jls

जो देखता हूँ, वही लिखता हूँ

418 Posts

7688 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3428 postid : 1289166

आर्तनाद

Posted On 26 Oct, 2016 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरे ही पुत्रों ने,
मुझे,
लूटा है बार-बार!
एक बार नहीं,
हजार बार!
अपनी अंत: पीड़ा से
मैं रोई हूँ, जार जार!
हे, मेरे ईश्वर,
हे मेरे परमात्मा,
दे इन्हें सदबुद्धि,
दे इन्हें आत्मा,
न लड़ें, ये खुद से,
कभी धर्म या भाषा के नाम पर,
कभी क्षेत्रवाद,
जन अभिलाषा के नाम पर.
ये सब हैं तो मैं हूँ,
समृद्ध, शस्य-श्यामला.
रत्नगर्भा, मही मैं,
सरित संग चंचला.
मत उगलो हे पुत्रों,
अनल के अंगारे,
जल जायेंगे,
मनुज,संत सारे.
——————————
हे महादेव, हे नीलग्रीवा,
धरो रूद्र रूप, करो संतसेवा.
करो भस्म तम को, नृत्य तांडव करो तुम,
घट विष का हे शिव, करो अब शमन तुम.
—————————————
हे मेरे राम, कब आओगे काम!
हे मेरे आका बचा लो ‘निज’ धाम.
सिया अब पुकारे, हरण से बचा ले,
ये रावणों की सेना, लेते हैं तेरा नाम.
जरूरत नहीं है, अब लंका दहन की,
अवधपुर जले हैं, जरूरत शमन की.
असुर अब बढ़े हैं, करें नष्ट तपवन.
कहाँ तप करें अब, संत और सज्जन.
लखन औ विभीषण खड़े साथ ही हैं.
अगर है जरूरत, तो पार्थ भी है.
चढ़ाओ प्रत्यंचा, खड्ग को सम्हालो,
माँ काली, हे देवी, रिपु को खंगालो !
माँ काली, हे देवी, रिपु को खंगालो !
जवाहर लाल सिंह

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

9 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
November 5, 2016

आदरणीय जवाहर जी , बेहद भावपूर्ण एवं मन को छूती रचना | अति सुन्दर ….

    jlsingh के द्वारा
    November 6, 2016

    प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय अलका जी!

Shobha के द्वारा
October 26, 2016

श्री जवाहर जी अति सुंदर जितने अति आप लगा सकते हैं लगा लीजिये कविता आपके मन के भावों को दर्शाती भावनात्मक कविता |

    jlsingh के द्वारा
    October 26, 2016

    प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आदरणीया शोभा जी!

    jlsingh के द्वारा
    October 26, 2016

    प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय डॉ. शोभा भारद्वाज जी

rameshagarwal के द्वारा
October 26, 2016

जय श्री राम मानीय जवाहर जी देश की मौजूद परिस्तिथ का जिस सुन्दर कविता के माध्यम से चित्रण किया उसकी तारीफ के लिए हम शब्द नहीं ढूढ़ पा रहे !देश की बर्बादी का कारन यही है फुट डालो और राज्य करो में तो हमारे नेताओ ने सबको मात दे दी.लार्ड मैकाले की भविष्यवाणी सही दिख रही और न ही कुछ सुधरने के लक्षण दे रहे.किसी ने न कहा था जिसे भगवन पर विश्वास न हो देख ले की भारत कैसे चल रहा भगवान् पर विश्वास हो जाएगा.!सुन्दर कविता के लिए साधुवाद.!

    jlsingh के द्वारा
    October 26, 2016

    हार्दिक आभार आदरणीय अग्रवाल साहब!

Jitendra Mathur के द्वारा
October 26, 2016

इतनी उत्कृष्ट कविता ! पढ़कर मैं अभिभूत हूँ आदरणीय जवाहर जी ।

    jlsingh के द्वारा
    October 26, 2016

    हार्दिक आभार आदरणीय जितेंद्र माथुर जी!


topic of the week



latest from jagran