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गोरखपुर में बच्चों की मौत

Posted On 13 Aug, 2017 न्यूज़ बर्थ में

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर सरकारी अस्पताल में पांच दिनों के भीतर हुई 60 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत हादसा नहीं हत्या है – यह बातें नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ट्वीट कर कहा है. कैलाश सत्यार्थी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया ट्विटर पर दी है. उन्होंने कहा है कि बिना ऑक्सीजन के 30 बच्चों की मौत हादसा नहीं, हत्या है. क्या हमारे बच्चों के लिए आजादी के 70 सालों का यही मतलब है. कैलाश ने एक और ट्वीट में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए लिखा है कि आपका एक निर्णायक हस्तक्षेप दशकों से चली रही भ्रष्ट स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक कर सकती है ताकि ऐसी घटनाओं को आगे रोका जा सके.
गोरखपुर पिछले 20 सालों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चुनाव क्षेत्र है. मुख्यमंत्री ने इस मामले में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की खबरों से इनकार कर दिया. जबकि अस्पताल प्रशासन के साथ साथ अस्पताल के बाल रोग विभाग को इसकी सूचना चिट्ठी के जरिए दी गई थी. इस चिट्ठी में कहा गया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी है. जान गंवाने वाले बच्चों में 5 नवजात शिशु भी थे. इन मौतों की वजह आधिकारिक तौर पर भले ही नहीं बताई जा रही हो लेकिन कहा जा रहा है कि इसके पीछे ऑक्सीजन की कमी ही कारण है. जबकि, यु पी सरकार का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई. अब आइये जानते है उन दो चिट्ठियों के बारे में –
पहली चिट्ठी एक अगस्त की है जो अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी ने लिखी थी जिसमें लिखा गया है कि वे सिलिंडर की सप्लाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि 63 लाख रुपये से ज़्यादा का बकाया हो गया है. ये चिट्ठी बी आर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ साथ गोरखपुर डी एम और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग महानिदेशक को भेजी गई है.
दूसरी चिट्ठी 10 अगस्त की है जो ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने लिखी थी. ये कर्मचारी अस्पताल में सिलिंडर देने का काम करते थे. ये चिट्ठी अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख को संबोधित करते हुए एक चिट्ठी लिखी गई थी जिसमें ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई कम होने की जानकारी दी गई है.
इस बीच उसी हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. कफील अहमद का नाम सुर्ख़ियों में आया है जिन्होंने अपने बल बूते काफी ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराये और उसके लिए अपने पास से नगद रुपये भी दिए. फिर भी उन्हें अफ़सोस है कि वे मासूमों की जान नहीं बचा सके.
शनिवार को जायजा लेने पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह सीधे सीधे लापरवाही का मामला है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा दे देना चाहिए. मौके पर पहुंचे इस डेलीगेशन में आजाद के अलावा, आरपीएन सिंह, राज बब्बअर और प्रमोद तिवारी मौजूद थे. कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है… और ये प्रतिक्रियाएं भी राजनीतिक होती हैं इसमें कोई दो राय नहीं है.
गोरखपुर बी आर डी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत की वजह ऑक्सीजन सिलिंडर ख़त्म होने की बात सामने आई है. मेडिकल कॉलेज के सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई यूनिट में ज़िलाधिकारी के आदेश पर नई संस्था मोदी फ़ार्मा ने सप्लाई शुरू की है जबकि पहले पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी सप्लाई करती थी जिसका 63 लाख रुपये से ज़्यादा बकाया है. इसके बाद उसने सप्लाई बंद कर दी.
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि सभी मौतें ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से नहीं हुई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति प्रकरण की जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. योगी ने कहा कि तथ्य को मीडिया सही तरीके से पेश करे. सीएम योगी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हादसे से ज्यादा अपने कार्यों पर जोर दिया. उन्होंने अस्पताल के दौरे के अलावा पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य इंतजाम पर सफाई दी.
इस बीच गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन हम उन्हें पहले ही निलंबित कर चुके हैं और उनके खिलाफ जांच भी शुरू की गयी है. हालाँकि इन्ही स्वास्थ्य मंत्री का बेतुका बयान भी सुर्ख़ियों में था कि अगस्त में बच्चे मरते ही हैं. इसमें कितनी संवेदनहीनता है साफ़ साफ़ नजर आ रहा है. यही हादसा दिल्ली या किसी गैर भाजपा सरकार के शासन वाले राज्य में होता तो तुरन्त ही मुख्य मंत्री का इस्तीफ़ा मांग लिया जाता और भाजपा के ही कार्यकर्ता उस सरकार की ईंट से ईंट बजा देते.
इलाहाबाद में एक सभा में भी योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनके गृह नगर में बच्चों की मौत गंदगी भरे वातावरण और खुले में शौच के चलते हुई है. आदित्यनाथ ने कहा, “मच्छरों से फैलने वाली कई बीमारियां हैं, जिसमें इनसेफलाइटिस भी शामिल है.
