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पत्रकारिता के जज्बे को सलाम!

Posted On 9 Apr, 2017 Social Issues में

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दर्शकों को रोज़ाना देश-दुनिया की खबरों से वाकिफ कराने वाली छत्तीसगढ़ के एक प्राइवेट न्यूज चैनल की 28 वर्षीय एंकर की जिंदगी में उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उन्हेंव अपने पति की एक सड़क हादसे में दर्दनाक मौत की खबर मिली. उससे भी दुखद बात यह रही कि इस हादसे की ब्रेकिंग न्यू्ज खुद उन्हेंम ही पढ़नी पड़ी. एंकर के इस अदम्यव साहस और कर्तव्यहनिष्ठाक की लोग भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं और उनके साहस को सलाम कर रहे हैं. उनके साथ बीती इस दर्दनाक घटना को लेकर लोग दुख भी जता रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी सुप्रीत कौर के पति हर्षद गावड़े के निधन पर दुख जताया है.
उक्तय मामला शनिवार की सुबह का है, जब प्राइवेट न्यूज चैनल IBC-24 पर लाइव न्यूज बुलेटिन के प्रसारण के दौरान न्यूज एंकर सुप्रीत कौर खबरें पढ़ रही थीं. इसी दौरान एक सड़क दुर्घटना की ब्रेकिंग न्यूज आई. एंकर सुप्रीत कौर को रिपोर्टर से बातचीत के दौरान ही अंदेशा हो गया कि इस हादसे में मरने वालों में उनके पति भी शामिल हैं. इस बेहद मुश्किल वक्त में भी सुप्रीत ने खुद को संभाले रखा और वे न्यूज बुलेटिन पढ़ती रहीं. सुप्रीत ने रिपोर्टर से बात करते हुए दर्शकों को हादसे की विस्तृत जानकारी भी दी.
दरअसल, राष्रीे य राजमार्ग- 353 पर लहरौद के पास एक ट्रक और रेनॉ डस्टर के बीच टक्कलर हुई थी. इस हादसे में कार में सवार पांच से तीन लोगों की मौत हो गई. मृतकों में एंकर के पति भी शामिल थे. हादसे में घायल अन्या दो लोगों को उपचार के लिए पिथौरा स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया.
दर्शकों को हादसे की पूरी जानकारी मुहैया कराने के बाद भी सुप्रीत ने पूरा न्यूोज बुलेटिन पढ़ा. इसके बाद वह स्टूडियो से बाहर आईं और फूट-फूटकर रोने लगीं और दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं.
सुप्रीत के एक सहकर्मी ने कहा, ‘सुप्रीत बहुत बहादुर हैं. पूरी टीम को उनके काम पर गर्व है, लेकिन आज जो हुआ उससे हम सब स्तब्ध हैं’. उनके एक और सहकर्मी ने जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीत को ब्रेकिंग न्यूसज पढ़ते ही यह अंदेशा हो गया था कि यह दुर्घटना उनके पति के साथ हुई है. बुलेटिन खत्मप करने के बाद उन्हों ने स्टूडियो से बाहर निकलते ही अपने रिश्ते दारों को फोन मिलाने शुरू कर दिए थे.’ उसने आगे बताया कि, हम सभी को उनके पति की मौत की खबर पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन हममें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उन्हें यह बता सकें.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ट्वीट कर सुप्रीत कौर के जज्बे को सलाम किया, जिन्होंने इस दुखद घड़ी में भी साहस के साथ अपना कर्तव्य निभाया. ट्विटर पर अन्यस लोग भी अपनी प्रतिक्रिया में उनके साहस को सलाम कर रहे हैं और उनके पति की मृत्युव पर शोक जाहिर रहे हैं…
सुप्रीत पिछले 9 साल से इस चैनल में न्यूज एंकर के तौर पर कार्यरत हैं. वह मूल रूप से भिलाई की रहने वाली हैं. सालभर पहले ही उनकी शादी हर्षद गावडे़ से हुई थी.
पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव लिखते हैं, ”पत्रकारों को गाली देने वालों को इस महिला एंकर सुप्रीत कौर की कहानी से शायद कुछ सबक मिले, जिन्होंने पेशेवर ज़िम्मेदारी की मिसाल कायम करते हुए एक सड़क हादसे में अपने पति की मौत की खबर को भी अपनी भावनाओं पर काबू पाते हुए सहज ढंग से पढ़ा.”
रोहित ने फेसबुक पर लिखा, ”सुप्रीत कौर के जज़्बे को सलाम करते हैं. भगवान ऐसे वक्त में सुप्रीत को शक्ति दे.”
सुप्रीत कौर के अपने पेशे के प्रति जज्बे को जितनी प्रशंशा की जाय कम है!

