट ने चुनाव को आकर्षक बना दिया है आसाम में काफी समय से भाजपा कोशिश कर रही थी और काम भी कर रही थी ासम की सबसे बड़ी समस्या बंग्लादेशियों का आकर बसना वोट बैंक को प्रभावित करना था वहां का लोकल परेशान था यह उपलब्धि बहुत बड़ी मानी जाएगी लेकिन अब भाजपा को वहां काम करना पड़ेगा कोरे वादों से काम नहीं चलेगा १५ वर्ष पुरानी सरकार उखाड़ी गई है |

    jlsingh के द्वारा
    May 29, 2016

    आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! काम तो करना ही पड़ेगा तभी जम पाएंगे अन्यथा विरोधी फिर से एक जुत होने का प्रयास कर रहे हैं. विपक्ष का होना भी जरूरी है ताकि बीच बीच में लगाम लगाया जा सके. वैसे भाजपा भी अच्छी तरह समझती है और मोदी जी भी सब समझते हैं. वैसे दो साल के जश्न का भी प्लस माइनस दोनों पहलू है. काम अगर धरातल पर हो तो जश्न की जरूरत क्या? सादर!

rameshagarwal के द्वारा
May 26, 2016

जय श्री राम जवाहर लाल जी बहुत अच्छी समीक्षा हमने भी जागरण में सेठी के बारे में पढ़ा था हमारे शहर का है उसके माता पिता की इंटरव्यू भी छपा था.चुनाव जीतने के लिए बहुत से तकनीकी चाइये लेकिन ममता हो तो बम फोड़ने वाले जेहाडियो ने जीता दिया आसाम की जीत से उम्मीद है कुछ क्षेत्र का विकास होगा और बीजेपी उत्तर पूर्वी क्षेत्रो में प्रभाव दल बन कर उबरेगा.ऍआप अपनी कलम से ऐसा ही ज्ञान देते रहिये बहुत अच्छा लगता है.लेख के लिए आभार.

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    आदरणीय अग्रवाल साहब, आप हमेश मेरा उत्साहवर्धन करते हैं. आपका बहुत बहुत आभार!

sadguruji के द्वारा
May 25, 2016

आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत अच्छी समीक्षा आपने की है ! हर पार्टी चुनाव जीतने के लिए नए नए चाणक्य ढूंढ रही है ! आपने सही कहा कि आज का युग तकनीक के कमाल का युग है, भले ही वो चुनावक्षेत्र ही क्यों न हो ! सादर आभार !

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    आलेख पढ़ने और प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय सद्गुरु जी!

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
May 24, 2016

जवाहर जी बिल्कल सही कहा आपने इस जीत मे रणनीतिकार रजत सेठी का बहुत बडा योगदान रहा है । उनके बिना यह जीत संभव नही थी । अच्छा विश्लेषण ।

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    हार्दिक आभार आदरणीय एस एल बिष्ट साहब.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
May 24, 2016

जवाहर जी जब शनि की साडे साती होती है तो सीधा भी उलटा हो जाता है ।अगले साल साडे साती राहुल से हटकर मोदी जी पर आ रही है ओम शांति शांति 

    sadguruji के द्वारा
    May 25, 2016

    आदरणीय हरीश चन्द्र शर्मा जी ! नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर साढ़ेसाती तो 2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पूर्व ही शुरू हो चुकी थी ! दो साल में ये सिद्ध हो चुका है कि साढ़ेसाती नरेंद्र मोदी के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही है और राहुल गांधी के लिए बहुत बड़ा अभिशाप ही साबित हुई है ! सादर आभार !

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    आदरणीय हरिश्चन्द्र साहब, सादर अभिवादन! शनि की सैदे साती कब किस पर आ जाय कहना मुश्किल है. हम आप तो केवल अनुमान ही लगा सकतेहैं. बस इतना जानते हैं कि सब दिन होत न एक सामना! आपकी व्यंग्यात्मक टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार!

