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छठ व्रत का महत्व

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लोक आस्था का महापर्व छठ बिहार, झारखण्ड, पूर्वांचल के साथ देश के विभिन्न भागों में बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है. देहरादून से दिल्ली तक, भोपाल से बेंगलुरु तक, और मुंबई से कोलकता तक. अब तो विदेशों में, मतलब अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, तंजानिया, मारीसस आदि देशों में भी भारतवासी/बिहारी छठ व्रत करने लगे हैं. जमशेदपुर में झारखण्ड के मुख्य मंत्री रघुवर दास ने सभी झाड़खंड वासियों और देश वासियों की मंगल कामना की, तो बिहार के मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने छठ व्रत के चलते सपा के रजत जयन्ती समारोह में महागठबंधन की संभावना के बावजूद लखनऊ नही गए. उन्होंने 1 अणे मार्ग पर ही भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया. नितीश कुमार ने राज्यपाल के साथ ही पटना गंगा नदी के विभिन्न घाटों का निरीक्षण भी किया. विदेशी शैलानियों ने भी इस बार इस पर्व में खूब दिलचश्पी दिखलाई और विभिन्न जगहों पर स्टीमर पर सवार होकर कैमरे से शूटिंग करते नजर आये. कई जगह लोगों ने देश के सैनिकों के लिए दुआ माँगी.
जमशेदपुर में सुवर्णरेखा और खरकाई नदियों के किनारे बड़ी संख्या में व्रती जुटे तो शहर के विभिन्न भागों में तालाबों के किनारे भी व्रतियों ने अर्घ्य दिया. जमशेदपुर के ही सिदगोरा में सूर्यधाम है, जहाँ सूर्य भगवान का भव्य मंदिर तो है ही, उनके सामने ही दो कृत्रिम पक्के तालाब बनाये गए है, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और 6 नवम्बर की शाम को अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया तो 7 की शुबह को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया गया. यह सूर्य मंदिर जमशेदपुर के विधायक श्री रघुबर दास के प्रारंभिक दान दस हजार से शुरू हुआ और आज अनगिनत श्रद्धालुओं के श्रद्धा का ही फल है कि यहाँ सूर्य धाम की स्थापना हो गयी और परम्परागत तरीके से पूजा पाठ करने की सुविधा के साथ, साफ़ सफाई और आधुनिक सुविधा की भी प्रचुर व्यवस्था है. विभिन्न सामाजिक संगठन व्रत धारियों एवं श्रद्धालुओं के लिए हर सुविधा का निशुल्क इंतजाम करते हैं. यहाँ पर महिलाओं के वस्त्र परिवर्तन के लिए कई जगह पर्दाघर बनाये गए थे. साफ़ पानी, शौचालय, पूजन सामग्री, प्रसाद, अर्घ्य के लिए दूध, अगरबत्ती आदि की भी नि:शुल्क व्यवस्था थी. रात में मनोरंजन के लिए भक्ति गीत का भी कार्यक्रम रक्खा गया था. इस बार मुबई से पार्श्वगायिका सुनिधि चौहान को बुलाया गया था. ऐसे मौके पर भीड़ को नियंत्रण करने के लिए उच्च स्तर की ब्यवस्था की जरूरत होती है और झाड़खंड के मुख्य मंत्री श्री रघुबरदास के नेतृत्व में ही संभव हो सका.
जमशेदपुर नगरी जमशेदजी टाटा की नगरी है. यहाँ की टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, जुस्को आदि भी हर पर्व त्योहार के भांति छठ में भी अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करती हुई, साफ़ सफाई, प्रकाश, निर्बाध विद्युत् आपूर्ति और पेय जल की ब्यवस्था अपने अधिकार क्षेत्र के सभी घाटों पर करती है.
शुद्धता और पवित्रता का यह महान पर्व मूलत: किसानो का पर्व कहा जाता है, जिसमे समसामयिक कृषि उत्पाद, फल, फूल, सब्जियां आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं, पर नारियल, केला और ठेकुए की प्रधानता रहती है, जिन्हें नए सूप में रख, दीप अगरबत्ती जला किसी भी जलाशय के किनारे जल में खड़ा होकर षष्टी के दिन अस्ताचल गामी और सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं. सूर्य, जल और पृथ्वी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसीलिए इन्हीं तीनो की साक्षात् रूप में पूजा होती है. इसमें कोई पंडित, ब्रह्मण, बाबा जैसे लोगों की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं होती, कोई मंत्रोच्चारण नहीं होता, भक्त सीधा भगवान से अपने अंत:करण से पुकारता है और भगवान भी साक्षात् दर्शन देते हैं. इसी एक पर्व में हम जात-पात, ऊँच-नीच, का भेद-भाव भूल जाते हैं, यहाँ तक कि अब धर्म भी आड़े नहीं आता. (दूसरे धर्म के लोग भी इसमे आस्था व्यक्त करने लगे हैं) सभी के लिए एक ही विधि है, अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा व्यक्त करने का अनूठा अनुष्ठान. महिला के साथ पुरुष भी इस पर्व को करते हैं.
हरेक छठ घाटों पर काफी भीड़ होती है, पर यह स्वनियंत्रित होती है. हालाँकि प्रशासन की भी इसमे महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है, पर स्वयंसेवी संस्थाएं अपना रोल बखूबी निभाती हैं. विभिन्न लोक गायकों, लोक गायिकायों के साथ शारदा सिन्हा के गाये गीतों की स्वरलहरी हर जगह गुंजायमान रहती हैं. इस बार शारदा सिन्हा का एक विडियो काफी लोकप्रिय हुआ है जिसमे माँ अपने बेटे से कहती है कि बेटा इस बार वह आर्थराइटिस (गठिया) की बीमारी के वजह से छठ नहीं कर पायेगी. उसकी नयी बहू तो पढी लिखी और दफ्तर में काम करनेवाली है, वह अब छठ कहाँ कर पायेगी. वह यह भी नहीं चाहती कि बहू पर इस पर्व का भार थोपा जाय. इस प्रकार इस परम्परा को अपने तक ही सीमित रखना चाहती है. बहू को जैसे इस बात का पता चलता है, वह छठ करने को तैयार हो जाती है, जिसमे उसका पति भरपूर सहयोग करता है. माँ-पिताजी भी यह जानकार कि बहू छठ कर रही है बेटे-बहू के पास शहर में ही आ जाते हैं. इस बीच शारदा सिन्हा का छठ गीत चलता रहता ही जिसमे छठ के विभिन्न विधियों को विडियो में दिखाया गया है.
शारदा सिन्हा गाती हैं,
पहिले पहिले हम कइलीं छठी मइया वरत तोहार,
करिह छमा छठी मइया भूल, चूक, गलती हमार!
गोदी के बालकवा के दीहअ छठी मइया ममता दुलार,
पिया के सनेहिया बनाईह छठी मैया दीह सुख सार.
नारियल केलवा घउदवा, साजल नदिया किनार,
सुनिह अरज छठी मइया, बढ़े कुल परिवार ..
घाट सजावली मनोहर, मइया तोर भगती अपार,
दीहीं न अरगइया हे मइया, दीहीं आशीष हजार….
पहिले पहिले हम कइलीं …..

