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१० नवम्बर २०१६ का दिन!

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१० नवम्बर को नियमानुसार समय से ही जागा. मन में चिंता थी, पुराने नोटों से नए नोटों में परिवर्तित करने की, क्योंकि शादी समारोह में शामिल होने जाना है. भगवान से प्रार्थना कर बैंक जाने के लिए निकल पड़ा. घर से बाहर निकलते ही कई लोगों को पानी के खाली बर्तन के साथ देखा. ये लोग पास के नल से पानी भरने जा रहे थे. बहुत ध्यान से देखने पर भी कोई भी पानी से भरा बर्तन नहीं दीखा. कहते हैं यात्रा पर निकलते समय पानी के खाली बर्तन देखने से यात्रा शुभ नहीं होता. चाहे जो हो १० बजे के लगभग ही बैंक पहुँच गया. तब लाइन छोटी थी. पुराने नोट तो अपने खाते में जमा हो गए. नए नोट पाने के लिए दो घंटे बाद आने के लिए कहा गया. बैंक ऑफ़ बरोदा के साकची ब्रांच में अभी नए नोट पहुंचे नहीं थे.- ऐसा बताया गया. मेरा घर पास ही है, इसलिए घर वापस आ गया.
घर आकर सोचा कि ‘सफ़ेद राशन कार्ड’ (पारिवारिक विवरणी) के लिए आवेदन पत्र जमा करना है, क्यों न इसी बीच जमा कर लिया जाय! भरे हुए फॉर्म और आवश्यक कागजात के साथ निकला ही था कि बिल्ली रास्ता काट गयी. उधेड़-बुन में कुछ देर रुका रहा. फिर मन को कड़ा कर निकल पड़ा. जितना भी विकास की सीढ़ी चढ़ लें, मन के अंदर अंधबिश्वास कहीं न कहीं दबा रहता है, जो ऐसे समय में ही कदम को डगमगा देता है. फिर भी निकल पड़ा कि देख लें आज क्या होता है? उपायुक्त कार्यालय पहुँचने के पहले ही एक बार पुनः बिल्ली रास्ता काट गयी. दो निगेटिव मिलकर एक पॉजिटिव होता है. ऐसा मैंने गणित में पढ़ा था. ( मन में ढाढ्स बढ़ा) उपायुक्त कार्यालय के पास जाकर पूछा – राशन कार्ड का फॉर्म कहाँ जमा होता है. एक सज्जन ने इशारे से बता दिया. उपायुक्त कार्यालय में फॉर्म जमा होने के टेबुल पर, बाबु के पास फॉर्म जमाकर कहा- “कृपया चेक कर लें, सब ठीक है तो”.
उन्होंने देखकर कहा, “ठीक है.”
- “कब तक बन जायेगा”?
– “जनवरी तक उम्मीद रखिए”. ..
ब्यवहार अच्छा लगा.. उन्होंने कुछ रुपयों की भी मांग नहीं रख्खी. न ही ना-नुकुर की. पहली बार ऐसा लगा कि सरकारी कर्मचारियों के ब्यवहार में काफी परिवर्तन हुआ है.
अब बारी थी दुबारा बैंक पहुंचने की. चेक जमा करने गया तो बताया गया अभी कैश नहीं आया है, एकाध घंटे और लगेंगे. अब मैं थोड़ा गरम हुआ. दश बजे आपने कहा था- “दो घंटे बाद आइये. अब दो घंटे के बाद भी कह रहे हैं, एक घंटे बाद आइये. नए नोट नहीं तो पुराने नोट १०० – ५० के जो भी हैं, वही दीजिये. काम तो चले!”
बेचार भले आदमी थे. टोकन दे दिया. ११६ नंबर. अभी-अभी ११४ नंबर सुना था. खुशी हुई कि ज्यादा देर नहीं लगेगी. पर कैश काउंटर एक ही था और कैश बाबु कैश जमा लेने में ही मशगूल थे.
