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जो देखता हूँ, वही लिखता हूँ

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jlsingh


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एक दिया सैनिक के नाम !

Posted On: 27 Oct, 2016  
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social issues कविता में

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आर्तनाद

Posted On: 26 Oct, 2016  
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कविता में

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युद्ध हल नहीं हो सकता

Posted On: 25 Sep, 2016  
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Junction Forum Politics social issues में

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किसी भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया पोस्ट नहीं हो रही

Posted On: 16 Sep, 2016  
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Junction Forum में

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हिंदी गौरव (हिंदी दिवश पर विशेष)

Posted On: 14 Sep, 2016  
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Hindi Sahitya Junction Forum Special Days में

6 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया सरिता बहन, सादर अभिवादन! आपकी प्रतिक्रिया मेरे विचार को समर्थन करती है. बिहार, झाड़खंड में कई जगहों में इस साल भी झंडा जुलूस के दौरान अप्रिय वारदातें हुई है... लोगों को परेशानियां उठानी पड़ी है , पर तथाकथित भक्तों ने अपने शौर्य और शक्ति का प्रदर्शन कर खुद का और कुछ लोगों का मनोरंजन किया है. प्रशाशन परेशन रहा ... लोग परेशन रहे... इतनी परेशानी तो लोगों को धर्म के नाम पर झेलनी ही चाहिए... मैं भी बजरंग बली का भक्त हूँ ...अपने घर में ध्वज स्थापित करता हूँ नित्य दिन पूजा भी करता हूँ पर मेरे कारन किसी को परेशानी क्यों हो... आस्था और आराधना अलग चीज है प्रदर्शन बिलकुल अलग! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय यतीन्द्र पांडेय जी, आपकी मनभावन प्रतिक्रिया से मन खुश हो गया! अब जागरण जंक्शन पर पहले जैसा माहौल नहीं रहा. लिखनेवाले ही ज्यादा हैं एक दुसरे का पढ़कर रसास्वादन और सुधारात्मक प्रतिक्रिया वाले सुधीजन नहीं रहे. राजनीतिक विषयों में उलझकर हम सभी रह गए हैं. जागरण जंक्शन भी लेखकों/ब्लॉगरों की पहचान करने और उन्हें सम्मानित करने में अब ज्यादा रूचि नही ले रहा. प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं होती. विज्ञापनों की भरमार है. तकनीकी दिक्कत से यह मंच हमेशा घिरा रहता है कभी प्रतिक्रिया पोस्ट नही होती तो अधिकांश के लैपटॉप या मोबाइल पर यह साइट नहीं खुलता फिर भी हमारे जैसे पुराने कुछ ही लोग बचे हैं और नियमित लिखा भी रहे हैं वासे मैं भी फेसबुक पर ही ज्यादा समय ब्यतीत करने लगा हूँ. वहां भी अच्छी अच्छी रचनाएँ पढने को मिल जाती हैं. आपका बहुत बहुत आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

टाटा द्वारा सुनियोजित कॉलोनियों में हर जाति सम्प्रदाय और क्षेत्र के लोग साथ-साथ रहते हैं और हर एक के पारंपरिक त्योहार में एक दूसरे का साथ निभाते हैं। यहाँ पर्याप्त मात्रा में शिक्षण-संस्थान हैं, अस्पताल हैं, पार्क हैं, खेल-कूद के मैदान भी है। गोशालाएं हैं, फल सब्जियों के लिए भी खेतों में उत्तम ब्यवस्था है। सब्जी मंडी के साथ-साथ कृषि उत्पादन बाजार समिति की भी मंडियां हैं। यहाँ मंदिर, मस्जिद, गुरद्वारा, गिरजाघर और फायर टेम्पल भी है। यहाँ कब्रिस्तान और श्मशान का कोई झगड़ा नहीं है। बिजली सड़क पानी की ब्यवस्था सर्वसुलभ है। हर प्रकार के आस्थावान लोगों के प्रमुख त्योहारों में अबाधित बिजली-पानी की सुविधा प्रदान की जाती है।

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

आदरणीया डॉ. शोभा जी, सादर अभिवादन! प्रधान मंत्री के शब्दों में - नोटबंदी के खिलाफ कोई पार्टी नहीं, विरोधी सिर्फ तरीके पर सवाल उठा रहे हैं. इन्ही सवालो का जवाब तो प्रधान मंत्री को संसद में देना है जिससे वे बचाना छह रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है. अगर वे संसद में बोलने लगेंगे तो संसद के सभी सांसद शांत होकर सुनेंगे. प्रधान मंत्री से अच्छा वक्त अभी कोई दूसरा नहीं है, यह आप भी समझती हैं. लेकिन एकतरफा संवाद बोरिंग होता है. जितना वे बहार बोलते हैं वे न बोलकर भी अपने काम से लोगों को समझ सकते हैं. इंतजार तो सब लोग धैर्य पूर्वक कर रहे हैं. अभी तक जनता अनुशासित है और अच्छे भविष्य की कामना कर रही है. मगर जिसकी रोजी रोटी पर ओरहर हो रहा है वह चीखेगा ही. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी काले धन और नकली नोटों पर अंकुश मनमोहन सरकार भी लगाना चाहती थी लेकिन उनके पास लोकसभा में अपना स्वयम का बहुमत नहीं था यह काम मोदी जी द्वारा किया गया इनके पास बहुमत है मोदी जी के कदम में कितनी भी कमियां निकालें लेकिन आम गरीब बहुत खुश है संसद में ही शोर मचा कर उनको बोलने से रोका जा सकता है सांसद अपनी बात कहना चाहते हैं परन्तु सत्ता पक्ष को बोलने नहीं दंगे आप गौर करियेगा एक महिला आवाज लगातार नारे लगाती सुनाई देती है २०१० में सभी सांसदों ने कुछ नियमों पर स्वीकृति दी थी जिनके तहत संसद चलेगी पर शोर की स्थिति वही है बाहर अच्छा विवेचनात्मक लेख जनता में बोलना अलग है संसद में मर्यादा को तोड़ते सांसदों में बोलना और बात

के द्वारा:

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी इतनी सुन्दर विवेचना आपने दी की बहुत अच्छा लगा.ये फैसला इतना गोपनीय था की जरा सा पता चलने में ही मकसद ख़तम हो जाता इसलिए बहुत तकलीफ हुई लेकिन देश हित में जनता इसके लिए राजी थी जब हम लोग भगवान् जी में भी गलतियां निकलने लगते तो मोदीजी और सरकार तो बहुत चोटी चीज है लेकिन इंग्लिश मीडिया और बीजेपी विरोधी मीडिया छोड़ सबने इसे सरहहा हाँ इस मामले में संसद वाधित करना दुर्भाग्यपूर्ण कुओंकी इन की नेताओं के पास ही सबसे कला धन है माया,ममता,राहुल मुलायम की परेशानी समझ में आती नितीश ने इस का समर्थन कर बिहार में नई राजनीती का संकेत दिया.देखिये २ रे विश्व युद्ध में ब्रिटेन के लोगो ने देश के लिए बहुत कुर्बानी दी थी देश्वशी इसके लिए तैयार है.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री जवाहर जी मैं दिल्ली के ऐसे एरिया मैं रहती हूँ जो कॉमर्शल थोक बनता जा रहा है घरों के पीछे गोदाम हैं | मार्किट मेँ सन्नाटा था सेठ नोटों को ठिकाने लगाने के उपाय ढूंढने गए थे मेरे पति प्रेक्टिशनर है इसलिए कई बातें लोगों के मुहँ से सुनने को मिलती हैं जिस दिन नोटबन्दी की घोषणा हुई उस दिन हमारे घर के सामने साप्ताहिक सब्जी बाजार लगा था जिनसे मैं सब्जी या फल लेती हूँ वह परेशान थे एक फल विक्रेता ने मुझसे पूछा मरे पास जमा किये एक लाख के नॉट हैं क्या करूँ इसी तरह कई सब्जी वाले जो गरीबी की दुहाई देते रहते हैं सबके पास जमा की गयी इतनी बड़ी रकम थी जो कई लोअर मिडिल क्लास के बैंक अकाउंट में भी नहीं होगी रेल दुर्घटना का बहुत दुःख है इस्तीफा देने का प्रचलन पहले अच्छे नेता थे तब था अब तो पूछिये मत दो चार दिन में लीपा पोती हो जायेगी

के द्वारा:

आदरणीय जितेंद्र माथुर जी, आपकी पीड़ा, जनसामान्य की पीड़ा, अपनी पीड़ा, सब कुछ देख सुनकर भी हम सभी चुप हैं, कराह भी नहीं रहे. अनुमति नहीं है. आपने सुना/पढ़ा होगा, रवीश कुमार को बैंकों की लेने से ग्राउंड रिपोर्टिंग करते समय तथाकथित राष्ट्रवादियों द्वारा कैसे धमकाया गया कि उन्हें लौट जाना पड़ा. हर जगह ऐसे राष्ट्रभक्त मौजूद है. लाइन में खड़े लोगों से मैंने भी सच्चाई जानने की कोशिश की है. खुदरा एवम थोक ब्यापारियों का भी हाल जाना है. सभी मजबूरी में मौन हैं. यह पीड़ा कब भयावह रूप लेगी कहना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट भी अब देशद्रोही हो गया है. और क्या कहें, मुझे भी बड़ा सम्हल कर लिखना पड़ता है. आप समझ सकते हैं. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी दिल्ली में बैंकों के आगे लाइन लगी है दिहाड़ी मजदूर नहीं मिल रहे वह भी लाइन में लगा है उसे काले धन के संरक्षकों की तरफ ४०० रूपये मिलते हैं दुकानों पर सेठ है परन्तु नौकर लाइन में लगाये हैं सेठ जी का काला धन कमिशन लेकर जमा करवा रहे हैं हमारे यहाँ बाजर में छुट्टे मिल जाते हैं या एक कागज जिसके बल पर हम अगली बार बकाया ले सकते हैं हमारी काम वाली नहीं आ रही वह भी कमिशन लेकर नोट बदल रही हैं बहुत खुश है उसको एक ही कष्ट है महिलाओं की लाइन अलग क्यों नहीं है मोदी जी की निंदा जनता की परेशानियों का बखान करने में चैनल व्यस्त हैं कुछ समय से उनके पास भी नया समाचार नहीं था आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है