…सचमुच यह विडियो भावनात्मकता को प्रदर्शित तो करता ही है, नए लोगों को परंरागत पूजा पाठ के प्रति जुड़ाव के लिए प्रेरित भी करता है. जिन लोगों ने इस विडियो को देखा अपनी भावुकता को रोक नहीं पाए…. मैं भी भावुक हो गया था. आँखों से आंसू टपक पड़े थे.
ग्रामीण महिलाएं अभी भी अपने सुर में गाना पसंद करती हैं और चार दिनों के अनुष्ठान में मनोयोग से लगी रहती हैं. बाहर रहने वाले लोग चाहते हैं कि सपरिवार एक साथ अपने घर में इस पर्व को मनाएं, इसीलिये इस अवसर पर ट्रेनों और बसों में अप्रत्याशित भीड़ बढ़ जाती है. फिर भी लोग हर कष्ट सहकर इस पर्व को मनाते हैं. प्रशासन को भी चुस्त दुरुस्त रहना पड़ता है.
दीवाली में साफ़ सफाई तो होती ही है छठ में और भी ज्यादा मनोयोग से लोग घर के साथ गली, मोहल्ले, छठ घाट और सड़कों की भी पूर्ण सफाई कर डालते हैं.
इस पर्व की पौराणिक मान्यता भी हैं. कहते हैं इस पर्व को भगवान राम, महाभारत के कर्ण और दौपदी ने भी इस पर्व को किया था. सूर्य आराधना और पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने का वैज्ञानिक महत्व भी है. उपवास और व्रत तन-मन की पवित्रता को स्थापित करते हैं. भाईचारा और पारिवारिक प्रेम को भी बढ़ाते हैं. इस पर्व में सभी बंधू-बांधव इकठ्ठा होकर आपसी सौहार्द्र को बढ़ाते हैं. आजकल आपसी सौहार्द्र ही तो बिगड़ता जा रहा है. चाहे राजनीतिक कारण हों या सामाजिक-आर्थिक. इसकी सख्त जरूरत है इसके लिए हमें अपनी पुरातन मान्यता को महत्व देना ही होगा.
छठ में सब कुछ ठीक है पर पटाखों आतिशबाजियों पर नियंत्रण आवश्यक है. छठ घाट पर व्रत धारी आराधना में लीन रहते हैं और उसी वक्त पटाखों का शोरगुल ध्यानभंग करता है और ध्वनि प्रदूषण के साथ साथ वायु प्रदूषण को भी बढ़ाता है. साथ ही इससे दुर्घटना होने की भी संभावना बनी रहती है. कृपया छठ के अवसर पर आतिशबाजी से बाज आएं. यह मेरा निवेदन है. अपेक्षाकृत इस बार कम पटाखे चोदे गए हैं ऐसा विभिन्न रिपोर्टरों का भी कहना है. भारत के इस अमूल्य धरोहर को, जो सबके दिलों में है बचाए रखना है.
अंत में शारदा सिन्हा के लोकप्रिय छठ गीत –
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज देव झांके झूंके.
हम करेलीं छठ वरतिया कि झांके झूंके.
पटना के घाट पर देइब अरगिया, देखब हे छठी मैया
हम ना जाइब दूसर घाट देखब हे छठी मैया