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    आदरणीय सद्गुरु जी, आपने भी अच्छा व्यंग्य साधा है. राहुल गांधी किसी काम के योग्य नहीं हैं, इसलिए मोदी जी के लिए अभी अच्छा दिन चल रहा है आप भी पैनी नजर रखते हैं हर घटना पर यहाँ तक की अपनी विरादरी वाले बाबाओं पर भी … कृपा बरसती है तो ऐसे ही बरसती है. कभी कभी आश्चर्य होता है स्मृति ईरानी जी किसे बाबा के सामने हाथ फैालए बैठी दिख जाते हैं जबकि उनकी अपनी वक्तृतव कल और अभिनय कल काम काम नहीं है. सादर हरिस्मरण!

    sadguruji के द्वारा
    May 28, 2016

    आदरणीय सिंह साहब ! सादर हरिस्मरण ! कबीर साहब और गुरुनानक के बताये हुए संत मार्ग पर चलने वाले मेरे जैसे साधुओं की कोई बिरादरी नहीं है ! इन बाबाओं को ‘अपनी बिरादरी’ का मत कहिये ! सादर आभार !

    jlsingh के द्वारा
    May 29, 2016

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! मेरा इरादा आपकी भावना को कष्ट पहुंचना नही था. बाबाओं की बिरादरी कहने के लिए मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूँ. आगे से कोशिश करूंगा की व्यक्तिगत टिप्पणी से बचूं. सादर!

harirawat के द्वारा
May 23, 2016

बेटे जवाहरलाल, आयुष्मान ! आपने आसाम चुना के बारे में वस्तृत जानकर देकर नेताओं को एक खुला सन्देश दे दिया है की अगर तुम डाल डाल तो जनता पात पात ! सरकारें की एक परिवार की वपउति नहीं है ! अरे राज खानदान जिनकीकल तक तोती बोलती थी, पैतृक सम्पति अधिकार जमाने वाले भी मिट गए ! तो प्रजातंत्र में जनता को एक ही परिवार भुलावे में ज्यादा दिन तक नहीं रख सकता ! कोई अपने को कितना भी बलशाली, शक्तिशाली, मशकलमैन समझ ले, कभी न कभी जोडवाला पैदा होही जाता है ! कांग्रेस की १९७७ में कितनी किरकरी हुयी थी, ३५० सांसदों में से घटकर केवल ८६ रह रहे थे ! वो तो मुराजी देसाई को हटाकर स्वयंम प्रधान मंत्री का ख़्वाब देखने वाले चरणसिंह जी महाराज की कृपा हुई, चुनाव् ३ साल के अंदर हुए, इन्द्राजी के नेतृत्व में फिर १९८० में कांग्रेस सत्ता पर आगई ! इसके बाद कांग्रेस को लगने लगा की देश कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता ! गद्दी पर या कांग्रेस के शीर्ष पर गांघी परिवार का ही होना चाहिए,कांग्रेस का नेतृत्व करने वाला, चाहे वो पप्पू का दिमाग रखता हो, चाहे पैदायशी विदेश की ही क्यों न हो ! चाहे भष्टाचार के गद्दे में ही क्यों न पड़ा हो ! आसाम के चुनाव २०१६ पर एक सही और विस्तृत जानकारी के लिए थपकी देता हूँ और आशीर्वाद कहता हूँ ! चाचा के ब्लॉग पर आकर सकारात्मक टिप्पणी के लिए धन्यवाद करता हूँ !

    jlsingh के द्वारा
    May 28, 2016

    आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम! देश बदल रहा है और देश के लोगों की अपेक्षाएं भी बदल रही है . अब तो मुझे ऐसा लगता हैकि जो परफॉर्म करतेगा वही जीतेगा. विस्तृत समीक्षा के साथ प्रतिक्रिया देने के लिए आपका हार्दिक आभार!


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