के द्वारा: Shobha Shobha

आपकी यह दैनंदिनी सीधे दिल से निकली है जवाहर जी । आँखें भर आती हैं मेरी आजकल ग़रीब दिहाड़ी मजदूरों, अशक्त वृद्धों तथा असहाय गृहिणियों का हाल देखकर । मेहनत-मजदूरी करके जीवन-यापन करने वाले आजकल भिक्षावृत्ति को विवश हो गए हैं क्योंकि नोटों की किल्लत के कारण उन्हें काम ही नहीं दिया जा रहा है । हस्पतालों में इलाज तो दूर, मृत-व्यक्ति का शव प्राप्त करना तक दूभर हो गया है । कल ही समाचार पढ़ा था कि एक मृत-व्यक्ति की विधवा ने अपना मंगलसूत्र तक बेचकर कुछ धन जमा किया जिसे हस्पताल वालों को देकर उसके पति का शव प्राप्त किया जा सका । जागरण तथा ऐसे ही अन्य मंचों तथा सत्ता-समर्थक विभिन्न समाचार-पत्रों में जनसामान्य की पीड़ा के प्रति जो असंवेदनशीलता दिखाई देती है, उससे मेरे हृदय में नश्तर-से चुभते हैं । प्रधानमंत्री के प्रति अंधश्रद्धा ने उनके समर्थकों एवं भक्तों की संवेदनशीलता का हरण कर लिया है । कितने दूर हो गए हैं ये आम व्यक्ति की पीड़ा से ! खून-पसीने की कमाई जिस पर कर का भुगतान तक किया जा चुका हो, को काला धन करार देना तथा ईमानदारी से पेट पालने वालों को चोर करार देना पीड़ित जनसामान्य के आत्मसम्मान पर भी प्रहार है । जले पर नमक छिड़कना इसी को कहते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आपके विचार, विश्लेषण एवं मूल्यांकन सभी सहमति योग्य हैं आदरणीय जवाहर जी । अब तो राजनीति करने वाले अधिकांश लोग राजनीति को युद्ध ही समझते हैं और इसीलिए उसमें विजय प्राप्त करने के लिए प्रत्येक हथकंडे को उचित ठहराते हैं । मेरा मानना यह है कि आपसी फूट के कारण समाजवादी पार्टी की पराजय एक प्रकार से सुनिश्चित लगती है और इसका अधिकाधिक लाभ बहुजन समाज पार्टी उठा सकती है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम घोषित न करके तथा विभिन्न प्रकार के योग्य-अयोग्य दलबदलुओं को आश्रय देकर अपनी स्थिति दुर्बल ही की है । मुझे अतुल जी का विचार भी ठीक लगता है कि रीता बहुगुणा ने संभवतः कांग्रेस द्वारा शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रत्याशी घोषित किए जाने से आहत होकर पाला बदला है । लेकिन यदि उनके इस निर्णय के पीछे यही एकमात्र कारण है तो निस्संदेह उन्होंने एक भावुक भूल की है क्योंकि कांग्रेस के लिए तो उत्तर प्रदेश की सत्ता में आना वैसे भी ख़याली पुलाव ही है । जब दल की सरकार बननी ही नहीं है तो मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी कोई भी घोषित किया जाए, क्या अंतर पड़ता है ? भारतीय जनता पार्टी तो सत्ता में आकर भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से रही ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय जितेंद्र माथुर जी, सादर अभिवादन! आपने सही आकलन किया है और सच्ची प्रतिक्रिया भी दी है. पर आप भी जान रहे हैं कि आज देश भक्ति का पैमाना क्या है? अच्छे अच्छे लोग मोदी वंदना कर रहे हैं. मोदी जी को भी यही पसंद है. मोदी जी के अंध-समर्थक को भी आप सही-सही पहचानते हैं. मैंने लिखा है - नेता तो अपनी करतूतों से जनता का विश्वास लगभग खो ही चुके हैं, लेकिन कम-से-कम सेना को तो अपनी राजनीति का मैदान न बनाएं. यह बात 'पक्ष-विपक्ष' दोनों पर लागू होती हैं. सूत्रों के अनुसार प्रधान मंत्री भी अपने सभी मंत्रियों और सहयोगियों को इसपर सोच समझ कर बोलने और बयानबाजी से बचने की सलाह दी है. पर राजनीति तो ऐसी ही है कि "तू डाल डाल मैं पात पात" ! आपने देखा/सुना होगा मनोज तिवारी को रामलीला में हनुमान जी को 'सर्जिकल स्ट्राइक वाला वानर' कहते हुए. अमिताभ बच्चन से लेकर नामी गिरामी नेता सेलिब्रिटी सभी मोदी नीत भाजपा सरकार का गुणगान करने में लगे हैं. एक रवीश कुमार अलख जगाये हुए है तो उसको कितनी भद्दी-भद्दी गलियां सुननी पड़ रही है. NDTV अधिकांश जगहों के साथ मेरे यहाँ भी प्रतिबंधित है. बाकी सभी चैनेल एक सुर से मोदी जी का गुणगान कर रहे हैं, इस मंच पर भी आप सबके लेख पढ़ते हैं - कितने लोग हैं, जो आज के समय श्री मोदी की आलोचना कर सकते हैं. सुषमा स्वराज मोदी से ज्यादा प्रखर और सूझ-बूझ वाली नेता हैं, उन्हें भी संयुक्त राष्ट्र में जन-धन खाता, और स्वच्छता अभियान से ही अपने भाषण की शुरुआत करनी पड़ी. कोई दो राय नहीं उन्होंने भारत के पक्ष को बखूबी और सशक्त अंदाज में रक्खा.... धारा की विपरीत दिशा में चलनेवाले केजरीवाल को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वह भी आप देख रहे हैं. मनोहर पर्रिकर शायद गोवा के मुख्य मंत्री के रूप में जितने लोकप्रिय थे, उतने रक्षा मंत्री के रूप में नहीं नजर आ रहे हैं. उनको भी केजरीवाल को जीभ काटने वाला बयान देना पड़ता है और अपना अभिन्नदन करवाने में भी अब उनको आनंद महसूस हो रहा है. बातें बहुत हैं जो आप भी समझते हैं और हम भी ...पर ... जनता ही जनार्दन है. उसका फैसला ही सबको मानना पड़ता है.... वह भी पांच साल में एक बार.... बाकी समय तो मुंहताज होकर ही रहना पड़ता है. जय श्री राम! विजयदशमी और दशहरा की शुभकामनाओं के साथ

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! मैंने लिखा है - केजरीवाल और राहुल गाँधी अभी अपरिपक्व नेता हैं और अपनी बातों से सदा विवादों में घिरे रहते हैं. कुछ लोग उनपर आपत्तिजनक प्रहार भी करते हैं, जो मेरी नजर में राजनीति और सोसल मीडिया का गिरता हुआ स्तर को जाहिर करता है. पर केजरीवाल के बात पर जितनी अभद्र प्रतिक्रिया सोसल मीडिया में हुई है वह भी उचित नहीं है. असल में आज मोदी समर्थन और केजरीवाल का विरोध ही देशभक्ति का प्रमाण बनता जा रहा है. आम आदमी चाहे जो कोई भी सच्चा भारतीय है न तो सेना पर सवाल खड़े करेगा न ही अपने देश का अहित करना चाहेगा. पर एक हवा जो बंटी जा रही है पता नहीं इसका असर आगे जाकर क्या होनेवाला है मुझे नहीं मालूम. जनता ही जनार्दन है वही अपना सही फैसला देती है. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

वैसे तो मैं आपके इस लेख पर बहुत लंबी टिप्पणी कर सकता हूँ आदरणीय जवाहर जी लेकिन इसे उचित न मानते हुए संक्षेप में केवल एक ही बात कहूंगा । राहुल गांधी की टिप्पणी अमर्यादित और विवेकहीन है, इसमें संदेह नहीं । पर क्या राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी सैन्य कार्रवाइयां राजनीतिक एवं चुनावी लाभ लेने के लिए होती हैं जो सत्तारूढ़ दल इसे बार-बार अपने दल और नेता की उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रहा है ? रक्षामंत्री ने तो सर्जिकल स्ट्राइक के लिए आगरा में अपना सार्वजनिक सम्मान तक करवा डाला । क्या सर्जिकल स्ट्राइक उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए की गई है ? सर्जिकल स्ट्राइक कई बार पहले भी की गई हैं, यह एक स्थापित तथ्य है लेकिन उसकी औपचारिक घोषणा पहली बार ही की गई है । क्यों ? ताकि उड़ी हमले के बाद से सरकार के विरुद्ध उठ रहे आलोचनाओं के स्वरों को शांत किया जा सके और जनमानस को सरकार-विरोधी बनने से रोका जा सके । अन्यथा उचित तो यही होता कि इस सर्जिकल स्ट्राइक से पहले भी समय-समय पर सर्जिकल स्ट्राइक बिना शोर-शराबे या औपचारिक घोषणा के करके सीमा पार से आने वाले आतंक को सीमा के बाहर ही निष्क्रिय किया जाता । यदि ऐसा होता तो संभवतः उड़ी हमला होता ही नहीं । आपने अब तक समाचारपत्रों में पढ़ लिया होगा कि मुलायम सिंह यादव भी इस श्रेय लेने की बहती गंगा में हाथ धोने आ गए हैं और उनके समर्थकों द्वारा कहा जा रहा है कि कि प्रधानमंत्री को सर्जिकल स्ट्राइक करने की सलाह मुलायम सिंह ने ही दी थी । श्रेय लेने की यह होड़ तो सत्तारूढ़ दल ने ही आरंभ की है जिससे सैन्य दलों के मनोबल पर अंततः विपरीत प्रभाव ही पड़ेगा । मुझे खेद के साथ कहना पड़ता है कि आपका यह लेख न केवल निष्पक्ष और तर्कसम्मत नहीं है वरन इसमें तथ्यात्मक भूलें भी हैं जिन्हें प्रधानमंत्री का महिमामंडन करने की धुन में आप अनदेखा कर गए ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम आदरणीय जवाहर लाल जी पहले तो सब नेता सर्जिकल अपेरातिओं की सेना और सरकार की  तारीफ करते रहे जैसे ही देश में मोदीजी की तारीफ़ होने लगी विरोधियो ने उलटे सीधे व्यान देना  शुरू कर दोय जिसमे सबसे ज्यादा गंदे और गैज़िम्मेदारी वाले व्यं संजय निरुपम,चिदम्बरम दिफ्विजय सिंह और केजरीवाल ने दिए जो सबूत माग रहे थे और जिससे वे पाकिस्तानके हीरो बन गए.लेकिन इससे बेकार में सेना का मनोबल गिराने का काम किया राहुल गाँधी ने जो बकवास की उससे देश्वशी शर्मिंदा है वैसे माँ बेटे में कोइ फर्क नहीं क्योंकि माँ ने भी मौत का सौदागर कहा था.पवार ऐसा नेता कहता की पहले भी ऐसे आपेरशन हुए थे जो बकवास है जिसके खंडन पूर्व सैन्य अधिकारी कर रहे वैसे जो हुआ गलत हुआ हमारे देश के कुछ राजनेता तो कुर्सी के लिए देश बेच दे.सुन्दर विवेचात्मक लेख के लिए बधाई .