सुप्रीत कौर के साथ जरा दूसरी महिला पत्रकारों की भी चर्चा कर लें.
अंजना ओम कश्यप जो वर्तमान में आजतक की एंकर हैं काफी बोल्ड और साहसी हैं. लाइव रिपोर्टिंग के साथ साथ भीड़ भाड़ पर नियंत्रण रखते हुए कई बार परेशानियों से गुजरती हैं पर हिम्मत नहीं हारती. उन्होंने महिला और पुरुष में भेदभाव की लड़ाई अपने घर से ही और बचपन से ही लड़ती आई है. इसका खुलाशा उन्होंने हाल ही में एक साक्षात्कार में बतलाया था. मनपसंद की खबर न बताने पर इन्हें सोसल मीडिया में भी कई बार अभद्रता का शिकार होना पड़ता है. ‘आजतक’ के ‘थर्ड डिग्री’ कार्यक्रम में भी काफी बोल्ड अंदाज मंा कड़े सवाल करती थीं. कश्मीर की बर्फबारी में भी इन्हें मैंने फ़िल्मी अंदाज में लाइव रिपोर्टिंग करते हुए देखा है. समाजवादी पार्टी की हार के बाद जब अंजना शिवपाल यादव के पास हाल चाल पूछने गयी थी तब शिवपाल यादव के भद्दे कमेन्ट को भी बखूबी बर्दाश्त कर गयी थी. अंजना आरा बिहार में जन्मी और रांची में पढ़ी-बढी है. इनके अलावा श्वेता सिंह तथा अन्य कई महिला रिपोर्टर आजतक चैनेल पर हैं जो हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती हैं और दर्शकों के दिल में जगह बना पाती हैं. श्वेता सिंह का एक कार्यक्रम ईश्वर एक खोज बहुत ही लोकप्रिय हुआ है. यह भी पटना बिहार की हैं.
NDTV छोड़ चुकी बरखा दत्त काफी चर्चित नाम है, जो कई बार विवादों में भी घिरी हैं पर रिपोर्टिंग और लाइव कवरेज का जज्बा काबिले तारीफ़ ही कही जायेगी. कारगिल युद्द के समय सैनिक बंकर से रिपोर्टिंग का साहसिक प्रयास एक यादगार है. इसके अलावा अन्य विषम परिस्थितियों की कवरेज से भी वह नहीं घबरातीं. NDTV की ही सिक्ता देव और निधि कुलपति की रिपोर्टिंग का अंदाज आकर्षित करता है.
ABP न्यूज़ में भी काफी महिला रिपोर्टर हैं जो हर परिस्थिति में एंकरिंग और लाइव रिपोर्टिंग करती हैं. कुछ नाम जो मुझे याद आ रहे हैं उनमे हैं नेहा पन्त, रूमाना, विनीता जादव, सरोज सिंह, चित्रा त्रिपाठी आदि ऐसी है जो हर सम-बिषम परिस्थितियों में रिपोर्टिंग करती हैं जिन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
आपलोगों को याद होगा अगस्त २०१३ का मामला जब मुंबई के पास बंद पड़े शक्ति मिल में रिपोर्टिंग के दौरान एक महिला रिपोर्टर, जिसका सामूहिक बलात्कार हुआ था…. और भी कई ऐसे मामले हैं जहाँ महिला पत्रकारों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है तो कहीं पर पेशे से जुड़े अनावश्यक समझौते करने पड़ते हैं.
महिला पत्रकारों की श्रेणी में और भी कई नाम है जिनका नाम हम सभी आदर के साथ लेते हैं वे हैं मृणाल पाण्डे, तवलीन सिंह, शोभा डे, नीरजा चौधरी, आदि आदि!
महिलाओं के बारे में ऐसी धारणा है कि वे मिहनती और सहनशील होती हैं, पुरुषों के साथ महिलाओं से भी खुलकर बात कर सच निकलवा लेती हैं. ज्यादातर मामलों में यह भ्रष्ट नहीं होतीं.(अपवाद हर जगह होते हैं)… सरकार और समाज को चाहिए कि पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करें. उन्हें सच कहने से न रोकें क्योंकि वही लोग लोकतंत्र के चौथे खम्भे के रूप में विराजमान हैं जो सरकार के साथ साथ विरोधियों को भी कटघरे में खड़ा करते हैं. महिला सुरक्षा की बात आज हर जगह हो हो रही हैं उन्हें सुरक्षित अपना काम करने दें. उनके सामने अपनी परेशानियाँ खुल कर रक्खें… ताकि वे हमारी आपकी बात को सरकार और जनता तक पहुंचा सकें. लोकतंत्र में इनकी अपनी अलग महत्ता है और इनका सम्मान करना हम सबका कर्तव्य है. यह भी ख्याल रखना चाहिए कि वे भी हमारी आप की तरह मनुष्य हैं जिनकी अपनी भावनाएं और विचार होते हैं, उनके भी अपने दुःख सुख होते हैं. हर परिस्थिति में वे अपना काम करते हैं. मैंने कई बार कहा है – रिपोर्टिंग का काम बहुत कठिन है. हर बाढ़, तूफ़ान, सूखा, गर्मी, आदि प्राकृतिक विपदाओं के साथ मानव जनित दुर्घटनाओं का भी लाइव रिपोर्टिंग करते/करती हैं. अभी हाल ही में रामनवमी का त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ जमशेदपुर में भी मनाया गया. आमलोगों को थोड़ी परेशानी अवश्य हुई पर ये पत्रकार सारे करतब/करिश्मे को कवर करते रहे और रिपोर्ट अख़बारों और टी वी में देते रहे. एक बार मन से उन्हें याद ही कर लें. जय हिन्द! वन्दे मातरम ! जय श्री राम!

- जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashasahay के द्वारा
April 21, 2017

आदरणीय श्री जवाहरलाल सिंह जी,महिला पत्रकारों के पत्रकारिता के पवित्र जज़्बेका आपने सहृदयतापूर्वक आकलन किया है। एक हाल की सत्य घटना परआधारित प्रस्तुत  लेखके लिए आभार एवम् साप्ताहिक सम्मान के लिए बधाई।

    jlsingh के द्वारा
    April 22, 2017

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आदरणीया आशा सहाय जी! वीएस तो महिलाएं हर क्षेत्र में आज अग्रसर हैं और अच्छा नाम कमा रही हैं पर प्रसंगवश कुछ प्रतिष्ठित महिला पत्रकारों का जज्बा तारीफ के काबिल है. सादर!

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन और ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने पर हार्दिक बधाई ! आपका मार्मिक लेख और उसपर संवेदनशील ब्लॉगर मित्रों की दिल से निकली प्रतिक्रिया सभी कुछ दिल को छू लेने वाली है ! सादर आभार !

    jlsingh के द्वारा
    April 21, 2017

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आप जैसे सुधि और नियमित ब्लॉगर के लगातार प्रयास से ही याग जगरण जंक्शन का मंच अनूठा बना हुआ है. मुझे मिले सम्मान के लिए आप सभी ब्लॉगर्स के साथ साथ जागरण जंक्शन टीम का भी आभार व्यक्त करता हूँ. सादर!

Shobha के द्वारा
April 16, 2017

श्री जवाहर जी हमें देश दुनिया से मिलाने वाले हमारे ही अपने लोग हैं जब भी कभी किसी खास विषय पर बहस होती है रिकाडिंग के समय अत्यंत तनाव होता है एंकर की हिम्मत है स्थिति कैसे सम्भालते हैं खास क्र लाइव शो में भुत अच्छा लेख

    jlsingh के द्वारा
    April 16, 2017

    आदरणीय शोभा जी, पहले तो मैं रिपोर्टिंग ब्यवसाय को सही ढंग से निभाने की कला की तारीफ करता हूँ. उनमे भी महिला रिपोर्टर्स की भागीदारी को और भी कठिन मानता हूँ. इसीलिये इस आलेख में मैंने सिर्फ महिला रिपोर्टर्स और ऐंकर्स की चर्चा की है. सुप्रीत कौर को सम्बल के लिए हम सब प्रार्थना ही कर सकते हैं. आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार!

    Shobha के द्वारा
    April 20, 2017

     श्री जवाहर जी मेरा पी सी खराब हैं लैपटाप छोटा है मुश्किल से काम कर रही हूँ में सुप्रीत कोर सही मायने में एंकर है बरखा दत्त बायस रहती हैं अंजना ओम कश्यप मुझे बहुत प्रिय रही है ऑ

    jlsingh के द्वारा
    April 21, 2017

    जी आदरणीया शोभा जी, बरखा दत्त के बारे में मैंने लिखा है – इधर कई कारणों से वह विवादों में रही हैं पर शुरू शरू में वह भी एक आइकॉन की तरह रिपोर्टिंग करती थी. बढ़ ग्रस्त उड़ीसा के सुदूर क्षेत्र से और कारगिल से – आसान काम नहीं था … अंजना ॐ कश्यप के बारे में आप लिख ही चुकी हैं… सादर!