प्रस्तुति- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 15, 2016

श्री जवाहर जी मेरी बेटी विदेश से आई हुई थी अत :व्यस्तता के कारण में ब्लाफ़ खोल ही नही पाई छठ के अवसर पर सम्पूर्ण लेख बहुत ही सुंदर त्यौहार है प्रकृति का पूजन हमारे एरिया में बिहार के बहुत लोग रहते हैं छट की छटा देखने लायक थी सही धजी महिलाएं बड़े नियम धर्म से व्रत रखती हैं लेकिन अबकी बार उसमें आधुनिकता भी आ गयी रात को दो बजे से पटाके चलाने शुरू कर दिए पहले ऐसा कभी नहीं हुआ फिर भी खूबसूरत पर्व रहा

rameshagarwal के द्वारा
November 7, 2016

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी आपने छट पर्व का बहुत सटीक वर्णन किया कानपुर में भी खूब धून धाम से मनाया गया नहरों,नदियो ले किनारे खूब रौनक रही टीवी के माध्यम से अब सब त्यौहार देश विदेशो में मनाये जाने लगे है भोजपुरी गाने समझ में तो नहीं आते लेकिन सुनने में बहुत अच्छे कगते.दिल्ली नमे भी खास इन्र्जाम किये गए लेकिन प्रदुषण ने बिगाड़ दिया.लालू रबरी जी को छोड़ कैसे आ गए.पूरा त्यौहार अच्छी तरह मन गया लेकिन बिहार में कुछ लोग नदी में डूबने और कुछ ट्रेन दुर्घटना में मारे गए.आप तो लिखने में माहिर है पढ़ कर अच्छा लगता.आज से प्रतिक्रिया में catchup हटा दिया गया ऍसुन्दर लेख के लिए आभार.

    jlsingh के द्वारा
    November 7, 2016

    आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्रीराम! धार्मिक आयोजन में अक्सर कहीं न कहीं कुछ घटनाएं हो ही जाती है, इस पर भी हमने एक ब्लॉग लिखा था. प्रशासन की चुस्ती के बावजूद कहीं न कहीं हम जिम्मेदार होते हैं इन घटनाओं के पीछे. छठ के दौरान बिहार जाने वाली ट्रेनों में जो भीड़ होती है उसे बिन देखे कल्पना भी नहीं की जा सकती. अत्यधिक भीड़ कहीं भी हादसे के कारण होते हैं. फिर भी हादसे और दुर्घनटनएं दुखद होती हैं. आपकी प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन का हार्दिक आभार! सादर!


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