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय जवाहर जी, आपके और मेरे बीच कोई टेलीपैथी जैसा संबंध अवश्य है । आपने 'परिवार' फ़िल्म का गीत अपने ब्लॉग में लिखा और मैंने परसों ही 'परिवार' फ़िल्म की अपनी समीक्षा wordpress.com पर डाली थी । मुझे भी यह गीत बहुत पसंद है और भारत के इन दोनों ही महान सपूतों के पदचिह्नों पर चलने का प्रयास मैं करना चाहता हूँ (यद्यपि मेरे जीवन-आदर्श सुभाष बाबू हैं) । गाँधी जी के विचारों से प्रेरित होकर मैंने हिन्दी में एक एकांकी लिखा था और शास्त्री जी के आह्वान से प्रेरित होकर मैंने वर्षों पूर्व सोमवार का व्रत आरंभ किया था (अब बुधवार का व्रत करता हूँ)। आपने ठीक लिखा है कि स्वच्छता स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है । लेकिन हम भारतीयों का संकल्प वास्तविक अर्थों में स्वच्छता पर अमल करने का होना चाहिए, न कि केवल प्रचार करने तथा हाथ में झाड़ू लेकर चित्र खिंचवाने का । बहुत प्रेरक एवं प्रशंसनीय आलेख है आपका । आभार एवं अभिनंदन ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी २ अक्टूबर देश के लिए बहुत पवित्र दिन है जिस दिन २ महान हस्तियों का जन्म हुआ और जिन्होंने देश और मानवता की सेवा की.गांधी जी ने तो दक्षिण अफ्रीका से अन्याय के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जिसे बाद में भारत में अंग्रेज़ो के इस्तेमाल के लिए किया.आज़ादी के समय वे नोहाखाली में दंगे रोकने में लगे थे उन्होंने कांग्रेस नेताओ की मानसिकता पढ़ ली थी तभी कांग्रेस को भांग करना चाहते थे क्योंकि उन्हें लग रहा था भारतीय नेता अंग्रेज़ो से ज्यादा लूटेंगे.शाश्त्रीजी की मृत्यु हुई नहीं उन्हें मार गया जिसके पीछे बहुत बड़ी साजिस थी कुछ तो इंदिराजी का नाम लेते .इन दोनों माह सपूतो कके प्रति पूरा देश कृतज्ञ है .इस सुन्दर लेख के लिए हार्दिक बधाई

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आपके तो लेख का शीर्षक ही इसमें अंतर्निहित भावना को प्रतिबिम्बित कर देता है आदरणीय जवाहर जी । विषय-वस्तु के विविध आयामों को समेटे हुए आपका यह लेख उत्कृष्ट है । मैं इस लेख में सम्मिलित तथ्यों, विचारों एवं आपकी भावना सभी से पूर्णतः सहमत हूँ । अटल जी ने कविता के माध्यम से जो कहा, पूर्णरूपेण उचित कहा । यदि पाकिस्तान इसे नहीं समझना चाहता तो यह उसकी विवेकहीनता है लेकिन हमें उसकी तरह विवेकहीन नहीं बनना है । युद्ध एवं युद्धोन्माद दोनों ही राष्ट्र के लिए हितकर नहीं हैं । इनसे यथासंभव बचा जाना चाहिए । भारत ने कभी स्वेच्छा से युद्ध नहीं किया । पाकिस्तान हो या चीन, आक्रांता ने सदा युद्ध हम पर आरोपित ही किया है । अब भी यही नीति एवं यही दर्शन हमारे लिए श्रेयस्कर है । युद्ध के लिए अपनी सेनाओं को सन्नद्ध तो सदा ही रखा जाना चाहिए लेकिन वास्तविक युद्ध तभी किया जाना चाहिए जबकि शत्रु हमें इसके लिए विवश कर दे तथा कोई अन्य मार्ग न छोड़े । रणछोड़ होने से श्रीकृष्ण की महिमा घट नहीं गई थी । इसी भाँति युद्ध से यथासंभव दूर रहने से भारत की महानता नहीं घटने वाली । हार्दिक आभार एवं अभिनंदन आपका ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी युद्ध आखिरी विकल्प होता उसके पहले और बहुत से विकलप है जिसे इस्तेमाल करना चाइये.कुछ विकलप है !१.सिन्धु नदी समझौता ख़तम कर दे.२.सभी तरह के सामाजिक,संस्कृत और राजनातिक सम्बन्ध तोड़ दे.!३.अपने ऊपर से उड़ने वाले सभी फ्लाइट बंद कर दे.!४.रेल बस सेवा बंद कर दे!५.विशिष्ट दर्ज़ा बंद कर दे.६.संसद में पकिस्तान को आतंकवादी राष्ट्र घोषित कर दुसरे देशो से से भी कोशिश करे.!७.कूटनीतिक तरीके से पकिस्तान की आतंकवादी हरकते को उजागर. वैसे युद्ध भी टीवी पर बहस कट या कह कर नहीं होता !आपके सुन्दर लेख के लिए बधाई.हम नेहरूजी इंदिराजी और वाजपई जी की गलतियो का परिराम भुगत रहे क्योंक जीतने के बाद भी राजनैतिक समझौतों में टेबल पर हार गए.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री जवाहर जी लेख दो बार पढा पूरा लेख आपके अपने मन का संघर्ष है सच के बहुत करीब है दो विचारों का संघर्ष आज पैसे का सबसे अधिक महत्व हैं पैसे से ही इन्सान सब कुछ हासिल कर सकता है लेकिन हमारी संस्कृति में पैसे को कुछ भी न समझा कर आदर्शों की बात होती है बहुत अच्छी लगती है | एक ही समय में दो वैज्ञानिक हुए हमारे मिसाइल में सादा जिंदगी जीवन के अंत तक काम करते रहे दूसरी और पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक छुपा कर एटम की टेक्नॉलोजी बेचीं शायद एक द्वीप भी खरीदा जम कर पैसा बनाया सच्चाई यह है कुछ ईमानदार हैं उनका स्वभाव ऐसा है कुछ को अवसर ही नहीं मिला वह भी ईमानदार हैं कुछ मौका मिलने पर चूकते नहीं हैं आपकी मीमांसा करने का अभी समय नहीं है आप ज्यादा ही गम्भीरता से सोच रहे हैं आप के विचारों तक शायद में पहुंच नहीं पायी हूँ |परन्तु आप बुद्धिजीवी हैं आपके लिए वर्चु ज्यादा महव पूर्ण है हाँ तर्क अपनी जगह हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी इतनी सुन्दर भारत के लोगो की असलियत का चित्र आपने लिखा.हमारे धर्म में हमेश कहा की मनुष्य को मेहनत के साथ ईमानदारी  और नैतिकता से धन उपार्जन कर खुश रहना चाइये .देश को पहले अंग्रेजो ने लूटा फिर गांधीजी ने कांग्रेस को भंग करने के लिए कहा था क्योंकि उन्हें मालूम हो गया था की आज़ादी के बाद देश के नेता अंग्रेजो से ज्यादा लूटेंगे और नैतिकता को भूल जायेंगे पहले राजनीत सेवा मानी जाती थी आज पैसा,प्रतिस्था और कुर्सी पाने का साधन बन गया आज कल लोग अपनेदुःख से कम दुखी है लेकिन दुसरो के सुख से ज्यादा दुखी है ऍहम लोगो को पच्छिम से कम से कम राजनैतिक स्वस्थता सीखनी चाइये.सुन्दर लेख के लिए आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

देवाधिदेव महादेव के तीसरा नेत्र खोलने का समय तो आ ही गया है आदरणीय जवाहर जी । इससे अधिक उचित समय और कौनसा अपेक्षित है ? जहाँ तक 'सत्यमेव जयते' का प्रश्न है, वह तो अपने आप में ही केवल एक सदिच्छा है, इससे अधिक कुछ नहीं । इसका पूर्ण स्वरूप है - 'सत्यमेव जयते नानृतम' जिसका अर्थ है - 'सदा सत्य की ही जय हो, असत्य की नहीं' । स्पष्टतः यह सदाचारियों एवं सत्य के अनुगामियों की सदिच्छा मात्र ही है जो केवल कल्पनाओं एवं कथाओं में ही पूर्ण होती है । मैंने तो अपने जीवन में सौ में से निन्यानवे अवसरों पर सत्य को असत्य से पराजित होते ही देखा है क्योंकि जय-पराजय का निर्णय उचित-अनुचित के भेद से नहीं वरन शक्ति-संतुलन से होता है जो अधिकतम अवसरों पर असत्य के ही पक्ष में रहता है । इसके अतिरिक्त सत्य, न्याय एवं सद्गुणों में विश्वास रखने वाले भी जब अपने हितों के संरक्षण अथवा विस्तार हेतु व्यवस्था के नियंत्रकों के पक्ष में चले जाते हैं अथवा सत्य-असत्य के युद्ध में तटस्थ रहने का अभिनय करते हैं तो सत्य की पराजय सुनिश्चित हो जाती है क्योंकि तटस्थता परोक्ष रूप से शक्तिशाली आततायी का ही साथ देती है, अशक्त पीड़ित का नहीं ।  