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला 7 अगस्त को ही शुरू हो गया था. 9 तारीख की आधी रात से लेकर 10 तारीख की आधी रात को 23 मौतें हुईं जिनमें से 14 मौतें नियो नेटल वॉर्ड यानी नवजात शिशुओं को रखने के वॉर्ड में हुई जिसमें प्रीमैच्योर बेबीज़ रखे जाते हैं. शनिवार को अस्प ताल में ऑक्सीेजन सिलिंडर सप्लाुई करने वाली कंपनी पुष्पाज सेल्सन के मालिक मनीष भंडारी के घर पर छापा मारा गया था. मुख्यमंत्री खुद मौके पर नहीं पहुंचे इसका लोगों में अच्छा खासा रोष है. जबकि दो दिन पहले वे उसी अस्पताल में निरीक्षण और मीटिंग करने गए थे.
सवाल यही है कि इस हादसे का जिम्मेवार कौन है? एक प्रिंसिपल को तो सूली पर चढ़ा दिया गया. उनके बारे में यह भी खबर छपी है कि वे ऑक्सीजन सप्लायर से कमीसन लेते थे. कमीसन नहीं मिलने की वजह से ही सप्लायर का पैसा रोका गया.
बच्चों की मौत के बाद अब मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी बता रहे हैं कि मैडम (मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजीव मिश्र की पत्नी) सामान्य रवायत से दो फीसद ज्यादा कमीशन चाहती थीं, इसीलिए उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान लटका रखा था. चिकित्सा शिक्षा विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि कंपनी अपना बकाया मांग रही थी जबकि मैडम ज्यादा कमीशन का तगादा कर रही थीं. कर्मचारियों के मुताबिक प्रदेश के मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर 10 फीसद का कमीशन तय है. आपूर्ति करने वाली कंपनियां और आपूर्ति मंजूर करने वाले अधिकारियों के बीच बिना मांगे ईमानदारी से यह लेन-देन चलता रहता है. यह भ्रष्टचार मुक्त भारत का सच.
अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले अंकुर बताते हैं कि टैंकर के जरिये सप्लाई की जाने वाली लिक्विड ऑक्सीजन औसतन चार से साढ़े चार रुपये प्रति लीटर की दर पर मिलती है, जबकि 30 लीटर ऑक्सीजन का सिलेंडर 250 रुपये यानी करीब आठ रुपये प्रति लीटर की दर से मिलता है. सिलेंडर का दाम दोगुना होने के कारण 10 फीसद की दर से कमीशन भी दोगुना हो जाता है. मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी बताते हैं कि इसीलिए ऑक्सीजन वाले सिलेंडरों की खपत सामान्य जरूरत से ज्यादा कराई जाती है.
दो पत्र ऐसे हैं जो बीआरडी अस्पताल प्रशासन के दावों की पोल खोलने को पर्याप्त हैं. कंपनी ने बकाया भुगतान का हवाला देकर आक्सीजन देने से मना कर दिया था. यदि कहा जाए कि इन मौतों के लिए अधिकारियों की लापरवाही पूरी तरह जिम्मेदार है तो यह गलत नहीं होगा. मेडिकल कालेज के नेहरू अस्पताल में पुष्पा सेल्स कंपनी द्वारा लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई की जाती है.
चाहे जो भी कारण हो दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए. भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी है कि हम मासूमों की जिन्दगी से भी कोई वास्ता नहीं रह. काश कि कभी इनके परिजन भी ऐसी संकट से जूझ रहे होते! पर इनके परिजन तो प्राइवेट हॉस्पिटल में सुरक्षित रहते हैं. जनता की शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की होती है. सरकर इसीलिए तो कर वसूल करती है ताकि जनता को सुविधा मुहैया कराई जा सके पर यहाँ तो ऊपर से नीचे तक बंदर बाँट चलता रहता है.
हर बात में ७० साल का इतिहास और कांग्रेस शासन को दोषी ठहराना गलत बात है. अब आपकी सरकार तीन साल से केंद्र में है. उत्तर प्रदेश में भी अप्रत्याशित बहुमत मिला है. आपने कहा था गद्धामुक्त सड़क वह भी तस्वीरें बयान करती हैं, गड्ढामुक्त हुआ या गद्धायुक्त हुआ है. आदरणीय योगी जी और मोदी जी अभी भी देश को आपसे बहुत कुछ अपेक्षा है कृपया जनता को निराश मत कीजिए. उम्मीद है इस बार १५ अगस्त को कुछ और नई घोषणाएं करंगे. नए भारत के लिए अपने बढ़ते क़दमों की आहट भी अवश्य ही सुनायेंगे! जय हिन्द!
– जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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