मैंने आग्रह किया- “देखिये शायद ११६ नंबर का चेक आपके पास आ गया हो”.
वे मुस्कुराये.. “आपका तो पुराना नोट जमा हो गया न”! …
मैंने कहा- “अब खर्च के लिए कुछ तो चाहिए”.
कुछ और लोगों से कैश जमा लेने के बाद उन्होंने मेरा भी भुगतान कर दिया. नए-पुराने १०० के नोटों से. ५०० या २००० के नए नोट के दर्शन नहीं हुए.
मेरी पत्नी और मेरी बेटी कलकत्ता गयी है, शगुन के रश्म में शामिल होने. छुट्टी न मिल पाने की वजह से मैं साथ नहीं जा सका. रास्ते में कुछ परेशानी हुई, पर काम चल गया. मैंने उन्हें भी १०००,५०० के नोट ही देकर भेजा था. उसने बताया शगुन में भी लोग १०००, ५०० के नोट ही दे रहे थे, और उन्होंने भी वही किया. चलिए एक चिंता दूर हुई.
अब बारी थी, खाना बनाने की. बैगन काटने लगा- आश्चर्य कि एक भी बैगन ‘काना’ न निकला. बैगन भी अब अच्छे आने लगे है. याद आया- अच्छे दिन की शुरुआत हो चुकी है.
टी वी ख़बरें बता रही थी, किस तरह हरेक बैंकों में भीड़ थी. बैंक खुलने से पहले ही लोग लाइन में लग गए थे. पेट्रोल पंप, हॉस्पिटल, श्मशान से भी खबरें आ रही थी. काफी जगहों पर लोगों को दिक्कतें हो रही थी, पर सबों ने मोदी जी के इस कदम को अच्छा बताया. देश के लिए थोड़ी कठिनाई सह लेगें. मोदी जी ने भी लोगों से धैर्य बनाये रखने के लिए धन्यवाद दिया. बैंक कर्मचारी और अधिकारी हर जगह शांति से अपना काम कर रहे थे.
शाम को खबर आयी दाउद की कंपनी को बड़ा नुक्सान हुआ है. वह तो अब आत्महत्या करने की सोच रहा है. उसका सारा ब्यापार तो नकली नोटों से चलता है. पाकिस्तान का ISI संगठन भी बहुत परेशान है. मोदी जी के इस सर्जिकल स्ट्राइक से बहुत सारे आतंकवादी संगठन, नक्सली भी परेशान हैं. सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ मोदी विरोधी राजनीतिज्ञों को है, उसमे भी नीतीश कुमार ने मोदी जी के इस कदम का समर्थन किया और सराहा भी है. परेशानी सिर्फ ममता, माया, मुलायम और राहुल को है. अखिलेश भी खुश हैं, उनकी विरोधी( बुआ) के पास के काले धन कूड़े में बदल गए. भाजपा के पास न तो कालाधन है, न ही वे लोग इसका इश्तेमाल करते हैं. इसलिए विजय वर्गीय, शिवराज सिंह से लेकर येदुरप्पा आदि सभी स्तर के नेता खुश हैं. झाड़खंड के मुख्य मंत्री रघुबर दास भी… जिन्होंने छठ के दिन रात्रि में सुनिधि चौहान का कार्यक्रम कराया था. सुनिधि भी बहुत कम रकम शायद ६०,००० रुपये लेकर गाने और नाचने-नचाने आ गयी. लगभग १०,००० हजार लोगों की बैठने की ब्यवस्था, १० -१२ एल सी डी स्क्रीन के साथ शानदार मंच की ब्यवस्था भी लोगों ने सफ़ेद रुपयों से ही कर दी थी. झाड़खंड का जमशेदपुर बड़ा संपन्न शहर है. इसे झाड़खंड की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है. वैसे अभी टाटा समूह पर विपत्ति आयी हुई है और बतौर सुब्रमण्यम स्वामी रतन टाटा सबसे ज्यादा भ्रष्ट ब्यक्ति हैं.