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सार्थक लेख है जवाहर जी आपका । यह अच्छी बात है कि सदा अलगाववादियों का समर्थन करने वाली महबूबा मुफ़्ती की भी आँखें खुल गई हैं । लेकिन कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में भी हिंसक आंदोलनों के जटिल होने के पीछे सेना की ज़्यादतियाँ भी उत्तरदायी रही हैं । सेना की प्रशंसा अपनी जगह है लेकिन उसमें सभी दूध के धुले नहीं हैं । यदि सेना की ओर से निर्दोषों पर ज़्यादतियाँ नहीं होतीं तो न तो ईरोम शर्मिला को सोलह साल तक अनशन करना पड़ता और न ही बुरहान वानी को आम कश्मीरियों की दृष्टि में वीरगति पाने वाले नायक की श्रेणी प्राप्त होती । आपने अपने लेख में जिन पक्षों को स्थान दिया है, उनके साथ-साथ समस्या का यह पक्ष भी समान रूप से महत्वपूर्ण है जो साधनहीन पीड़ितों को न मिलने वाले न्याय से जुड़ा है । ऐसे पीड़ितों की भावनाओं का लाभ उठाकर ही अलगाववादी उन्हें अपने साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं । इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । यह दायित्व सरकार का भी है तथा सैन्य उच्चाधिकारियों का भी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

अच्छा लेख है जवाहर जी । हम बेटियों की सफलता पर प्रसन्नता तो मानना चाहते हैं लेकिन उन्हें उनका अधिकार नहीं देना चाहते । यदि इस लेख में आपने मैराथन धाविका ओ.पी. जाइशा को 42 किलोमीटर की दौड़ के बीच में कभी पानी तक नहीं दिए जाने एवं उसके निर्जलीकरण की शिकार होकर फ़िनिशिंग लाइन पर गिर जाने की त्रासदी पर भी कुछ कहा होता तो आपकी अभिव्यक्ति अधिक संतुलित होती । साक्षी की सफलता पर उसे बधाइयां देने वाले खेल अधिकारी तथा संस्थान यह भी न भूलें कि उसके तो ओलंपिक में भाग लेने के मार्ग में ही अड़ंगे लगाए जा रहे थे । यह उसका (और भारत का) सौभाग्य ही था कि वह रियो जा सकी और देश का मान बढ़ाने का अवसर पा सकी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

साक्षी और सिंधु को बधाई देते समय मैराथन धाविका ओ.पी. जाइशा को भी न भूलिएगा सरिता जी जिसे ४२ किलोमीटर की मैराथन दौड़ के दौरान भारतीय खेल अधिकारियों ने पानी तक नहीं दिया तथा दौड़ के अंत में वह निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) से पीड़ित होकर वहीं गिर पड़ी । क्या हमारे देश की किसी अनुत्तरदायी व्यवस्था में कोई सुधार हो सकेगा ? इक्का-दुक्का खिलाड़ी तो व्यक्तिगत प्रयासों तथा प्रतिभा के बल पर सफलता आगे भी पाते ही रहेंगे लेकिन देश को अनेक खेलों में उल्लेखनीय सफलता तो तभी मिलेगी जब हमारी परजीवी और निकम्मी व्यवस्था के दोषों को दूर किया जाएगा । दो खिलाड़ियों की अपनी प्रतिभा और लगन से उद्भूत सीमित सफलता के नशे में कहीं हम इस आवश्यकता को न बिसरा दें जैसा कि हम सदा ही करते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी आपने बहुत ही सटीक और सही विश्लेषण दलित राजनीती पर किया नेताओं ने आज़ादी के बाद दलितों और मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया लेकिन दिल से उनके लिए उनकी दशा को सुधरने के लिए लग्न से कार्य नहीं किया.दलितों के नाम पर लालू मायावती मुलायम राज्य कर रहे क्या मायावती दलित लगती महारानी की तरह रहती देखिओ हिन्दुओ की हालत भी बहुत अच्छी नहीं कश्मीर से पंडित निकाल दिए गए कर्नाटक,केरल में हिन्दू मारे जाते केरल के कन्नूर जिले में हिन्दुओ के साथ मुसलमान बहुत ज्यादती करते गुना और रोहित के मामले में राजनीती मोदीजी और बीजेपी के विरोध की वजह से मीडिया ने की क्यों राजनेता केवल दादरी ,हैदराबाद और गुना गए अन्य जगह क्यों नहीं क्यों इन घटनाओं को महीनो दिखया गया बीजेपी तो फ़ौरन कार्यवाही करती दुसरे नहीं करते लेकिन मीडिया चुप इन सबके पीछे अन्तराष्ट्रीय साजिस है लोकतंत्र में कानून सरोपरी होना चाइये.सुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी टीवी में देख कर बहुत दुःख हो रहा की किस तरह देश प्रकर्ति की कोप से ग्रस्त है चारो तरफ तवाही तवाही ये सब प्रक्रति के साथ छेद छाड़ से हो रहा जनसँख्या अधाधुंध बढ़ रही इस पर रोक थम के लिए कुछ नहीं हो रहा आरामदेही की वजह से ये सब हो रहा शहरो में पानी निकालने की कोइ उपाय नहीं लेकिन ऐसा चीन,अमेरिका ,जापान और दुसरे देशो में देखने को मिला है जब तक युद्ध स्तर पर सोच कर कार्य नहीं होगा ये ऐसा ही चलेगा गोमुख भी खिसक रहा आसाम की हालत देख कर तरह हा रहा बंगलोरे में सड़क पर लोग मछली पकड़ रहे रहे.जबतक इंसान प्रकृति का सम्मान नहीं करेंगे ऐसा ही चलता रहेगा.बहुत ही अच्छा लेख और विस्तार से चर्चा,अधिकारी भी लापरवाह डिक्की में सड़क में गद्दों के वजह से एक मोटर सवार ट्रक से थककर लग मर गया सदक्पर तडपता रहा किसी ने फिकर नहीं कितने लोग खुले मैन्होल में गिर कर मर जाते कुछ अधिकारिओ की लापरवाही कुछ नागरिको की जो चुरा लेजाते.इस पर भी राजनीती विरोधी बीजेपी पर हल्ला बोलते लेकिन इसमें सरकार की कोइ गलती नै ये ७० साल का पाप है जिससे धोने में समय लगेगा.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! पूर्ण विनम्रता के साथ मैं अपना पक्ष रख रहा हूँ. रामचरित मानस में तुलसी दस ने शुरुआत में ही कहा है- पूजिये विप्र शील गन हीना, शूद्र न गुण गण ज्ञान प्रवीणा. वर्ष ऋतू के वर्णन में अति बृष्टि चली फ़ूट कियारी, जिमि सुतंत्र भये बिगरही नारी. ...और भी नारी सुभाउ सत्य सब कहहीं, अवगुन आठ सदा उर रहहीं.. हाँ कथाकार लोग इन पंक्तियों की अलग अलग व्याख्या करते हैं. यह भी सही है की उस समय के अनुसार हो सकता है यह बातें सही हों.. आज भी गलियां जो पुरुषों द्वरा प्रयुक्त होती हैं उसमे गली तो स्त्री जाती को ही दे जाती है... मेरा तर्क वही था.. हाँ यह अलग बात है आज गलियों अपशब्दों, प्रताड़नाओं का अलग अलग ढंग से राजनीतिक लाभ लिए जाने का प्रचलन चल पड़ा है. आपकी उच्च कोटि की प्रतिक्रिया का हम हमेशा स्वागत करते हैं.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी जब भी अखंड रामायण के पाठ में हमने हम चार बहनें हैं मेरी तीन बहने सस्वर रामायण का पाठ अति सुंदर करती हैं मैं उनके पीछे केवल ताली बजाती हूँ हाँ आगे यह चौपाई आई है हम कुछ देर तक चुप हो कर विरोध करते हैं\कुछ ने हमारे विरोध प्रदर्शन पर लेख भी लिखे हमारा विरोध जारी रहा आप समझ जायेंगे तुलसी दस जी ने राम चरित्र मानस की जब रचना की मुगल काल था इस्लामिक कानून देश पर लागू था इस्लामिक कानून में महिला के लिए प्रताड़ित करना पुरुष का अधिकार माना जाता है पकिस्तान में तो बकायदा कानूनी मान्यता दी है रहा शुद्र उनका भगवान राम ने शबरी जन जाती की थी के जूठे बेर खाए शूद्र वेद पाठी था उनका प्रसंग शायद उत्तर काण्ड में आता है उसका विरोध हुआ था यह भी उचित नहीं था \. लेकिन तुलसी दास भगवती सीता और मन्दोदरी का जिक्र आदर से करते हैं बहुत अच्छा प्रश्न उठाता लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी बहुत दिनों के बाद आपका लेख लिखा आपने कई लेखो को एक में मिला दिया.दलित समाज का एक अंग थे और वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर थी जबतक गुरुकुल शिक्षा देश में प्रचारित थी कोइ भेद भाव नहीं था सब एक जगह पढ़ते थे दलितो के साथ नफरत विदेशी आक्रमण के बाद हुआ और अंग्रेजो ने फूट डालो राजनीती अपना कर इसको और हवा दी.दलितों के साथ घटना स्वतंत्रता के बाद भी हो रही और उनकी और किसानो की दश के लिए मोदीजी को दोष देना गलत हट वे ७० साल की गंदगी साफ़ कर रहे लेकिन मीडिया में केवल बजो शासन की दलित उत्पीडन की खबरे देते और वोटो के भूके नेता इन जगहों को तीर्थ बना लेते मीडियादुसरे प्रदेशो की घटनाओं पर कोइ आंसू बहाने नहीं जाता.बीजेपी अपने नेताओ के खिलाफ कार्यवाही करती जबकि अन्य दल नहीं और मीडिया इस पर भी चुप.ऍआपके लेख में प्रितिक्रियाये देने में एक लेख हो जाएगा आपको इस सुन्दर लेख के लिए साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री जवाहर जी अच्छा तर्क संगत लेख जाकिर नायक ने आज का आधुनिक बाना फन लिया है अंग्रेजी से पढ़े लिखे तबके को आकृष्ट करता है एक बार हमारा परिचित मुस्लिम युवक पढ़ा लिखा मुझसे पूछा आपके शास्त्रों में शायद ऋग्वेद में लिखा है एक अवतार होगा मैने कहा हाँ कलंगी अवतार कहते हैं आगे सभी धर्म कहते हैं पैगम्बर आयेंगे और आखिरी पैगम्बर आ गये मुहम्मद साहब जब आ गये तो सबको उनकी राह पर चलना होगा में हैरान हो गयी मेने कहा क्या भगवान का इदारा ( दफ्तर )बंद हो गया मेरे पास जबाब है तुम सहन नहीं सकोगे यह सहन शीलता हममे हैं तभी हर थपेड़ों के बाद भी हम हैं आज के दैनिक जागरण में श्री शंकर का लिखा लेख है वक्त मिलेगा पढियेगा सटीक लिखा है