rameshagarwal के द्वारा
April 15, 2017

जय श्री राम आदरणीय सिंह जी आज 3 १/2 महीने के बाद इस फारम को खोला बहुत मिस कर रहे थे अभी लेख लिखने में असमर्थ हैं बहुत ही कमजोरी है.हमने ये खबर टीवी में देखी सुप्रीत कौर ने बहुत हिम्मत का काम करते कर्तव्य को निभाया.भगवन उनके पति की आत्मा को शांति प्रदान करे और उन्हें इस हिम्मत के लिए अपना आशीर्वाद..बहुत दिनों बाद आपका लेख पढ़ा

    jlsingh के द्वारा
    April 16, 2017

    आप अब पूरी तरह स्वस्थ हैं, जानकर अच्छा लगा आदरणीय अग्रवाल साहब. कमजोरी तो रहेगी अपने स्वास्थ्य का ख्याल रक्खें वैसे आपके वाहट्सएप्प से बहुत साड़ी जानकारियां मिल जाती हैं. सुप्रीत कौर के साथ हम सबकी संवेदना जुडी है. ईश्वर उन्हें हिम्मत और सम्बल देंगे! ब्लॉग पढ़ने और प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार !

yamunapathak के द्वारा
April 13, 2017

ईश्वर सुप्रीत के दिवंगत पतिदेव की आत्मा को शान्ति दें और उन्हें इस दुःख भरे क्षण में साहस सम्बल दें .

    jlsingh के द्वारा
    April 14, 2017

    जी आदरणीय हम सब यही कहते हैं हैं की दिवंगत की आत्मा को शांति मिले और सुप्रीत कौर को दुःख से लड़ने की सहन शक्ति!

yamunapathak के द्वारा
April 13, 2017

आदरणीय जवाहर जी सदर नमस्कार यह ब्लॉग बहुत ही संवेदनशीलता से लिखा है आपने .आपके प्रत्येक शब्दों को नमन पत्रकारिता के इस ज़ज़्बे को भी हम सब नमन करते हैं . साभार

    jlsingh के द्वारा
    April 14, 2017

    ब्लॉग पर आकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय यमुना जी!

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
April 13, 2017

मैंने महसूस किया है की अपने पेशे और कैरियर पर ध्यान केंद्रित रखने वालो लोग परिवार, समाज के प्रति तुलनात्मक रूप से ज्यादा सम्बेदंशील नहीं होते है / इसलिए वे इस तरह के साहस का परिचय देते है / अपने परिवार को अपने पेशे और कैरियर से ज्यादा या बराबर महत्व देने वाले लोग ऐसा साहस नहीं दिखा पाते / एक प्रशंसनीय लेख के लिए बधाई /

    jlsingh के द्वारा
    April 13, 2017

    ब्लॉग पर आने और अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमार सिंह जी!

    jlsingh के द्वारा
    April 13, 2017

    सॉरी, आदरणीय राजेश कुमार श्रीवास्तव जी! गलती से श्रीवास्तव की जगह सिंह टाइप हो गया …..

sadguruji के द्वारा
April 12, 2017

आदरणीय सिंह साहब, बहुत मार्मिक घटना को आपने विस्तारपूर्वक लिखा है ! हम सबकी हार्दिक संवेदनाएं संकट की बड़ी घड़ी झेल रहीं सुप्रीत कौर के साथ हैं ! ईश्वर दुर्घटना मे मृत सभी आत्माओं को शान्ति प्रदान करें ! सादर आभार !

    jlsingh के द्वारा
    April 12, 2017

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपकी और हमारी संवेदनाएं सुप्रीत कौर के साथ है. वास्तव में हम सभी कहीं न कहीं जोखिम से जुड़े होते हैं. जोखिम का सामना करना ही बहादुरी है. आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार!

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
April 12, 2017

आदरणीय जवाहर जी अभिवादन । आपका लेख पढा ” पत्रकारिता के जज्बे को सलाम ” , अच्छा लगा । आज इसी पेशेवर सोच की जरूरत है जिसका उदाहरण चैनल की महिला पत्रकार सुप्रीत कौर ने सभी के सामने रखा । वाकई वह सराहना की पात्र हैं । ईश्वर उन्हें शक्ति प्रदान करें ।

    jlsingh के द्वारा
    April 12, 2017

    आदरणीय बिष्ट साहब, सादर अभिवादन! आपने ब्लॉग को पढ़ा और पत्रकारिता के जज्बे को सराहा यह वाकई तारीफ की बात है. कमोबेश हमलोग भी अर्ध पत्रकारिता तो कर ही रहे हैं. इसलिए हमपेशा लोगों की जोखिम और जज्बे को समझने की जरूरत तो है ही. आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया का आभार!


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