राम राज्य अब आने ही वाला है. या कहें कि आ चुका है. अमरीका में ट्रम्प की जीत से भी भारत को उम्मीद बंधी है … वे भी आतंकियों को जड़ से समाप्त करना चाहते हैं. यु पी, और पंजाब के विधान सभाओं के चुनावों में अब तो भाजपा को कोई रैली या जन-सभा करने की जरूरत ही न पड़ेगी. जनता इतनी खुश है कि सारा वोट भाजपा (मोदी जी) को ही जानेवाला है. भ्र्ष्टाचार पूरी तरह से समाप्त. काला धन समाप्त. छापे भी मारे जा रहे हैं. बहुत सारे लोग पकडे जा रहे हैं. किसी नेता के पकड़े जाने की खबर अभीतक नहीं है. इन लोगों के पास कहाँ होता है काला धन!
- वैसे मैं डायरी लिखता नहीं पर आज का अनुभव लिखना जरूरी लगा.
जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

karan के द्वारा
January 17, 2017

बहुत ही बढ़िया आर्टिकल लिखा है.I m founder from kaisekarehindi.com

dr shobha bhardwaaj के द्वारा
November 21, 2016

श्री जवाहर जी मैं दिल्ली के ऐसे एरिया मैं रहती हूँ जो कॉमर्शल थोक बनता जा रहा है घरों के पीछे गोदाम हैं | मार्किट मेँ सन्नाटा था सेठ नोटों को ठिकाने लगाने के उपाय ढूंढने गए थे मेरे पति प्रेक्टिशनर है इसलिए कई बातें लोगों के मुहँ से सुनने को मिलती हैं जिस दिन नोटबन्दी की घोषणा हुई उस दिन हमारे घर के सामने साप्ताहिक सब्जी बाजार लगा था जिनसे मैं सब्जी या फल लेती हूँ वह परेशान थे एक फल विक्रेता ने मुझसे पूछा मरे पास जमा किये एक लाख के नॉट हैं क्या करूँ इसी तरह कई सब्जी वाले जो गरीबी की दुहाई देते रहते हैं सबके पास जमा की गयी इतनी बड़ी रकम थी जो कई लोअर मिडिल क्लास के बैंक अकाउंट में भी नहीं होगी रेल दुर्घटना का बहुत दुःख है इस्तीफा देने का प्रचलन पहले अच्छे नेता थे तब था अब तो पूछिये मत दो चार दिन में लीपा पोती हो जायेगी

    jlsingh के द्वारा
    November 22, 2016

    आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! मुझे यह समझ में नहीं आया रहा कि एक फल विक्रेता एक लाख रुपये के लिए क्यों परेशान हो रहा है. हमारे यहाँ तो छोटे दूकानदार, सब्जी-फल विक्रेता आदि सभी के कारोबार ठप्प हैं. सभी बैंक की लाइन में ही अपना समय गुजार रहे हैं. आम जरूरत की चीजों में भी भारी किल्लत है. अगर है भी तो ग्राहक नहीं है. हाँ, काले धन वालों को रुपये उड़ाने में कोई दिक्कत नहीं पेश आ रही. ५०० करोड़ की शादी के बारे में आपका क्या कहना है? कोई पैसे की कमी की वजह से सहदेई की तिथि को आगे बढ़ा रहा है,. फिर भी अगर २०१७ का सूरज नया सवेरा लेकर आता है तो हम सबको संतोष होगा. आपका अभिनन्दन !

HindIndia के द्वारा
November 17, 2016

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ….. very nice … Thanks for sharing this!! :) :)http://www.hindindia.com

    jlsingh के द्वारा
    November 21, 2016

    आभार आपका, अपने महत्वपूर्ण साइट से परिचित करने के लिए.

Shobha के द्वारा
November 16, 2016

श्री जवाहर जी दिल्ली में बैंकों के आगे लाइन लगी है दिहाड़ी मजदूर नहीं मिल रहे वह भी लाइन में लगा है उसे काले धन के संरक्षकों की तरफ ४०० रूपये मिलते हैं दुकानों पर सेठ है परन्तु नौकर लाइन में लगाये हैं सेठ जी का काला धन कमिशन लेकर जमा करवा रहे हैं हमारे यहाँ बाजर में छुट्टे मिल जाते हैं या एक कागज जिसके बल पर हम अगली बार बकाया ले सकते हैं हमारी काम वाली नहीं आ रही वह भी कमिशन लेकर नोट बदल रही हैं बहुत खुश है उसको एक ही कष्ट है महिलाओं की लाइन अलग क्यों नहीं है मोदी जी की निंदा जनता की परेशानियों का बखान करने में चैनल व्यस्त हैं कुछ समय से उनके पास भी नया समाचार नहीं था आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है

    jlsingh के द्वारा
    November 21, 2016

    आदरणीया डॉ शोभा जी, आप कहती लिखती हैं तो सच ही लिख रही होंगी. अब नया समाचार आ गया है. कानपुर के पास ट्रैन दुर्घटना. रविवार का दिन, बैंक बंद, अधिकांश एटीएम बंद! अब चैनेल वालों को नया समाचार मिल गया है. मैं नहीं जानता इसे आप किस तरह से लेंगी. लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर देश का नागरिक सप्ताह में एक दिन उपवास करने को तैयार हो गया था. मोदी जी के कहने पर देश के नागरिक बहुत कुछ कर रहे हैं, पर लाल बहादुर शास्त्री द्वारा ट्रैन दुर्घटना के बाद रेल मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने की बात भी किसी को याद है न! सादर!