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम आदरणीय जवाहर जी  आजकल डॉ जाकिर नैक की बहुत चर्चा टीवी में हो रही जहाँ ज्यादातर लोग उसकी निंदा कर रहे कुछ समर्थक भी बेशर्मी से टीवी में अपनी बात करते.इसके बारे में मुम्बई पुलिस कमिश्नर ने २००८ में ही केंद्र और प्रदेश सरकार को रिपोर्ट भेज दी लेकिन वोट बैंक की वजह से कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया.हॉल में बांग्लादेश आतंकवादी हमले के बाद इसकी चर्चा शुरू हुई और अब पीस टीवी भारत और बांग्लादेश में बन हो गया और इसके खिलाफ भी लेकिन हमारा सेकुलर मीडिया भी कमल का ज्यादातर मामलो में हिन्दू धर्म गुरुओ को अपमानित करता .मुस्लिम वोटो के लिए जब हिन्दुओ को जबरदस्ती फंसा दिया गया और आतंकवादियो का समर्थन भी होता जहां दिग्विजय सिंह ऐसे नेता इसको शांति दूत कह उस देश का भगवान् ही भला करे.वैसे इस्लाम देर से आया था इसलिए मिहम्मद ने तलवार के बल पर फ़ैलाने के लिए कहता और इसी का परिणाम विश्व भुगत रहा.इतने सुन्दर लेख के लिए हार्दिक बधाई.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम. जैसा कि आप अवगत हैं, मैं भी किसान का बेटा हूँ. मेरे पिता जी जब स्वयं खेती के कामों में लगे रहते थे, उस समय उपज भी अच्छी होती थी और घर का सब शुद्ध सामान मिल जाता था खाने पीने को. तेजी हवा भी खेतों में टहलने से ही मिल जाती थी. पर अब खेती में लगत के अनुसार दाम नहीं मिलते. हमलोग अपनी जीविका के लिए शर में आगये और शर के ही होकर रह गए. गांव तक सड़कें पहुँच गयी हैं. इतन फायदा गांव वालों को हुआ है कि वे ऑटो से शहर जाकर कुछ कमाकर (डेली मजदूरी कर के ही ) कुछ अपनी स्थिति सुधारने में लगे हैं. बेहतर पढाई के लिए भी सहारों में ही जाना पड़ता है. इसलिए अभी गांव की स्थिति में बहुत सुधार होने बाकी हैं. शहर तो तरक्की कर रहे हैं. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जवाहर बेटे, आयुष्मान ! कभी कभी चाचा की खबर भी ले लिया करो ! शहरों में गरीबी पचाने की क्षमता होती है, सचमुच सब तरह के लोग गाँव छोड़कर शहर की तरफ भागते हैं की कम से कम ढंग से रोटी खाने का जुगाड़ तो होजाएगा ! शहरों में ही झुग्गी झोपड़ियों में लोग गुजर बसर करते हैं यहां गाँव की तरह ताजी हवा, कुंवे का शुद्ध पानी, खेतों की ताजी सब्जियां भले ही नहीं मिलती फिर भी, ऊंची ऊंची गगन चूमती इमारतें, माल, पार्क, बच्चों के खेलने के लिए, झूले और बहुत सारे उपकरण, जवान बुजुर्गों को पार्कों में जिम के साधन ! इन सब साधनों को देखकर लोग शहरों से जुड़ते हैं ! विस्तृत और नयी नयी जानकारियों से सजा संवारा लेख के लिए आशीर्वाद ! चाचा

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम आदरणीय जवाहर भाई आपके लेख पढने से बहुत सी जानकारी मिली वैसे हमने भी ये प्रोग्राम टीवी में देखा था.गावो की दुर्दशा के लिए आजादी के बाद से सरकार का रवईया ख़राब रहा यदि कुछ उद्योग स्थानीय स्थित के अनुसार गावो में लगाये जाए तो शहर और गावो मिलकर देश को बदल सकते क्योंकि शहर इतनी ज्यादा गावो की आबादी लेने में समर्थ होंगे इसके अलावा हमारे नागरिक बहुत गैरजिम्मेदार है सिविक सेंस है नहीं इसको सुधारना पड़ेगा,मोदीजी जिसतरह  कार्य कर रहे देश की दिशा बदल जायेगी,देश भाग्यशाली है की उनका ऐसा दूरदर्शी और मेहनती प्रधान मंत्री मिला ६९ साल की गन्दगी को दूर करने में कुछ समय लगेगा.इतने सुन्दर लेख के लिए सादर आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सम्पूर्ण राष्ट्र कों कंपित कर देने वाली इस लोमहर्षक घटना पर आपका तथ्याधारित विस्तृत लेख अत्यंत सटीक, विचारोत्तेजक एवं उपयोगी है जवाहर जी । भारतीय पुलिस अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए बड़की हाँकने एवं असत्यापित तथ्यों को घोषित कर देने में दक्ष हैं ताकि उन्हें जनता एवं पत्रकारों के प्रश्नों से तात्कालिक राहत मिल सके । अतः मुझे विश्वास नहीं कि रामवृक्ष सचमुच मारा गया है । इस तथ्य की पुष्टि ठोस आधार पर होनी चाहिए, किसी पुलिस अधिकारी के वक्तव्य से नहीं । यदि वह जीवित है तो जो हुआ है; वह भविष्य में कहीं और, किसी और रूप में पुनः हो सकता है । इतना कुछ गंवा देने के उपरांत तो हमारे शासकीय एवं प्रशासनिक तंत्र को प्रैस के समक्ष गाल बजाने के स्थान पर सजग एवं सक्रिय होकर सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए । जनता के प्रश्नों से बचा नहीं जा सकता । कुर्सियों पर बैठने वालों को उत्तर तो देने ही होंगे ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री जवाहर जी विस्तार से लिखा गया अच्छे निष्कर्ष "गौर से देखने से पता चला कि प्रधानमंत्री के भाषण में ये वे मौके थे जो संकेत देते थे कि भारत अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को राजी है। अमेरिकी जनप्रतिनिधि विश्व में इस भयावह मंदी के दौर में यह सुनकर गदगद क्यों नहीं होंगे कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला और 130 करोड़ आबादी वाला भारत आज मुश्किल समय में अमेरिका के साथ है, "जब रशिया मजबूत था नेहरु जी ने तटस्थता की निति अपनाई थी इंदिरा जी मजबूत नेता थे अमेरिका की विदेश नीति उनको कम पसंद करती थी उन्होंने बंगलादेश बनाया था वः अमेरिकी जहाजी बेड़े से भी नहीं डरी थी सौ बात की एक बात "आतंकवादी पकिस्तान की, तो यह समय ही बताएगा कि पाकिस्तान के प्रति अमेरिका का क्या रुख रहता है और पाकिस्तान अपनी आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाता है या नहीं? " बाकी तो मीठी बातें हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

बहुत आश्चर्य होता है इन घटनाओं को देख-सुनकर ! हमारे देश में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है /होता रहा है / ...जिस पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होती. जब पानी सर से ऊपर चला जाता है/कोर्ट का डंडा पड़ता है तब कार्रवाई होती है, वह भी आधे अधूरे तैयारी के साथ. इस घटना में हमारे दो पुलिस अधिकारी की मौत हुई जो दुखद है. हम सब उनके लिए श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं. अच्छा हुआ रामवृक्ष भी मारा गया. नहीं मरा होता तो उसे भी जेल में डालकर कई साल तक मुकदमे चलते रहते. कुछ बच्चों के भी बयान आये हैं, जिससे पता चलता है की रामवृक्ष का कैसा खौफ था वहां? कुछ शिक्षा की भी कमी है या जागरूकता की... काफी सारे लोग दिग्भ्रमित होकर ऐसे दुष्ट लोगों के अनुयायी बन इसके कब्जे में आ जाते हैं. अभी भी बहुत जरूरत है जन जागरण की.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम जवाहर लाल जी आप पुरे रिसर्च के साथ लेख लिखते मेघालय के जिस गावो में मोदीजी गए थे और सबसे स्वाच गाँव है उसका पूरा इतिहास आपने लिख दिया मोदीजी के ज्यादातर मंत्री अच्छे कार्य कर रहे क्योंकि सबका लेख जोखा मोदीजी खुद रखते है देश का सौभाग्य है की देश को इतने मेहनती ,सूझ भूझ वाला और जनता से जुड़ा नेता मिला.और उम्मीद है देश ५ सालो में बदल जाएगा अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी विशिष्ट स्थान मिल रहा है.जिस तरह विरोधी खास कर मुस्लिम नेता हमला करते कुछ नेताओ द्वारा जवाब देना जरूरी है.देखिये ७० साल की गंदगी दूर करने में समय लगेगा.बीजेपी शासित राज्य भी बहुत अच्छा कर रहे.हम लोगो को प्रधान मंत्री का समर्थन करना चाहिए

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आजकल समयाभाव के कारण फिल्मों में बहुत ज्यादा रूचि नहीं दिखा पाता हूँ, आपने अपनी ख़ुशी का इजहार मेरे ब्लॉग पर आकर किया था, पर आज ही आपका यह ब्लॉग पढ़ सका. मुझे बहुत दुःख है कि मैंने आपकी खुशी में अपनी खुशी शामिल करने में बहुत देर कर दी. आजकल फेसबुक पर बहुत ज्यादा समय देने लगा हूँ. आप मेरी फेसबुक फ्रेंड होती तो इस खुशी को जल्द साझा कर पाटा और अपने अन्य मित्रों को भी बता पाता. हमारा सौभाग्य है कि आप जैसी विदुषी हमलोगों के बीच हैं. आपका पूरा परिवार संस्कारित और शिक्षित है …हम सबको आपसे प्रेरणा लेने की जरूरत है. बहुित बहुत बधाई आपको साथ ही सरवजीत फिल्म जो मैं अब तक नहीं देख सका हूँ देखने का हर सम्भव प्रयास करूंगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

बेटे जवाहर लाल तुमने मां का नाम लेकर एक छिपी हुई स्मृति को उजागर कर दिया ! कमाल है माँ के ऊपर डाक्टर शोभा जी के अलावा किसी की टिप्पणी नहीं आई ! मेरी मां का परिवार हमारे परिवार से विशेषप्रस्थितियों में आगे था ! मेरी मां अपनी बचपन की कहानी सुनाया करती थी ! वे जब केवल पांच साल की थी मेरी नानी स्वर्गवासी हो गयी थी, ११ साल में माँ के पापा भी चले गए थे ! हमारे गाँव में खेती बहुत होती थी और पास पड़ोस के रिश्तेदार काम करने आजाया करते थे ! मां को इतने सारे लोगों के लिए खाना बनाना सुबह सुबह उठकर पिसाई करना, कुटाई करना, दूर चस्मे से पानी लाना, मवेशियों को सम्भालना ! उन दिनों पनचक्की हुआ करती थी दूर नदी में ! वहां भी नंबर आने में दो दिन लग जाते थे ! विडम्बना देखो केवल ३२ साल में मेरे पापा भी स्वर्गवासी होगये थे ! तीन चाचा थे एक विश्व युद्ध में शहीद होगये थे अंग्रेजों की तरफ से लड़ते हुए, दो भी शहर कस्बों में आजीविका की खोज में चले गए थे ! बूढ़े दादा जी थे जो खेती पाती करने में असमर्थ थे ! ये १९४५ की बातें हैं ! हम चार भाई एक ६ महीने की बहिन थी पापा के बिछुड़ने के कुछ ही दिनों के बाद मेरा चार साल का सबसे छोटा भाई जो हम सबमें अति सुन्दर था वह भी संसार छोड़ कर चला गया था ! मुझे मेरे छोटे मामा जी ले गए थे पढ़ाने के लिए ! वहीं मैंने 8वीं पास की थी, फिर बड़े मामा ने 10वींपास करवाई थी ! बड़े भाई जो केवल १४ साल के थे ने हल बैल सम्भाले, जब तक दादाजी रहे उन्हें खेती के गुर सिखाते रहे ! सं १९४७ में दादाजी भी संसार छोड़ कर चले गए ! ल;यकीन मेरी माँ ने अपना विवेक और धीरज नहीं खोया ! मैं सेना में भर्ती होगया बड़े भाई ने खेती संभाली ! माँ बड़े भाई के साथ ही रहती ! फिर माँ को मैं अपने ही साथ ले आया था, उन्हें दिल्ली, फैजाबाद भी घुमाया और १९९८ चार नवम्बर को उन्होंने मेरी पत्नी की बाहों में आख़री सांस ली और स्वर्ग में पापा से मिलाने चली गयी ! आज हमारे परिवार में बड़े भाई के चार लडके, २ लडकियां हैं, सब शादीशुदा हैं और खुश हैं, मेरे दो बेटे एक बेटी है आज अच्छी पोजिशन पर हैं ! छोटे भाई के भी दो बेटे एक बेटी अपने परिवार के साथ खुश हैं ! ये सब माँ के आशीर्वाद का फल है, माँ का जिंदगी के साथ का संघर्ष का ही फल है ! आज भी माँ के दुखों को याद करके आँखों में आसूं टपकने लगती हैं !

के द्वारा: harirawat harirawat

श्री जवाहर जी आपने समवेदन शील विषय पर लिखा है ज्यादातर हम इन लोगों के बारे में भी जानते नहीं मैं नृत्यांगना सोनल मानसिंह के बारे में मैं नहीं जानती थी महिलाओं को सबसे पहले कमजोर समझा गया और उन्हें दबाकर रखने का हर संभव प्रयास हुआ, पर आज देखिये उन सफल महिलाओं को जो हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। अबकी रिजल्ट देख लीजिये लडकियों ने कमाल कर दिया है | मैं आपसे अपनी ख़ुशी शेयर करती हूँ सर्वजीत फिल्म की स्टोरी स्क्रीनप्ले डायलोग पूरी मेहनत के साथ अन्य काम मेरी भांजी मेरी बेटी ही है मेरे बच्चों सब साथ पली बढ़ी हैं मेने एक बार जेनरेशन गैप पर लिखा है यह भी उन्हीं शैतान बच्चों में शामिल है मेरी बच्ची इंजीनियर की , दुबई से मेनेजमेंट की स्कालर शिप से पढाई आगे हालीवुड में फिल्म मेकिंग की पढाई की रामलीला में वय संजय लीला भंसाली की सेकेंड दायाँ हाथ रही है उसकी बच्ची समय से पहले हुई इस लिए कुछ समय काम रोका और भी अनेक उपलब्धियां हैं कितनी लिखूं |उत्तम लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

बेटे जवाहरलाल, आयुष्मान ! आपने आसाम चुना के बारे में वस्तृत जानकर देकर नेताओं को एक खुला सन्देश दे दिया है की अगर तुम डाल डाल तो जनता पात पात ! सरकारें की एक परिवार की वपउति नहीं है ! अरे राज खानदान जिनकीकल तक तोती बोलती थी, पैतृक सम्पति अधिकार जमाने वाले भी मिट गए ! तो प्रजातंत्र में जनता को एक ही परिवार भुलावे में ज्यादा दिन तक नहीं रख सकता ! कोई अपने को कितना भी बलशाली, शक्तिशाली, मशकलमैन समझ ले, कभी न कभी जोडवाला पैदा होही जाता है ! कांग्रेस की १९७७ में कितनी किरकरी हुयी थी, ३५० सांसदों में से घटकर केवल ८६ रह रहे थे ! वो तो मुराजी देसाई को हटाकर स्वयंम प्रधान मंत्री का ख़्वाब देखने वाले चरणसिंह जी महाराज की कृपा हुई, चुनाव् ३ साल के अंदर हुए, इन्द्राजी के नेतृत्व में फिर १९८० में कांग्रेस सत्ता पर आगई ! इसके बाद कांग्रेस को लगने लगा की देश कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता ! गद्दी पर या कांग्रेस के शीर्ष पर गांघी परिवार का ही होना चाहिए,कांग्रेस का नेतृत्व करने वाला, चाहे वो पप्पू का दिमाग रखता हो, चाहे पैदायशी विदेश की ही क्यों न हो ! चाहे भष्टाचार के गद्दे में ही क्यों न पड़ा हो ! आसाम के चुनाव २०१६ पर एक सही और विस्तृत जानकारी के लिए थपकी देता हूँ और आशीर्वाद कहता हूँ ! चाचा के ब्लॉग पर आकर सकारात्मक टिप्पणी के लिए धन्यवाद करता हूँ !