Jitendra Mathur के द्वारा
November 16, 2016

आपकी यह दैनंदिनी सीधे दिल से निकली है जवाहर जी । आँखें भर आती हैं मेरी आजकल ग़रीब दिहाड़ी मजदूरों, अशक्त वृद्धों तथा असहाय गृहिणियों का हाल देखकर । मेहनत-मजदूरी करके जीवन-यापन करने वाले आजकल भिक्षावृत्ति को विवश हो गए हैं क्योंकि नोटों की किल्लत के कारण उन्हें काम ही नहीं दिया जा रहा है । हस्पतालों में इलाज तो दूर, मृत-व्यक्ति का शव प्राप्त करना तक दूभर हो गया है । कल ही समाचार पढ़ा था कि एक मृत-व्यक्ति की विधवा ने अपना मंगलसूत्र तक बेचकर कुछ धन जमा किया जिसे हस्पताल वालों को देकर उसके पति का शव प्राप्त किया जा सका । जागरण तथा ऐसे ही अन्य मंचों तथा सत्ता-समर्थक विभिन्न समाचार-पत्रों में जनसामान्य की पीड़ा के प्रति जो असंवेदनशीलता दिखाई देती है, उससे मेरे हृदय में नश्तर-से चुभते हैं । प्रधानमंत्री के प्रति अंधश्रद्धा ने उनके समर्थकों एवं भक्तों की संवेदनशीलता का हरण कर लिया है । कितने दूर हो गए हैं ये आम व्यक्ति की पीड़ा से ! खून-पसीने की कमाई जिस पर कर का भुगतान तक किया जा चुका हो, को काला धन करार देना तथा ईमानदारी से पेट पालने वालों को चोर करार देना पीड़ित जनसामान्य के आत्मसम्मान पर भी प्रहार है । जले पर नमक छिड़कना इसी को कहते हैं ।

    jlsingh के द्वारा
    November 21, 2016

    आदरणीय जितेंद्र माथुर जी, आपकी पीड़ा, जनसामान्य की पीड़ा, अपनी पीड़ा, सब कुछ देख सुनकर भी हम सभी चुप हैं, कराह भी नहीं रहे. अनुमति नहीं है. आपने सुना/पढ़ा होगा, रवीश कुमार को बैंकों की लेने से ग्राउंड रिपोर्टिंग करते समय तथाकथित राष्ट्रवादियों द्वारा कैसे धमकाया गया कि उन्हें लौट जाना पड़ा. हर जगह ऐसे राष्ट्रभक्त मौजूद है. लाइन में खड़े लोगों से मैंने भी सच्चाई जानने की कोशिश की है. खुदरा एवम थोक ब्यापारियों का भी हाल जाना है. सभी मजबूरी में मौन हैं. यह पीड़ा कब भयावह रूप लेगी कहना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट भी अब देशद्रोही हो गया है. और क्या कहें, मुझे भी बड़ा सम्हल कर लिखना पड़ता है. आप समझ सकते हैं. सादर!

rameshagarwal के द्वारा
November 11, 2016

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी मोदीजी ने एक ही तीर से आतंकवादियो के सहायता करने वाले,जाली नोट भेझने वाले और देश में गलत तरीके से धन अर्जित कर बिना टैक्स दिए जोड़े गए धन इकट्ठा करने वालो को चित करने में मोदी जी का कोइ शानी नहीं कुछ लोगो को छोड़ बाकी जनता खुश है थोड़ी बहुत दिक्कत होगी लेकिन जल्द सब टीक होगा.सुन्दर लेख और विवेचना के लिए आभार पुरे मीडिया में अमेरिका चुनाव की धूम थी की अचानक मोदीजी के नोट छा गए बिलकुल तुरुप का इक्का निकाल सबको अचंभित कर दिया.

    jlsingh के द्वारा
    November 12, 2016

    आदरणीय अग्रवाल साहब, जय श्रीराम! मोदी जी का यह तुरुप का पत्ता विधान सभा के चुनावों में चल गया तो उनसे बड़ा रणनीतिकार शायद खोजने पड़ेंगे. अन्यथा और लोग भी तो अपनी अपनी चालें चलेंगे ही. POK में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी अगर हमारे जवान उसी रफ़्तार से शहीद हो रहे हैं… अगर आतंकवादी, आतंक से बाज आये, अधिकारी घूस लेना बंद कर दे तो भारत स्वर्ग न हो जायेगा! आपकी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आभार!


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