के द्वारा: harirawat harirawat

जय श्री राम जवाहर लालजी बहुत सही फ़रमाया आपने लेख में आज कर धरने की राजनीती हो गयी आपने केजरीवाल के डिग्री की बात पर कुछ सुनना चाहते थे.वोट बैंक की राजनीती ने देश को बर्बाद कर दिया कांग्रेस संसद पर बहस नहीं करती सडको पर धरना आगंवाडियो के बारे में हमें कुछ नहीं मालूम ममता तो चुनाव आयोग को देखने की भी बात करती मीडिया वाले राजनीती में ज्यादा दिलचस्पी रखते बापू आशारामजी के समर्थक इतना समर्थन जुटते कोइ मीडिया नहीं दिखता मीडिया ट्रायल भी बहुत खतरनाक है हमने अपनी समस्या के बारे में कई मीडिया वालो को लिखा कोइ सुनता नहीं कुछ मीडिया वाले मोदीजी के समर्थन वाले पत्र भी नहीं प्रकाशित करते अब उत्तराखंड पर और केजरीवाल पर आपके लेखो का इंतज़ार है.लेख के लिए धन्यवाद और साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! बहुत खूब ! क्या गजब का आपने सपना देखा है और लिखा है ! बहुत मनमोहक और कल्पनाशील पोस्ट है ! मैं तो उस समय इस मंच से जुड़ा ही नहीं था ! किन्तु उस समय के एक से बढ़कर एक अनगिनत विद्वानों की ढेरों प्रतिक्रिया पढ़कर यही लगता है कि साहित्यिक दृष्टि से वो इस मंच का स्वर्णिम युग था ! क्रिया-प्रतिक्रिया से दूर हो अब तो अधिकतर लोग सिर्फ लिखे जा रहे हैं ! यही वजह है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ एक प्रतिक्रिया पाने तक को तरस जा रही है ! उस समय यानि 2011 -12 में मंच पर ऐसी प्रतिभाशाली और सक्रीय विद्वत मंडली थी जो सबकी कलम को अच्छा से अच्छा लिखने को प्रोत्साहित रहती थी ! तब मंच पर काफी कम्पटीशन भी था, लेकिन यही कम्पटीशन ब्लॉगर को अच्छा से अच्छा लिखने को मजबूर भी कर देता था ! पुराने ब्लॉगरों कि रचनाओं तक किसी प्रतिक्रिया के जरिये ही फ़िलहाल पहुंचा जा सकता है ! उस समय के अधिकतर साहित्यकार मंच से आज गायब हैं, किन्तु उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक धरोहर मंच पर अब भी मौजूद है, जिसे न सिर्फ सम्भालकर रखने की जरुरत है, बल्कि उनतक सहजता से आज के ब्लॉगर पहुँच सकें, इसकी भी व्यवस्था करने की जरुरत है ! कुछ दिन पहले जागरण मंच को मैंने सुझाव दिया था कि पुराने ब्लॉगरों की रचनाओं तक आसानी से पहुँचने के लिए मंच न सिर्फ उनकी एक लिस्ट मुख्य पेज पर प्रकाशित करे, बल्कि सर्च करने की सुविधा भी प्रदान करे ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत सुन्दर, जवाहर बेटे, आगस्त वेस्ट लैंड पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा किया गया जघन्य अफराध वो भी सोनिया जी के मैके की अदालत द्वारा लगाए गए, इतनी विस्तृत जानकारी के लिए साधुवाद ! सोनिया गांधी कितना भी कहे की मैं नहीं डरती, किसने कहा की "सोनिया-राहुल डरो" ! जिस दिन से मोदीजी ने सत्ता संभाली चोर उसी दिन से बंगले झांकने लगे थे ! मोदी जी को तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं पडी, इस परिवार द्वारा 'नेशनल हैराल्ड' घोटाला, अपने आप खुला, आगस्त वेस्ट लैंड इटली की अदालत ने नामों के साथ उजागर किया, अब तो मोदी जी या भाजपा ने क्या करना है जो कुछ करेगी अब भारत की अदालत करेगी ! शेर के सामने खड़े होकर तुम क्या कर सकते हो जो कुछ करना है अब तो शेर को करना है ! बेटे को अच्छी जानकारी मुहैया कराने के लिए आशीर्वाद !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपकी पैनी लेखनी से निकले इस तथ्यपरक एवं निष्पक्ष लेख को पढ़ने के उपरांत इंडिया टुडे, आउटलुक आदि किसी भी पत्रिका में इस विषय से संबंधित सामग्री को पढ़ने की आवश्यकता नहीं लगती । जो कुछ भी कहा जा रहा है, फ़ैसले की प्रति को ठीक से पढ़े (और समझे) बिना ही कहा जा रहा है । स्पष्ट ही है कि सत्य तक पहुँचने का प्रयास करने के स्थान पर राजनीतिक एवं चुनावी लाभ हेतु गाल बजाए जा रहे हैं । जनता का ध्यान उसके हित से जुड़े विषयों से हटाने के लिए क्षणिक रोमांच देने वाले नवीन घटनाक्रमों की दिन-प्रतिदिन आवश्यकता भी तो होती है हमारे नेताओं को जो यही मानते हैं कि जनता को मनोरंजन ही चाहिए, अपनी दैनंदिन समस्याओं का समाधान नहीं ।

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आदरणीया डॉ शोभा जी, सादर अभिवादन! गांवों की उपेक्षा शुरू से होती रही है तभी गांव के लोग शहरों की तरफ पलायन करते हैं जीतन मैंने हाल के बिहार को देखा है नीतीश कुमार ने भी गांवों के विकास के लिए बहुत काम किया है. अन्य राज्य भी इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे तो अवश्य ही देश विकसित होगा. हम सब उम्मीद करते हैं कि पंचायत प्रतिनिधि, खासकर महिला प्रतिनिधि, जिनपर प्रधान मंत्री ने जोर देकर कहा है कि अगर वे चाह लें तो इसे सम्भव किया जा सकता है. यह भी उम्मीद की जाने चाहिए कि पुरुष वर्ग उन्हें ईमानदारी से काम करने देंगे. अन्य सरकारी अफसर को भी पूरा पूरा सहयोग करना चाहिए जैसा कि आयोजन को सफल बनाने में सबका योगदान रहा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री जवाहर जी बहुत ज्ञान वर्धक लेख सबसे बड़ी बात तब मानी जाएगी जब गावों में ही रोजगार बढ़ेंगे लोग बड़े शहरों की और पलायन नहीं करेंगे आपके लेख द्वारा बहुत कुछ जानने को मिला जैसे डॉ भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और पंचायतों के सहयोग से भारत उदय अभियान की शुरूआत की और इसका समापन 24 अप्रैल 2016 को जमशेदपुर में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश भर के लगभग 6000 पंचायती राज प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन के साथ होगा । इस सभा को प्रधान मंत्री व झारखंड के मुख्यमंत्री संबोधित करेंगे ।स्थानीय समस्यों और राजनीति पर आप सदैव बहुत अच्छा प्रकाश डालते हैं

के द्वारा: Shobha Shobha

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के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय अगरवाल साहब, जय श्रीराम! ममता कभी किसी से नहीं डरी हैं. ज्योति बसु ने उन्हें पुलिस से बहुत पिटवाया था, फिर भी वह लाठी खाकर भी लड़ती रहीं और एक दिन माकपा (बामपंथियों) के गढ़ को उखड फेंका. चुनाव आयोग अपनी ड्यूटी निभाने में स्वतंत्र है कानून का डंडा चुनाव आयोग के पास है. उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी ममता ही सरकार बनाएंगी पर जीतने काम पाएंगी. भाजपा हर जगह फायदे में रहेगी. नीतीश कुमार आत्म मुग्ध हैं,पर अभी राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बननी बाकी है. वैसे बिहार में उन्होंने जो काम किया है वह धरातल पर दिखता है. जनता ने ऐसे ही तीसरी बार उन्हें नहीं चुना है. जमशेदपुर में रामनवमी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, पर हजारीबाग, बोकारो में थोड़ी बहुत अशांति हुई है. कुछ खुरापाती लोग ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं. आपका हार्दिक आभार और रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं! जय श्री राम!

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जय श्री राम जवाहर लालजी ममता कहती उन्हें किसी का दर नहीं चुनाव आयोग छाए जितने नोटिस भेजे हम बार  बार यही करेंगे यानी आचार संहिता तोडेगे क्या यही लोकतंत्र है नितीश कहते आरएसएस के खिलाफ सब एकजुट हो लगता है उन्हें आतंकवादियो को लेने में भी नहीं परहेज इन विधान सभा के चुना में आसाम में ही बीजेपी सरकार बना सकती बाकी जगह अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद आज कल के नेता उलटे सीधे व्यान देते रहते देश की चिंता कम हर एक प्रधान मंत्री का सपना देख रहा आपने लेख में बहुत अच्छी बाते खुल कर रक्खी आपकी लेखनी की बारीखता से पढ़ कर मज़ा आ जाता आप ऐसे लिखते रहे  हम लोग  पढ़ते रहे राम नवमी की शुभकामनाओ के साथ भगवन रामजी राष्ट्र  को अपना  आशीर्वाद  प्रदान करे.

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आदरणीय अग्रवाल साहब, मोदी जी की कार्य शैली और उनकी छवि से जनमानस लगभग संतुष्ट है, पर विरोधी तो विरोध करेंगे ही, मेर तात्पर्य है कि उनके छुटभैये नेता को अंत शांत बयानबाजी से बचने चाहिए. विदेशों में जो छवि भारत की बनी है वह मोदी जी के व्यक्तित्व और कार्यकुशलता, वक्तृत्व कला की देन है. आम जनता/ गरीब जनता को भी नजर आना चाहिए कि काम धरातल पर हो रहा है. जैसे लातूर में पानी पहुँचाना, मोदी जी और सुरेश प्रभु की उपलब्धि कही जाएगी. केरल के कोट्टम में मोदी जी का पहुंचकर मदद पहुँचाना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है, मेरी राय में. विपक्ष क्या बोलता है उसकी चिंता करते रहेंगे तो काम नहीं कर पाएंगे, और मोदी जी चिंता करते भी नहीं हैं. अभी फिलहाल उनको खतरा नहीं है. १९ मई के नतीजे अगर आशानुकूल रहे तो आगे का रास्ता भी साफ़ होगा. थोड़ी बहुत परेशानी हर सरकार को रहती है . उससे चतुराई से पेश आना ही तो राजनीति है. मैं आपकी ही प्रतिक्रया का इंतज़ार कर रहा था, पर जागरण जंक्शन की तकनीकी टीम के कारण आप बार बार असफल हो रहे थे. कहर ... जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलहि न कछु संदेहू. आपका बहुत बहुत आभार!

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जय श्री राम जवाहर लाल जी इस सार्थक,विस्तृत और तथ्यों से पूर्ण लेख के लिए बढ़ाई सेक्युलर नेता ममता,केजरीवाल,नितीश मोदीजी के लिए जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हताशा दिखती.बीजेपी हिन्दुओ को साम्प्रदायिक कहना गलत यदि बीजेपी सेक्युलर नहीं तो कोइ भी नहीं मोदीजी बहुत अच्छा काम कर रहे लेकिन मीडिया का एक भाग कांग्रेस की चमचागिरी में लगा रहता बिहार में बीजेपी हारी क्या वहां वोट विकास या अन्य मुद्दों पर पड़े नहीं जाती के नाम पर एक अपराधी भ्रष्टाचारी लालू यदि चुनाव जीत जाता ये बिहार के और देश के लिए शुभ नहीं कल हमने १० बार प्रतिक्रिया डालने की कोशिश की नहीं गयी हार गए आज फिर कोशिश कर रहे आपकी लेखनी के तो हम मुफीद है बहुटी आभार और साधुवाद.योग और आंबेडकर जी को संयुक्त राष्ट संघ में शामिल करना देश का बहुत बड़ा सम्मान मोदीजी बधाई के पात्र

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आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आप सही कह रही हैं, जागरण जंक्शन साइट भी काफी देर के बाद खुलता है कभी कभी तो खुलता ही नहीं. तकनीकी विभाग को इसका संज्ञान लेना चाहिए. आखिर इतना पॉपुलर साइट अगर तकनीकी रूप से समृद्ध न हो तो निराशा होती है. नवभारत टाइम्स इससे आजकल बेहतर लग रहा है. अपने विचार प्रकट करने का ये कुछ साइट हैं जहाँ हम एक दुसरे से रूबरू होते हैं. कुछ नयी जानकारियां भी मिलती हैं. काफी लोग विद्वान हैं, तार्किक हैं. आपकी तो कोई तुलना ही नहीं है. आप समय भी खूब देती हैं. काफी ब्लॉग को आप पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं. प्रतिक्रिया पाकर लेखक का हौसला बढ़ता है और आगे लिखने की इच्छा होती है. बस बहुत बातें लिख गया सादर आभार आपका हौसला अफजाई के लिए!

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आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपके कई लेखों के माध्यम से पता चलता है कि आप जातिवाद और जातिगत भेदभाव के खिलाफ हैं. मेरे स्वर्गीय अग्रज भी रामाश्रम सत्संग संस्था से जुड़े थे, उनके साथ मैं भी कभी-कभी सत्संग में जाता था. वहां भी जाति गत भेदभाव नहीं था. सभी एक साथ बैठकर सत्संग भी करते थे और एक साथ बैठकर सामान्य भोजन करते थे. कुछ संस्थाएं हैं जो इन प्रयासों में लगी हैं पर अधिकांश धार्मिक संगठन या तो जातिगत भेदभाव से ग्रसित हैं या फिर राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनेताओं के संपर्क में रहते हैं. आप सही कह रहे हैं कि सब धार्मिक संस्थाएं और धर्मगुरु ऐसा ही करें तो दलितों का और हिन्दू समाज का कुछ भला हो ! पर प्रश्न बड़ा है कि यह भार लेनेवाला कौन हैं. सभी तो आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं. बीच बीच में विष वमन कर और घृणा का माहौल उत्पन्न करते रहते हैं.खैर कभी न कभी तो परिवर्त्तन होगा या फिर भयंकर क्रांति से सब कुछ ख़त्म न हो जाए. बुद्धिजीवियों , नेताओं और समाज सुधारकों को सतत प्रयास करने की जरूरत है. आपके उत्साहवर्धन का हार्दिक आभार!

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आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी, सादर अभिवादन! मोदी जी की बातें बहुआयामी होती हैं. वे बातों को मोड़ना, घुमाना अच्छी तरह से जानते हैं. आज आरक्षण के अंतर्गत इतना बड़ा वोट बैंक है कि सत्ता में रहनेवाली या विरोधी पार्टियां कभी भी आरक्षण जैसे हथियार को अपने हाथ से जाने नहीं देंगी. बीच बीच में जो आवाजें उठती हैं वह भी मेरी समझ से तुष्टिकरण जैसी ही लगती है. ताकि सवर्ण अपने आपको उपेक्षित न समझे. या भाजपा अब उनके साथ अन्याय कर रही है, ऐसा सन्देश न जाय! इसीलिये कभी-कभी आरक्षण पर पुनर्विचार की बात कह दी जाती है और उधर हरियाणा को तबाह करनेवाली जाट-समुदाय को आरक्षण के अंदर शामिल कर लिया जाता है. बहुत कठिन है आर्कषण को हटाना, और उससे भी कठिन है सही लोगों/यानी जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुँचाना. आपने विस्तृत और सारगर्भित प्रतिक्रिया दी है उसके लिए आपका ह्रदय से सम्मान करता हूँ.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

साप्ताहिक सम्मान के लिए हार्दिक बधाई जवाहर जी । आपका लेख तथ्यपरक होने के साथ-साथ पॉलीटिकली करेक्ट भी है क्योंकि आज का युग तो अंबेडकर के महिमामंडन का ही युग है । चुनाव के बाज़ार में बिकने वाला ब्रांड बन गए हैं वे । उनकी आलोचना करने के लिए तथा उनसे संबंधित नकारात्मक तथ्यों को उजागर करने के लिए बड़ा साहस चाहिए जो अंतिम बार अरुण शौरी जी ने दिखाया था, अब कोई दिखा सकने वाला नहीं । कोई दिखाएगा तो उनके उग्र भक्त उसे जीने नहीं देंगे । वे प्रासंगिक हैं लेकिन उनके नाम की रोटियां तोड़ने वाले उनके चेले-चपाटे अनवरत तथा असीमित आरक्षण एवं  तथाकथित सवर्ण जातियों की वर्तमान पीढ़ी के निर्दोष सदस्यों के प्रति प्रतिशोधात्मक दृष्टिकोण में ही उनकी प्रासंगिकता देखते हैं, अन्य किसी रूप में नहीं । निस्संदेह वे दलितों के मसीहा थे और हैं लेकिन आज जो हो रहा है, वह वे नहीं चाहते थे । आपने समाचार-पत्रों में पढ़ा होगा कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पूर्व ही खम ठोककर घोषणा की थी कि आज स्वयं अंबेडकर भी आ जाएं तो वे भी आरक्षण को समाप्त नहीं करवा सकते । क्या आप उनके इस वक्तव्य के मर्म को भाँप सकते हैं ? 

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! सादर हरि स्मरण ! साप्ताहिक सम्मान 'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' चुने जाने की हार्दिक बधाई ! समाज के दबे कुचले और अस्पृश्यों के प्रति अन्याय और शोषण की जो समस्या आपने उठाई है, ये तब तक रहेगी जबतक कि देश में जातिवाद हावी है ! इस समस्या का समाधान वस्तुतः धर्मगुरुओं खासकर शंकराचार्यों के पास है, किन्तु वो तो जातिवाद का फायदा और आनंद लेने में मग्न है ! वो कुछ नहीं करने वाले ! एक छोटे से प्रयास के रूप में अपने आश्रम में जातिवाद ख़त्म कर दिया है ! पिछले चौबीस सालों में जातिगत भेदभाव करने वाले कई लोंगो को निष्कासित किया गया ! सब धार्मिक संस्थाएं और धर्मगुरु ऐसा ही करें तो दलितों का और हिन्दू समाज का कुछ भला हो !

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आदरणीय सादर प्रणाम .................. अगर आंकलन किया जाये तो सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि समाज का संभ्रात वर्ग आदिवासी समाज को सहजता से स्वीकार करता है लेकिन दलित जातियों को स्वीकारने में भयानक कतराता है। दलितों में भी हरिजन उसके लिए सबसे ज्यादा अस्वीकार्य? क्यों? क्यूंकि देश का अधिकांश उच्च वर्ग बात बात में गालियां भी देता है तो उसी तरह की जो इन जातियों के बारे में होती है और इनकी सामाजिक और सांस्कृतिक अनुपयोगिता पर होती है। जैसे सभ्यता के सभी सूत्र उसके पास है और वह जो चाहता है वही होता है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचार इसी घटिया समाजशास्त्र को चुनौती देते हैं। आज भी हमारे समाज में धार्मिक और जातिगत गैरबराबरी बदस्तूर जारी है  और इसी गैरबराबरी को हटाने के लिए बाबा साहेब अपनी अंतिम साँस तक अनवरत लड़ते रहे, उनका ये संदेश आज़ादी के दौरान जितना प्रासंगिक लगता था, आज उससे कहीं ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होता है l .......... 

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

आदरणीय सादर प्रणाम .................. अगर आंकलन किया जाये तो सबसे बड़ी सच्चाई ये है कि समाज का संभ्रात वर्ग आदिवासी समाज को सहजता से स्वीकार करता है लेकिन दलित जातियों को स्वीकारने में भयानक कतराता है। दलितों में भी हरिजन उसके लिए सबसे ज्यादा अस्वीकार्य? क्यों? वह बात बात में गालियां भी देता है तो उसी तरह की जो इन जातियों के बारे में होती है और इनकी सामाजिक और सांस्कृतिक अनुपयोगिता पर होती है। जैसे सभ्यता के सभी सूत्र उसके पास है और वह जो चाहता है वही होता है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचार इसी घटिया समाजशास्त्र को चुनौती देते हैं। आज भी हमारे समाज में धार्मिक और जातिगत गैरबराबरी बदस्तूर जारी है  और इसी गैरबराबरी को हटाने के लिए बाबा साहेब अपनी अंतिम साँस तक अनवरत लड़ते रहे, उनका ये संदेश आज़ादी के दौरान जितना प्रासंगिक लगता था, आज उससे कहीं ज्यादा प्रासंगिक प्रतीत होता है l .......... 

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

आदरणीय राजेश दुबे जी, सदर अभिवादन! आप से पूरी तरह सहमत हूँ. आज जो सभी नेता या दल जो बाबा साहेब का नाम जप रहे हैं वे सत्ता प्राप्ति या सत्ता में बने रहने के लिए ही ऐसा कर रहे हैं. आपका यह भी कहना सही है कि राम विलास पासवान, उदित राज, मायावती जैसे नेता कायदे से ख़ास दलितों ने अपना और अपने परिवार के भले के बारे में ज्यादा सोचा है. वे अपने समाज, और पिछड़ी/दलित जातियों के बारे में, उनके उत्थान के बारे में बहुत ज्यादा नहीं कर पाए हैं. आज जरूरत उसी की है कि दबे कुचले लोगों को कैसे ऊपर लाया जाय. सर्वप्रथम तो उन्हें शिक्षित किया जाय और थोड़ी प्राथमिकता/सुविधा दी जाय ताकि वे एक आम आदमी का जीवन तो जी सकें. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh